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अस्तित्व में नहीं आदर्श व मॉडल तालाब, अब अमृत सरोवर बनेंगे

Fri, 03 Jun 2022 12:27 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jun 2022 12:27 AM IST
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Ideal and model ponds not in existence, now Amrit Sarovar will be made
मसूदपुर गांव में तालाब की खुदाई करते मजदूर। संवाद - फोटो : AURAIYA
औरैया। जल संरक्षण और पर्यावरण को बढ़ावा देने के लिए पूर्व की सरकारों ने गांव के वर्षों पुराने तालाबों का जीर्णोद्धार कराया। लाखों करोड़ों रुपये खर्च कर इन्हेें मॉडल और आदर्श तालाब का रूप दिया गया। मगर यह तालाब देखरेख और सरकारी उपेक्षा के चलते अस्तित्व खो बैठे। अब प्रदेश सरकार इन्हीं तालाबों के साथ तमाम नए तालाबों को अमृत सरोवर के रूप में विकसित कर रही है। सरकार की यह योजना कितनी कारगर होगी यह तो वक्त बताएगा, पर लोग पूर्व में हुए तालाबों के सुंदरीकरण को लेकर सवाल उठाते नजर आ रहे हैं।
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गांव के पुराने तालाबों में कहीं धूल उड़ रही तो कहीं गंदगी का अंबार है। जबकि तालाबों की दुर्दशा सुधारने और ग्रामीणों को लाभ पहुंचाने के लिए मनरेगा के तहत लाखों रुपये खर्च किए गए। बंदरबांट के इस खेल में तालाबों की दुर्दशा तो नहीं सुधरी लेकिन कुछ ने अपनी स्थिति जरूर सुधार ली।
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पानी की तरह रुपये बहाए जाने के बाद भी कई तालाबों में न तो पानी और न ही आदर्श और मॉडल तालाब जैसी सुविधाएं है। सरकार बदलते ही निजाम बदल गए और अफसरों के पूर्व के क्रियाकलापों पर पर्दा डाल दिया गया। अब इन्हीं तालाबों के साथ एक एकड़ तक वाले कई नए तालाबों में आजादी के अमृत महोत्सव पर 75 तालाबों को अमृत सरोवर के रूप में विकसित किया जा रहा है।
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इस कार्य में कई लापरवाही बरती जा रही है, जिससे अफसर अनजान बने हुए हैं। सीडीओ अनिल कुमार सिंह ने कहा कि जिले में 75 अमृत सरोवर बनाए जाने हैं, इनके लिए एक एकड़ के करीब व उससे अधिक की जमीन वाले तालाब चिह्नित किए गए हैं। कुछ पुराने तालाब भी शामिल है। तालाबों में नियमों के तहत कार्य कराने के निर्देश हैं। यदि कहीं पर लापरवाही मिलेगी तो कार्रवाई की जाएगी।
जेसीबी से हो रही खुदाई
ऐरवाकटरा। कामगारों को रोजगार की गारंटी देने वाली मनरेगा योजना ऐरवाकटरा विकास खंड में दम तोड़ती नजर आ रही है। उमरैन ग्राम पंचायत में मनरेगा के तहत अमृत सरोवर तालाब की खुदाई कराई जा रही है। इसमें मास्टर रोल पर तो 83 मजदूरों का विवरण अंकित किया गया, पर मौके पर मनरेगा श्रमिकों को रोजगार न देकर जेसीबी से खुदाई कराई जा रही है। मास्टर रोल में 21 मई से तीन जून तक का मास्टर रोल जारी किया गया है। ग्राम पंचायत सचिव विनय कुमार ने बताया कि मनरेगा के तहत कार्य कराया जा रहा है। करीब 31 लाख रुपये बजट से अमृत सरोवर बनना है। बीडीओ मुनीश कुमार ने बताया कि मनरेगा से सिर्फ मजदूर काम कर सकते है। राज्य वित्त में जेसीबी व ट्रैक्टर उपयोग किए जा सकते है। इसके बारे में जानकारी की जाएगी।
नाम बदलते गए सूरत वही रही
बिधूना। सरकारें बदलीं तो योजना का स्वरूप और नाम भी बदल गया, लेकिन तालाब अपनी सूरत नहीं बदल पाए। बिधूना ब्लाक के ग्राम पंचायत गूरा में जिस तालाब को अमृत सरोवर के रूप में विकसित किया जा रहा है। उसे वर्ष 2005 में लाखों रुपये खर्च कर आदर्श तालाब का रूप दिया गया था। वहीं मसूदपुर पंचायत में यही हाल है। यहां पर भी वर्ष 2005 में आदर्श तालाब के रूप में मनरेगा व अन्य योजना से लाखों रुपये खर्च कर तालाब विकसित किया गया। अब इसी तालाब की अमृत सरोवर के लिए खुदाई की जा रही है।

10 साल में दो बार हुई खुदाई
अजीतमल। ब्लाक के ग्राम पंचायत साफर में बने तालाब को इस बार अमृत सरोवर के रूप में विकसित किया जा रहा है। इससे पहले वर्ष 2000 से 2005 के बीच तत्कालीन प्रधान बिट्टी देवी के कार्यकाल में तालाब की खुदाई की गई। वर्ष 2005 से 2010 के बीच प्रधान रहे अतींद्र सिंह सेंगर के इसी तालाब का सुंदरीकरण कराया, लेकिन सूरत जस की तस रही और अब अमृत सरोवर बनाया जाना है।

उमरैन में तालाब की जेसीबी से होती खुदाई। संवाद

उमरैन में तालाब की जेसीबी से होती खुदाई। संवाद- फोटो : AURAIYA

गूरा गांव में अमृत सरोवर की खुदाई करते मजदूर। संवाद

गूरा गांव में अमृत सरोवर की खुदाई करते मजदूर। संवाद- फोटो : AURAIYA

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