फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Auraiya News ›   No occasion of splinter heritage

दरकती धरोहरों का नहीं ठौर

Mon, 10 Aug 2015 12:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो औरैया
अमर उजाला ब्यूरो औरैया Updated Mon, 10 Aug 2015 12:24 AM IST
विज्ञापन
No occasion of splinter heritage

आज हम स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी कर रहे हैं। आज चंद लोग ही ऐसे होंगे, जिन्होंने गुलाम औरैया में गोरों के तानाशाही को देखा होगा। हां, ब्रिटिश हुकूमत में बनाई गई इमारतों के अवशेष हमें अंग्रेजी शासन की याद ताजा कराते हैं।

विज्ञापन



अंग्रेजों के 200 वर्ष के शासनकाल में बनाई गईं इमारतें या तो आधुनिकता की आंधी में जमींदोज हो गईं हैं अथवा उनकी नींव दरकती जा रही हैं। अंग्रेजी शासन में बनाए गए भवनों को सहेजने में जिम्मेदार अब तक नाकाम ही साबित हो रहे हैं। स्वतंत्रता दिवस विशेष में अमर उजाला की अंग्रेज सरकार में निर्मित इमारतों पर खास रिपोर्ट ---
विज्ञापन




वक्त के थपेड़ों में ढहती नील कारखाना- नील का व्यापार करने की मंशा लेकर आए अंग्रेजों ने इसी नीयत से औरैया शहर में 17वीं ई. में प्रवेश किया था। उस जमाने में छोटा स्वरूप लिए शहर में अंग्रेजों ने यमुना रोड (आज यह स्थान पेंच ग्राउंड के नाम से जाना जाता है) पर नील कारखाना स्थापित किया था।
विज्ञापन
विज्ञापन



यहां गोरी हुकूमत कच्चे माल का भंडार लेकर नील तैयार करवाकर बाजार तक पहुंचाता था। इस पेंच ग्राउंड में नील पकाने के लिए बनवाई गई चिमनी और नील के भंडारण को बड़े-बड़े पक्के टैंक आज भी लोगों को अंग्रेजी शासन की याद ताजा कराते हैं। 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ।


अंग्रेजों के पलायन के बाद यह नील कारखाना भी बंद हो गया। नील कारखाने पर आजाद सरकारी मशीनरी की उपेक्षित निगाह के चलते पड़ताल में कारखाने की चिमनी, टैंक और भट्टियां वक्त के थपेड़ों में ढहती हुईं नजर आ रही हैं।


बस याद रह जाती है- औरैया। पुरानी तहसील भवन यानि परतंत्र औरैया में अंग्रेजों का शासकीय भवन कार्यालय, 12 अगस्त 1942 को शासकीय भवन पर लगे यूनियन जैक उतारकर तिरंगा फहराने को लेकर गोरों की गोलीबारी से शहीद हुए छह रणबांकुरे आज अपनी शहादत पर जरूर कोफ्त कर रहे होंगे।



आधुनिकता के दौर  में आज इस शासकीय इमारत के अवशेष भी गुम हैं। औरैया सरकार के रहनुमाओं की ओर से इस इमारत को ढहाकर यहां सदर तहसील का नया भवन निर्माण कराया जा रहा है। गौरव का प्रतीक इस इमारत को वर्ष 2012 में ढहा दिए जाने का दर्द शहर के लोगों को आज भी साल (खल) रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed