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खिलौनों से पटा बाजार, नहीं मिल रहे खरीदार
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औरैया। पुराना नुमाइश मैदान में करीब डेढ़ माह से सावन-भादों महोत्सव में लगी दुकानों पर 80 रुपये से 1200 रुपये तक की कारण कार हैं। डिजाइनिंग चूड़ियां दुकानों में सजी हैं। लेकिन उनके खरीदार मेले में नहीं पहुंच रहे हैं। इस कारण दुकानदार किराया चुकाने के लिए औने-पौने दामों में माल बेचने को मजबूर हैं। दुकानदारों में मायूसी छाई है।
शहर में पहली बार आयोजित सावन-भादों महोत्सव को लेकर जहां शुरूआती दौर में लोगों में उत्साह दिखाई दे रहा था। वहीं उनका उत्साह कुछ ही दिनों में ठंडा पड़ गया। 27 अगस्त से शुरू हुए महोत्सव में दूर-दराज से आए दुकानदारों ने आमदनी की उम्मीद के साथ अपनी दुकानें लगाईं, लेकिन उनकी उम्मीद पूरी तरह से छलावा निकली। हालत यह है कि दुकानों पर सुबह से ग्राहकों के इंतजार में बैठे दुकानदार शाम को मायूस होकर दुकानें बढ़ाने को मजबूर हैं। ग्राहकों के वहां न पहुंचने पर दुकानदारों को किराया भी निकलना मुश्किल है। अमर उजाला की पड़ताल के दौरान खिलौनों की दुकान किए दुकानदार अखिलेश कुमार ने बताया उनकी दुकान पर बच्चों के लिए हर प्रकार के खिलौने हैं।
इन दिनों बच्चों में कार की मांग अधिक होने के कारण काफी वैरायटी लेकर आए थे। 80 रुपये से लेकर 1200 रुपये तक की कार उपलब्ध हैं। लेकिन नुकसान ही हाथ लगा है। ग्राहकों के बहुत ही कम संख्या में आने के कारण खर्चा भी निकालना मुश्किल बना हुआ है। वहीं सुहाग का सामान बेचने वाले चूड़ी दुकानदार शमीम सिद्दीकी ने बताया उनके पास 80 रुपये से लेकर 850 रुपये तक की चूड़ियां हैं। महोत्सव में 15 हजार रुपये किराए पर दुकान ली थी। लेकिन 35 दिन बीत चुके हैं। हालत यह है ग्राहकों के न आने से भारी नुकसान हुआ है। माल बेचकर किराए की भरपाई करने को मजबूर हैं।
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शहर में पहली बार आयोजित सावन-भादों महोत्सव को लेकर जहां शुरूआती दौर में लोगों में उत्साह दिखाई दे रहा था। वहीं उनका उत्साह कुछ ही दिनों में ठंडा पड़ गया। 27 अगस्त से शुरू हुए महोत्सव में दूर-दराज से आए दुकानदारों ने आमदनी की उम्मीद के साथ अपनी दुकानें लगाईं, लेकिन उनकी उम्मीद पूरी तरह से छलावा निकली। हालत यह है कि दुकानों पर सुबह से ग्राहकों के इंतजार में बैठे दुकानदार शाम को मायूस होकर दुकानें बढ़ाने को मजबूर हैं। ग्राहकों के वहां न पहुंचने पर दुकानदारों को किराया भी निकलना मुश्किल है। अमर उजाला की पड़ताल के दौरान खिलौनों की दुकान किए दुकानदार अखिलेश कुमार ने बताया उनकी दुकान पर बच्चों के लिए हर प्रकार के खिलौने हैं।
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इन दिनों बच्चों में कार की मांग अधिक होने के कारण काफी वैरायटी लेकर आए थे। 80 रुपये से लेकर 1200 रुपये तक की कार उपलब्ध हैं। लेकिन नुकसान ही हाथ लगा है। ग्राहकों के बहुत ही कम संख्या में आने के कारण खर्चा भी निकालना मुश्किल बना हुआ है। वहीं सुहाग का सामान बेचने वाले चूड़ी दुकानदार शमीम सिद्दीकी ने बताया उनके पास 80 रुपये से लेकर 850 रुपये तक की चूड़ियां हैं। महोत्सव में 15 हजार रुपये किराए पर दुकान ली थी। लेकिन 35 दिन बीत चुके हैं। हालत यह है ग्राहकों के न आने से भारी नुकसान हुआ है। माल बेचकर किराए की भरपाई करने को मजबूर हैं।
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