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खेतों से पानी निकालते गुजरी रात
अमर उजाला ब्यूरो औरैया
Updated Sun, 10 Jan 2016 10:52 PM IST
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मदा का पुरवा और गुनौली गांव के ग्रामीणों की पूरी रात खेत से पानी निकालने में गुजर गई। फसलों को बचाने के लिए किसान पूरी रात पानी निकलने का रास्ता बनाते रहे। किसानों ने एक किलोमीटर तक पानी निकालने का रास्ता बना डाला।
क्षेत्र के हरचंदपुर में बंबी कटने से बीते दिन किसानों की लगभग सवा सौ बीघा फसल जलमग्न हो गई थी। इसके बाद से किसानों ने बंबा बांधने के कई प्रयास किए, लेकिन पानी का बहाब बंधे को हटाता रहा। किसान सुबह से लेकर दोपहर तक पानी निकालने की जुगत बनाते रहे।
इधर जैसे ही बंबे में पानी उतरना शुरू हुआ, सैकड़ों ग्रामीण फावड़ा व तसला लेकर अपने खेतों से पानी निकालने में जुट गए। बड़े कास्तकारों ने ट्रैक्टर के माध्यम से इंजन लगाकर पानी निकालना शुरू किया। छोटे किसान अपने खेत के पानी निकासी के लिए नालियां बनाते दिखाई दिये। शनिवार शाम से रविवार दोपहर तक किसान भूख-प्यास भूलकर अपनी फसलों को बचाने में लगे रहे।
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जलभराव से सबसे ज्यादा तबाही मदा का पुरवा व गुनौली गांव के किसानों को उठानी पड़ी है। यहां किसानों की एक सैकड़ा से अधिक बीघा की फसल पर संकट के बादल मंडरा रहे है। हाथों में गेहूं के खेत की मिट्टी लिए किसान लाखन सिंह बताते हैं कि खेतों का ऊपरी पानी निकल चुका है। अब खेतों में गीली मिट्टी बची है।
मिट्टी को सूखने में समय लगा तो गेहूं पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगा। वहीं हरिश्चंद्र व मंशाराम ने बताया कि उनके खेत जलभराव के बीचों-बीच में पड़ते हैं। जब आसपास के खेतों का पानी निकल जाएगा। इसके बाद ही उनके खेत का नंबर आएगा। पानी निकलने में दो दिन लग गए तो फसल पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगी।
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क्षेत्र के हरचंदपुर में बंबी कटने से बीते दिन किसानों की लगभग सवा सौ बीघा फसल जलमग्न हो गई थी। इसके बाद से किसानों ने बंबा बांधने के कई प्रयास किए, लेकिन पानी का बहाब बंधे को हटाता रहा। किसान सुबह से लेकर दोपहर तक पानी निकालने की जुगत बनाते रहे।
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इधर जैसे ही बंबे में पानी उतरना शुरू हुआ, सैकड़ों ग्रामीण फावड़ा व तसला लेकर अपने खेतों से पानी निकालने में जुट गए। बड़े कास्तकारों ने ट्रैक्टर के माध्यम से इंजन लगाकर पानी निकालना शुरू किया। छोटे किसान अपने खेत के पानी निकासी के लिए नालियां बनाते दिखाई दिये। शनिवार शाम से रविवार दोपहर तक किसान भूख-प्यास भूलकर अपनी फसलों को बचाने में लगे रहे।
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जलभराव से सबसे ज्यादा तबाही मदा का पुरवा व गुनौली गांव के किसानों को उठानी पड़ी है। यहां किसानों की एक सैकड़ा से अधिक बीघा की फसल पर संकट के बादल मंडरा रहे है। हाथों में गेहूं के खेत की मिट्टी लिए किसान लाखन सिंह बताते हैं कि खेतों का ऊपरी पानी निकल चुका है। अब खेतों में गीली मिट्टी बची है।
मिट्टी को सूखने में समय लगा तो गेहूं पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगा। वहीं हरिश्चंद्र व मंशाराम ने बताया कि उनके खेत जलभराव के बीचों-बीच में पड़ते हैं। जब आसपास के खेतों का पानी निकल जाएगा। इसके बाद ही उनके खेत का नंबर आएगा। पानी निकलने में दो दिन लग गए तो फसल पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगी।