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चार माह बाद भी लेखपालों ने पूरी नहीं दी विनयमित क्षेत्र की रिपोर्ट
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औरैया। सदर तहसील क्षेत्र में लेखपालों की मनमानी के कारण तहसील प्रशासन ने विनियमित क्षेत्र में कालोनी काटने वालों की अधूरी रिपोर्ट ही जारी कर दी। जेई का कहना है कि चार माह से लगातार रिपोर्ट मांगी जा रही है। एसडीएम ने भी लेखपालों से रिपोर्ट देने को कहा। बावजूद इसके लेखपालों से सहयोग नहीं मिल पा रहा है।
शहर में विनियमित क्षेत्र में ले आउट स्वीकृत कराए बिना ही काटी जा रही कालोनियों को लेकर अधिकारी ने सख्त रुख अख्तियार किया है। तहसील प्रशासन की ओर से 20 मई को विनियमित क्षेत्र में बिना ले आउट स्वीकृत कराए कालोनी काटने वालों की अधूरी जानकारी के बाद सूची जारी कर दी गई। जिसमें मौजा समरथपुर, आनेपुर, कखावतू में कालोनी काटने वालों के ही नाम जारी किए गए। इस बीच विनियमित क्षेत्र जेई ने लेखपालों से चार माह पहले आनेपुर, बदनपुर, सुरान, जरूहोलिया, कसबा खानपुर में काटी जा रहीं कालोनियों के संबंध में कालोनी काटने वालों का ब्योरा मांगा था, जो नहीं दिया गया।
सदर तहसील प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जेई विनिमित क्षेत्र भानू प्रताप सिंह का कहना है कि उनकी ओर से चार माह पूर्व लेखपालों से कालोनी काटने वालों का ब्योरा मांगा गया था। मजबूरी मेें जितना ब्योरा मिल पाया, उतना जारी कर दिया गया। उन्होंने एसडीएम को भी इसकी जानकारी दी थी। जिस पर एसडीएम सदर ने भी लेखपालों से निरीक्षण कर पूरे क्षेत्र का ब्योरा देने के निर्देश दिए थे। इसके बाद भी लेखपालों का सहयोग नहीं मिल रहा है।
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शहर में विनियमित क्षेत्र में ले आउट स्वीकृत कराए बिना ही काटी जा रही कालोनियों को लेकर अधिकारी ने सख्त रुख अख्तियार किया है। तहसील प्रशासन की ओर से 20 मई को विनियमित क्षेत्र में बिना ले आउट स्वीकृत कराए कालोनी काटने वालों की अधूरी जानकारी के बाद सूची जारी कर दी गई। जिसमें मौजा समरथपुर, आनेपुर, कखावतू में कालोनी काटने वालों के ही नाम जारी किए गए। इस बीच विनियमित क्षेत्र जेई ने लेखपालों से चार माह पहले आनेपुर, बदनपुर, सुरान, जरूहोलिया, कसबा खानपुर में काटी जा रहीं कालोनियों के संबंध में कालोनी काटने वालों का ब्योरा मांगा था, जो नहीं दिया गया।
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सदर तहसील प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जेई विनिमित क्षेत्र भानू प्रताप सिंह का कहना है कि उनकी ओर से चार माह पूर्व लेखपालों से कालोनी काटने वालों का ब्योरा मांगा गया था। मजबूरी मेें जितना ब्योरा मिल पाया, उतना जारी कर दिया गया। उन्होंने एसडीएम को भी इसकी जानकारी दी थी। जिस पर एसडीएम सदर ने भी लेखपालों से निरीक्षण कर पूरे क्षेत्र का ब्योरा देने के निर्देश दिए थे। इसके बाद भी लेखपालों का सहयोग नहीं मिल रहा है।
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