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आम, कटहल, पपीता, अमरूद पर मिलीबग का खतरा
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आम के पेड़ में लहलहाती आम की बौर ।संवाद
- फोटो : AURAIYA
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औरैया। आम, कटहल, पपीता और अमरूद आदि फसलों पर मिलीबग कीट का खतरा मंडराने लगा है। यह कीट फूलों का रस चूस लेते हैं, इससे बौर सूख जाते हैं और पैदावार प्रभावित होती है। यह कीट एक सीजन में अपने जीवनकाल का चक्र पूरा कर लेता है। इस कीट से बचाव के लिए जिला उद्यान विभाग ने किसानों को सलाह दी है।
सहायक जिला उद्यान अधिकारी धर्मेंद्र कुमार नेे बताया कि फरवरी माह के दूसरे सप्ताह से ही आम के पेड़ों पर बौर आना शुरू हो जाते हैं। मिलीबग कीट आम के पेड़ की शाखाओं पर पहुंचकर इसके चारों ओर भारी संख्या में एकत्रित हो जाते हैं और यहां से वह फूलों (बौर) व पौधों का रस चूसते हैं।
इससे शाखाएं व बौर सूखकर गिर जाते हैं। मिलीबग कीट इस दौरान एक मीठा द्रव्य भी छोड़ता है, जिसे हनीडियू कहते हैं। यह कीट पेड़ व तने को खराब करने के साथ फंगस की अन्य बीमारियां भी फैलाता है।
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उन्होंने बताया कि इस कीट से बचाव के लिए प्रभावित तने के चारों तरफ 400 गेज मोटी पॉलीथिन लपेट दें। यह बचाव का उत्तम तरीका है। इसके साथ ही कीट प्रभावित तने पर कीटनाशक चूर्ण का छिड़काव करके महीन सूती कपड़ा भी लपेट सकते हैं। इसके अलावा क्लोरपारीफॉस इस्ट नामक कीटनाशी दवा की 200 से 250 ग्राम मात्रा का छिड़काव कर सकते हैं। इससे मिलीबग कीट ऊपर तक नहीं चढ़ पाएगा। उसे नियंत्रण करने का यही कारगर उपाय है।
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सहायक जिला उद्यान अधिकारी धर्मेंद्र कुमार नेे बताया कि फरवरी माह के दूसरे सप्ताह से ही आम के पेड़ों पर बौर आना शुरू हो जाते हैं। मिलीबग कीट आम के पेड़ की शाखाओं पर पहुंचकर इसके चारों ओर भारी संख्या में एकत्रित हो जाते हैं और यहां से वह फूलों (बौर) व पौधों का रस चूसते हैं।
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इससे शाखाएं व बौर सूखकर गिर जाते हैं। मिलीबग कीट इस दौरान एक मीठा द्रव्य भी छोड़ता है, जिसे हनीडियू कहते हैं। यह कीट पेड़ व तने को खराब करने के साथ फंगस की अन्य बीमारियां भी फैलाता है।
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उन्होंने बताया कि इस कीट से बचाव के लिए प्रभावित तने के चारों तरफ 400 गेज मोटी पॉलीथिन लपेट दें। यह बचाव का उत्तम तरीका है। इसके साथ ही कीट प्रभावित तने पर कीटनाशक चूर्ण का छिड़काव करके महीन सूती कपड़ा भी लपेट सकते हैं। इसके अलावा क्लोरपारीफॉस इस्ट नामक कीटनाशी दवा की 200 से 250 ग्राम मात्रा का छिड़काव कर सकते हैं। इससे मिलीबग कीट ऊपर तक नहीं चढ़ पाएगा। उसे नियंत्रण करने का यही कारगर उपाय है।