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मॉकड्रिल : ऑपरेशन सिंदूर ... सरकार का सराहनीय कदम
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औरैया। पहलगाम में पर्यटकों को गोली मारने के बाद मंगलवार रात भारतीय सेना के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर समाज का प्रत्येक वर्ग सराहना करता नजर आया।
खासतौर पर पूर्व सैनिकों ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सरकार की सराहना की। उनका कहना था कि पाकिस्तान को माकूल जवाब दिया गया है। पहला और सटकी वार और फिर मॉकड्रिल के जरिये शहर कस्बों में जरूरी सावधानी दुश्मनों के मंसूबों पर भारी पड़ेगी। बॉर्डर पर जितना तेवर दिखाया गया है, उतनी ही सावधानी शहर कस्बों में बरती जा रही है।
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चार युद्ध लड़े, पहले और अब में बड़ा अंतर
अछल्दा कस्बा के मानिकपुर निवासी नायक साहब सिंह बताते हैं कि वह आर्टीलरी में तैनात थे। 1962, 65, 66 व 71 की जंग में वह सेना के हिस्सा थे। बॉर्डर पर फौज के तेवर कभी फीके नहीं पड़े। अब और तब में बड़ा अंतर है। अब फौज और भी मजबूत हो चुकी है। दुश्मन देशों के कभी भी छक्के छुड़ाए जा सकते हैं। शहर कस्बों में तब भी सिविल पुलिस ने सजगता दिखाई थी और आज भी दिखाई।
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लॉन्ग रेंज वेपन का दौर, लेकिन एंटी बायलेस्टिक मिसाइल हैं काफी
अछल्दा कस्बा निवासी कैप्टन जयवीर सिंह बताते हैं कि वह आर्मी एयर डिफेंस में थे। साल 1999 के कारगिल युद्ध में वह सियाचिन ग्लेसियर की समीप की यूनिट में थे। उस दौर चंद दूरी तक मारक क्षमता वाले हथियार थे, लेकिन अब लॉन्ग रेंज वेपन का दौर है। भारतीय सेना के पास बेहतर एंटी बायलेस्टिक मिसाइल सिस्टम है। देश की सीमा में घुसने से पहले ही हवा में दुश्मन देश की मिसाइलों का खात्मा कर दिया जाएगा। चिंता तो दुश्मन देश को करनी चाहिए। जहां भारत ने एयर स्ट्राइक कर ऑपरेशन सिंदूर को सफल बनाया।
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सरपंचों ने निभाई थी अहम जिम्मेदारी
शहर के मोहल्ला ओमनगर निवासी कैप्टन जगपाल सिंह भदौरिया बताते हैं कि वह साल 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान कुपवाड़ा में थे। युद्ध के दौरान बॉर्डर पर फौज जहां अपने तेवर दिखा रही थी तो वहीं, स्थानीय स्तर पर सिविल पुलिस व सरपंच सक्रिय थे। पहला मसला जान बचाना। इसके साथ ही सरपंचों ने महीनों के लिए राशन सामग्री का स्टॉक कर लिया था। जोकि युद्ध के दिनों व उसके बाद स्थानीय लोगों के काफी काम आई थी। समाज का प्रत्येक वर्ग ऐसी स्थिति में अपनी भूमिका निभाता है। ऑपरेशन सिंदूर अभी तक का अभूतपूर्व सराहनीय कदम है।
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तनाव के बीच सुरक्षा के लिए मॉकड्रिल की रणनीति बेहतर
शहर निवासी पूर्व सैनिक अविनाश अग्निहोत्री ने बताया कि पाकिस्तान में बैठे आतंकियों पर ऑपरेशन सिंदूर के जरिये पहला वार सरकार व फौज का सराहनीय कदम है। पहले वार के बाद देशव्यापी मॉकड्रिल से सजगता का संचार होगा। दुश्मन पर अटैक के बाद सुरक्षा की संजीदगी उनके मंसूबों पर पानी फेर देगा।
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खासतौर पर पूर्व सैनिकों ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सरकार की सराहना की। उनका कहना था कि पाकिस्तान को माकूल जवाब दिया गया है। पहला और सटकी वार और फिर मॉकड्रिल के जरिये शहर कस्बों में जरूरी सावधानी दुश्मनों के मंसूबों पर भारी पड़ेगी। बॉर्डर पर जितना तेवर दिखाया गया है, उतनी ही सावधानी शहर कस्बों में बरती जा रही है।
चार युद्ध लड़े, पहले और अब में बड़ा अंतर
अछल्दा कस्बा के मानिकपुर निवासी नायक साहब सिंह बताते हैं कि वह आर्टीलरी में तैनात थे। 1962, 65, 66 व 71 की जंग में वह सेना के हिस्सा थे। बॉर्डर पर फौज के तेवर कभी फीके नहीं पड़े। अब और तब में बड़ा अंतर है। अब फौज और भी मजबूत हो चुकी है। दुश्मन देशों के कभी भी छक्के छुड़ाए जा सकते हैं। शहर कस्बों में तब भी सिविल पुलिस ने सजगता दिखाई थी और आज भी दिखाई।
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लॉन्ग रेंज वेपन का दौर, लेकिन एंटी बायलेस्टिक मिसाइल हैं काफी
अछल्दा कस्बा निवासी कैप्टन जयवीर सिंह बताते हैं कि वह आर्मी एयर डिफेंस में थे। साल 1999 के कारगिल युद्ध में वह सियाचिन ग्लेसियर की समीप की यूनिट में थे। उस दौर चंद दूरी तक मारक क्षमता वाले हथियार थे, लेकिन अब लॉन्ग रेंज वेपन का दौर है। भारतीय सेना के पास बेहतर एंटी बायलेस्टिक मिसाइल सिस्टम है। देश की सीमा में घुसने से पहले ही हवा में दुश्मन देश की मिसाइलों का खात्मा कर दिया जाएगा। चिंता तो दुश्मन देश को करनी चाहिए। जहां भारत ने एयर स्ट्राइक कर ऑपरेशन सिंदूर को सफल बनाया।
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सरपंचों ने निभाई थी अहम जिम्मेदारी
शहर के मोहल्ला ओमनगर निवासी कैप्टन जगपाल सिंह भदौरिया बताते हैं कि वह साल 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान कुपवाड़ा में थे। युद्ध के दौरान बॉर्डर पर फौज जहां अपने तेवर दिखा रही थी तो वहीं, स्थानीय स्तर पर सिविल पुलिस व सरपंच सक्रिय थे। पहला मसला जान बचाना। इसके साथ ही सरपंचों ने महीनों के लिए राशन सामग्री का स्टॉक कर लिया था। जोकि युद्ध के दिनों व उसके बाद स्थानीय लोगों के काफी काम आई थी। समाज का प्रत्येक वर्ग ऐसी स्थिति में अपनी भूमिका निभाता है। ऑपरेशन सिंदूर अभी तक का अभूतपूर्व सराहनीय कदम है।
तनाव के बीच सुरक्षा के लिए मॉकड्रिल की रणनीति बेहतर
शहर निवासी पूर्व सैनिक अविनाश अग्निहोत्री ने बताया कि पाकिस्तान में बैठे आतंकियों पर ऑपरेशन सिंदूर के जरिये पहला वार सरकार व फौज का सराहनीय कदम है। पहले वार के बाद देशव्यापी मॉकड्रिल से सजगता का संचार होगा। दुश्मन पर अटैक के बाद सुरक्षा की संजीदगी उनके मंसूबों पर पानी फेर देगा।