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कालेज से निकालने पर 90 हजार का जुर्माना
Auraiya, Uttar pradesh, India
Updated Wed, 10 Aug 2016 12:15 AM IST
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जुर्माना
- फोटो : अमर उजाला
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दो छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने पर उपभोक्ता फोरम ने विद्यालय प्रबंध समिति पर 90 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। प्रबंध समिति को इस रुपये का भुगतान शिकायतकर्ता को एक माह के अंदर करना होगा। समय से रुपया न देने पर प्रबंध समिति को सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
कस्बा फफूंद के मोहल्ला तरीन निवासी मोहम्मद अफजल पुत्र नियाज अहमद ने जिला उपभोक्ता फोरम में एक याचिका एक अगस्त 2015 में दायर की। याचिका में उसने बताया कि कस्बे में स्थित डा. जाकिर हुसैन नेशनल इस्लामिया इंटर कालेज में उसके भाई सद्दाम हुसैन और मोहम्मद आजम कक्षा 11 में पढ़ते थे। उसने जन सूचना अधिकार के तहत विद्यालय प्रबंध समिति के कुछ सूचना मांगी थी। जो राज्य आयोग में विचाराधीन है। इसी कारण विद्यालय प्रबंध समिति उससे रंजिश मानती है। इसी के चलते विद्यालय में पढ़ने वाले उसके भाइयों को प्रबंध समिति ने स्कूल से निकाल दिया। मांगने पर पहले फेल की टीसी दी और बाद में उसे भी जमा करा लिया। कई बार टीसी मांगने पर नहीं दी। इससे भाइयों का दाखिला अन्य स्कूलों में नहीं हो सका।
इधर प्रबंध समिति के पदाधिकारी जन सूचना अधिकारी मामले में उस पर समझौते का दबाव बनाने लगे। वह न्याय के लिए उपभोक्ता फोरम में पहुंचा। दोनों पक्षों की सुनवाई तीन अगस्त को होनी थी। उसी दिन विपक्षियों के न आने पर फोरम ने विपक्षियों द्वारा जमा किए गए साक्ष्यों के आधार पर मामले की सुनवाई हुई। जिसमें विपक्षियों को छात्रों की हुई क्षति के संबंध में 80 हजार रुपये और पांच हजार रुपये खर्च व पांच हजार रुपये अधिवक्ता की फीस देने का आदेश दिया। साथ ही यह भी कहा गया कि विपक्षी (विद्यालय की प्रबंध समिति) 90 हजार रुपये का भुगतान एक माह के अंदर करेगा। यदि वास्तविक भुगतान की तिथि तक विपक्षी भुगतान नहीं करते हैं तो उन्हें सात प्रति वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा।
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कस्बा फफूंद के मोहल्ला तरीन निवासी मोहम्मद अफजल पुत्र नियाज अहमद ने जिला उपभोक्ता फोरम में एक याचिका एक अगस्त 2015 में दायर की। याचिका में उसने बताया कि कस्बे में स्थित डा. जाकिर हुसैन नेशनल इस्लामिया इंटर कालेज में उसके भाई सद्दाम हुसैन और मोहम्मद आजम कक्षा 11 में पढ़ते थे। उसने जन सूचना अधिकार के तहत विद्यालय प्रबंध समिति के कुछ सूचना मांगी थी। जो राज्य आयोग में विचाराधीन है। इसी कारण विद्यालय प्रबंध समिति उससे रंजिश मानती है। इसी के चलते विद्यालय में पढ़ने वाले उसके भाइयों को प्रबंध समिति ने स्कूल से निकाल दिया। मांगने पर पहले फेल की टीसी दी और बाद में उसे भी जमा करा लिया। कई बार टीसी मांगने पर नहीं दी। इससे भाइयों का दाखिला अन्य स्कूलों में नहीं हो सका।
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इधर प्रबंध समिति के पदाधिकारी जन सूचना अधिकारी मामले में उस पर समझौते का दबाव बनाने लगे। वह न्याय के लिए उपभोक्ता फोरम में पहुंचा। दोनों पक्षों की सुनवाई तीन अगस्त को होनी थी। उसी दिन विपक्षियों के न आने पर फोरम ने विपक्षियों द्वारा जमा किए गए साक्ष्यों के आधार पर मामले की सुनवाई हुई। जिसमें विपक्षियों को छात्रों की हुई क्षति के संबंध में 80 हजार रुपये और पांच हजार रुपये खर्च व पांच हजार रुपये अधिवक्ता की फीस देने का आदेश दिया। साथ ही यह भी कहा गया कि विपक्षी (विद्यालय की प्रबंध समिति) 90 हजार रुपये का भुगतान एक माह के अंदर करेगा। यदि वास्तविक भुगतान की तिथि तक विपक्षी भुगतान नहीं करते हैं तो उन्हें सात प्रति वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा।
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