{"_id":"650f296f0154565db806a80a","slug":"officials-were-not-aware-of-power-plant-handover-auraiya-news-c-211-1-sknp1003-3255-2023-09-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Auraiya News: बिजलीघर हैंडओवर होने की नहीं थी अधिकारियों की जानकारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Auraiya News: बिजलीघर हैंडओवर होने की नहीं थी अधिकारियों की जानकारी
Sat, 23 Sep 2023 11:37 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Sat, 23 Sep 2023 11:37 PM IST
विज्ञापन
दिबियापुर। यूपीएसआईडीसी ने प्लास्टिक सिटी में बना बिजलीघर बिजली विभाग को हैंडओवर कर दिया। हैरत है कि तत्कालीन विभागीय बिजली अधिकारियों ने इसकी जानकारी विभाग को ही उपलब्ध नहीं कराई। जिससे यहां पर किसी कर्मचारी की तैनाती नहीं हुई। विभागीय अधिकारी मानते हैं कि यदि हैंडओवर होने की जानकारी होती तो यहां पर अवर अभियंता की तैनाती करके आसपास बिजली आपूर्ति शुरू कर दी जाती। इससे बिजली का सामान चोरी नहीं होता।
बिजली विभाग के अधिकारियों के अनुसार 19 सितंबर को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बैठक हुई थी। इसमें यूपीएसआईडीसी के अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2008 में प्लास्टिक सिटी में बनी बिजली लाइन, पावर हाउस आदि बिजली विभाग को हैंडओवर किया जा चुका है। इसके बाद कागजात खंगाले गए तो पता चला कि वर्ष 2019 में तत्कालीन अधीक्षण अभियंता अनूप चंद्रा को भी बिजली घर हैंडओवर होने की जानकारी नहीं थी।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार यदि हैंडओवर होने की जानकारी होती तो विभाग बिजली लाइन को ऊर्जीकृत कराके आसपास के क्षेत्र की बिजली आपूर्ति और बेहतर कर सकते थे। साथ ही यहां पर कम से कम एक बिजली विभाग के अवर अभियंता की तैनाती की जाती। लाइनें ऊर्जीकृत होने से यहां बिजली के सामान की चोरी रोकी जा सकती थी। इससे लगभग 15 वर्षों में पौने तीन करोड़ रुपये के सामान की चोरी रुक सकती थी। अब विभाग पुलिस की विवेचना रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अभी भी प्लास्टिक सिटी में लगभग 50 प्रतिशत सामान बचा है। अधिकारियों के आदेश पर कटे एवं टूटे तारों की मरम्मत एवं गायब उपकरण के स्थान पर दूसरे उपकरण लगाए जाने का काम शुरू हो जाएगा।
विज्ञापन
पूर्व में चोरी हुए 35 लाख के तार एवं उपकरण चोरी
जुलाई 2019 में भी अलग अलग फीडरों से 35 लाख रुपये के बिजली के तार एवं उपकरण चोरी हुए थे। तत्कालीन अवर अभियंता विवेक खरे ने दिबियापुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि दिबियापुर से सेहुद बंबा तक लगभग साढ़े तीन किलोमीटर दूर तक तार चोरों ने काट लिया। यह लाइन चिचौली स्थित जिला चिकित्सालय को बिजली आपूर्ति करती थी। बाद में औरैया फीडर से बिजली आपूर्ति होने लगी थी। इसके साथ ही दिबियापुर से कंचौसी मोड़ मिर्ची ढाबा तक लगभग सात किलोमीटर तार चोर काट ले गए थे। चोर लगभग तीन किलोमीटर लंबा तार काट ले गए थे। जबकि जनवरी 2021 में अटसू असेनी के बीच विद्युत लाइन के तार, इंसुलेटर आदि चोरी हो गए थे। इस मामले में फफूंद थाने में रिपोर्ट दर्ज हुई थी।
-- -- -
गैर ऊर्जीकृत तारों पर रहती चोरों की निगाह
वैसे तो कई बार चोर चलती बिजली की लाइन को भी निशाना बनाते हैं। लेकिन अधिकतर गैर उर्जीकृत (जिन लाइनों में विद्युत प्रवाह नहीं होता) लाइनों पर चोरों की निगाह रहती है। ऐसी विद्युत लाइनों पर सतर्कता बरतने से चोरी रोकी जा सकती है। दिबियापुर थाने के प्रभारी निरीक्षक रामसहाय पटेल का कहना है कि बिजली विभाग को गैर ऊर्जीकृत लाइनों के बारे में पुलिस को भी सूचना देनी चाहिए। ताकि पुलिस सतर्कता बरते।
-- -- -- -- -- -
प्लास्टिक सिटी में बने पावर हाउस के वर्ष 2008 में हैंडओवर होने के बाद ऊर्जीकृत होने की जानकारी उन्हें नहीं हैं। अब चोरी की रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है, पुलिस विवेचना में सब कुछ साफ हो जाएगा। लेखराज, अधिशासी अभियंता, विद्युत वितरण खंड औरैया
विज्ञापन
बिजली विभाग के अधिकारियों के अनुसार 19 सितंबर को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बैठक हुई थी। इसमें यूपीएसआईडीसी के अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2008 में प्लास्टिक सिटी में बनी बिजली लाइन, पावर हाउस आदि बिजली विभाग को हैंडओवर किया जा चुका है। इसके बाद कागजात खंगाले गए तो पता चला कि वर्ष 2019 में तत्कालीन अधीक्षण अभियंता अनूप चंद्रा को भी बिजली घर हैंडओवर होने की जानकारी नहीं थी।
विज्ञापन
विभागीय अधिकारियों के अनुसार यदि हैंडओवर होने की जानकारी होती तो विभाग बिजली लाइन को ऊर्जीकृत कराके आसपास के क्षेत्र की बिजली आपूर्ति और बेहतर कर सकते थे। साथ ही यहां पर कम से कम एक बिजली विभाग के अवर अभियंता की तैनाती की जाती। लाइनें ऊर्जीकृत होने से यहां बिजली के सामान की चोरी रोकी जा सकती थी। इससे लगभग 15 वर्षों में पौने तीन करोड़ रुपये के सामान की चोरी रुक सकती थी। अब विभाग पुलिस की विवेचना रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अभी भी प्लास्टिक सिटी में लगभग 50 प्रतिशत सामान बचा है। अधिकारियों के आदेश पर कटे एवं टूटे तारों की मरम्मत एवं गायब उपकरण के स्थान पर दूसरे उपकरण लगाए जाने का काम शुरू हो जाएगा।
विज्ञापन
पूर्व में चोरी हुए 35 लाख के तार एवं उपकरण चोरी
जुलाई 2019 में भी अलग अलग फीडरों से 35 लाख रुपये के बिजली के तार एवं उपकरण चोरी हुए थे। तत्कालीन अवर अभियंता विवेक खरे ने दिबियापुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि दिबियापुर से सेहुद बंबा तक लगभग साढ़े तीन किलोमीटर दूर तक तार चोरों ने काट लिया। यह लाइन चिचौली स्थित जिला चिकित्सालय को बिजली आपूर्ति करती थी। बाद में औरैया फीडर से बिजली आपूर्ति होने लगी थी। इसके साथ ही दिबियापुर से कंचौसी मोड़ मिर्ची ढाबा तक लगभग सात किलोमीटर तार चोर काट ले गए थे। चोर लगभग तीन किलोमीटर लंबा तार काट ले गए थे। जबकि जनवरी 2021 में अटसू असेनी के बीच विद्युत लाइन के तार, इंसुलेटर आदि चोरी हो गए थे। इस मामले में फफूंद थाने में रिपोर्ट दर्ज हुई थी।
गैर ऊर्जीकृत तारों पर रहती चोरों की निगाह
वैसे तो कई बार चोर चलती बिजली की लाइन को भी निशाना बनाते हैं। लेकिन अधिकतर गैर उर्जीकृत (जिन लाइनों में विद्युत प्रवाह नहीं होता) लाइनों पर चोरों की निगाह रहती है। ऐसी विद्युत लाइनों पर सतर्कता बरतने से चोरी रोकी जा सकती है। दिबियापुर थाने के प्रभारी निरीक्षक रामसहाय पटेल का कहना है कि बिजली विभाग को गैर ऊर्जीकृत लाइनों के बारे में पुलिस को भी सूचना देनी चाहिए। ताकि पुलिस सतर्कता बरते।
प्लास्टिक सिटी में बने पावर हाउस के वर्ष 2008 में हैंडओवर होने के बाद ऊर्जीकृत होने की जानकारी उन्हें नहीं हैं। अब चोरी की रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है, पुलिस विवेचना में सब कुछ साफ हो जाएगा। लेखराज, अधिशासी अभियंता, विद्युत वितरण खंड औरैया