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Auraiya News: फाइलेरिया से बचने के लिए दवा का सेवन अवश्य करें
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संवाद न्यूज एजेंसी
दिबियापुर। विवेकानंद ग्रामोद्योग महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा राष्ट्रीय फाइलेरिया मुक्त अभियान गोष्ठी का आयोजन किया गया। यहां दिबियापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सकों ने फाइलेरिया दवा का वितरण भी किया। सभी ने लाइलाज फाइलेरिया बीमारी से बचने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा वितरित की जाने वाली निर्धारित डोज लेने की सलाह दी।
महाविद्यालय में आयोजित गोष्ठी में डॉ. दमयंती ने फाइलेरिया के बारे में बताया कि यह बीमारी संक्रमण से होती है। डॉ. निधि चौधरी ने फाइलेरिया बीमारी से होने वाले खतरे के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इससे बचने के लिए आसपास सफाई रखें और पूरी आस्तीन की बांह के कपड़े पहनें। साथ ही मच्छरदानी का प्रयोग करें। निर्मल कटियार ने बताया कि फाइलेरिया को मच्छरों से फैलने वाली बीमारी बताया।
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा फाइलेरिया के लिए दवा का वितरण किया जाता है। जरूरी नहीं कि मच्छर काटने के तुरंत बाद बीमारी हो। इसकी बीमारी के लक्षण मच्छर काटने के कई वर्ष बाद भी सामने आ सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा वितरित की जाने वाली दवा वर्ष में एक बार पांच वर्षों तक खाकर फाइलेरिया बीमारी से बचा जा सकता है। यह बीमारी हो जाने के बाद लाइलाज होती है। इसलिए दवा का सेवन अवश्य करें। डॉ. रीना आर्य, डॉ. शीलू त्रिवेदी, डॉ. राकेश तिवारी, डॉ. विनोद कुमार, डॉ. हिमांशु यादव, डॉ. निकिता अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
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दिबियापुर। विवेकानंद ग्रामोद्योग महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा राष्ट्रीय फाइलेरिया मुक्त अभियान गोष्ठी का आयोजन किया गया। यहां दिबियापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सकों ने फाइलेरिया दवा का वितरण भी किया। सभी ने लाइलाज फाइलेरिया बीमारी से बचने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा वितरित की जाने वाली निर्धारित डोज लेने की सलाह दी।
महाविद्यालय में आयोजित गोष्ठी में डॉ. दमयंती ने फाइलेरिया के बारे में बताया कि यह बीमारी संक्रमण से होती है। डॉ. निधि चौधरी ने फाइलेरिया बीमारी से होने वाले खतरे के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इससे बचने के लिए आसपास सफाई रखें और पूरी आस्तीन की बांह के कपड़े पहनें। साथ ही मच्छरदानी का प्रयोग करें। निर्मल कटियार ने बताया कि फाइलेरिया को मच्छरों से फैलने वाली बीमारी बताया।
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उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा फाइलेरिया के लिए दवा का वितरण किया जाता है। जरूरी नहीं कि मच्छर काटने के तुरंत बाद बीमारी हो। इसकी बीमारी के लक्षण मच्छर काटने के कई वर्ष बाद भी सामने आ सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा वितरित की जाने वाली दवा वर्ष में एक बार पांच वर्षों तक खाकर फाइलेरिया बीमारी से बचा जा सकता है। यह बीमारी हो जाने के बाद लाइलाज होती है। इसलिए दवा का सेवन अवश्य करें। डॉ. रीना आर्य, डॉ. शीलू त्रिवेदी, डॉ. राकेश तिवारी, डॉ. विनोद कुमार, डॉ. हिमांशु यादव, डॉ. निकिता अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
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