{"_id":"93ae42c98389b1995ac6b28c16146e8b","slug":"heavy-rain-fell-on-provider-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बारिश भारी पड़ी अन्नदाता पर ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बारिश भारी पड़ी अन्नदाता पर
ब्यूरो/अमर उजाला, औरैया
Updated Thu, 14 May 2015 12:17 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तर भारत में मंगलवार को आए भूकंप के बाद बारिश से पहले से अपनी बदकिस्मती पर रो रहे अन्नदाता और बर्बाद हो गए हैं। बुधवार को हुई बारिश ने किसानों के खेतों में कटे गेहूं के गट्ठरों के साथ भूसे भिगोकर उनकी रही सही उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। बारिश के बाद अमर उजाला ने पड़ताल की तो स्थिति काफी नाजुक दिखाई दी
विज्ञापन
।
मार्च- अप्रैल की बारिश से जिले के 841 गांवों के 55816 किसानों की चना, सरसों, अरहर व गेहूं की फसलों को नष्ट कर दिया था। इससे किसानों की 60 से 75 फीसदी तक गेहूं फसल प्रभावित हुई थी। इन दिनों किसानों की बची-खुची गेहूं फसल को थ्रेसिंग के लिए खेतों पर पड़ी हुई है। वहीं इंतजाम न होने से किसानों का भूसा भी खेतों पर पड़ा है।
विज्ञापन
मंगलवार को भूकंप आने के बाद अचानक बदले मौसम के चलते बुधवार को बारिश हुई। आज हुई तकरीबन 25 मिनट की बारिश ने किसानों की रही सही उम्मीदों पर तो पानी फेरा ही। वहीं जानवरों के लिए भूसे की किल्लत पैदा कर दी है।
विज्ञापन
बारिश से ज्यादातर किसानों का खेतों पर पड़ा भूसा और खेतों पर थ्रेसिंग के लिए पड़े गेहूं के गट्ठर भीग गए हैं। गेहूं के भीगे गट्ठरों के देख किसान सदमे जैसी हालत में नजर आ रहे हैं।
इधर बारिश के बाद फसलों का अमर उजाला ने ग्राम बहादुरपुर व शहबदिया का जायजा लिया तो खेतों पर भीगे गेहूं गट्ठर और भूसा का ढेर खेताें पर पड़े दिखाई दिए।
इधर उप कृषि निदेशक डा. बनारसी दास यादव ने बताया कि 90 फीसदी किसानों ने अपने गेहूं फसल को सुरक्षित कर लिया है। आज की बारिश से खेतों पर पड़ी गेहूं फसल व भूसे का मामूली नुकसान जरूर हुआ है।
उर्द फसल को फायदा- औरैया। बुधवार को हुई बारिश से जहां गेहूं किसानों को मामूली नुकसान हुआ है। वहीं आज हुई बारिश से उर्द किसान गद्गद हैं। आज की बारिश ने एक सिंचाई कर चुके किसानों की दूसरी सिंचाई की चिंता को समाप्त किया है।