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औरैयाः सावन में भक्तों पर विशेष कृपा करते हैं महादेव
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राजा भीष्मक द्वारा स्थापित किया गया शिवलिंग
- फोटो : AURAIYA
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बिधूना (औरैया)। इटावा की सीमा पर स्थित कुदरकोट गांव में भगवान भयानक नाथ के मंदिर में स्थापित शिवलिंग की पौराणिक महत्ता है। मान्यता है कि भोले भंडारी यहां आने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं। हर वर्ष सावन में जिले के बाहर के लोग भी श्रद्धा के साथ आराधना करने आते रहे हैं। सावन भर यहां भक्तों की भारी भीड़ जुटती थी। इस बार लॉकडाउन के चलते मंदिर परिसर में सन्नाटा है।
जानकार बताते हैं कि कुदरकोट गांव कभी कुंदनपुर के नाम से जाता था और द्वापर कालीन राजा भीष्मक की राजधानी हुआ करती थी। यहीं से भगवान कृष्ण ने राजकुमारी रुक्मणी का हरण किया था। रुक्मणी के पिता महाराज भीष्मक द्वारा आज से लगभग पांच हजार वर्ष पूर्व एक शिवलिंग की स्थापना कराई गई थी, जो कालांतर में भगवान भयानकनाथ मंदिर के नाम से जाना जाता हैं।
मंदिर के पुजारी राम कुमार चौरसिया ने बताया कि यह मंदिर जर्जर हो गया था। लगभग पांच दशक पहले उनके पिता सुभाष चंद्र चौरसिया ने लोगों की मदद से इसका पुर्नरोद्धार कराया था। सावन के महीने में शिवलिंग की पूजा अर्चना के लिए गैर जनपदों तक से हजारों लोग आते है, पर इस वर्ष कोरोना के चलते श्रद्धालु नहीं आ रहे है।
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जानकार बताते हैं कि कुदरकोट गांव कभी कुंदनपुर के नाम से जाता था और द्वापर कालीन राजा भीष्मक की राजधानी हुआ करती थी। यहीं से भगवान कृष्ण ने राजकुमारी रुक्मणी का हरण किया था। रुक्मणी के पिता महाराज भीष्मक द्वारा आज से लगभग पांच हजार वर्ष पूर्व एक शिवलिंग की स्थापना कराई गई थी, जो कालांतर में भगवान भयानकनाथ मंदिर के नाम से जाना जाता हैं।
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मंदिर के पुजारी राम कुमार चौरसिया ने बताया कि यह मंदिर जर्जर हो गया था। लगभग पांच दशक पहले उनके पिता सुभाष चंद्र चौरसिया ने लोगों की मदद से इसका पुर्नरोद्धार कराया था। सावन के महीने में शिवलिंग की पूजा अर्चना के लिए गैर जनपदों तक से हजारों लोग आते है, पर इस वर्ष कोरोना के चलते श्रद्धालु नहीं आ रहे है।
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