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सात से 13 अक्टूबर तक मनेगा मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता सप्ताह
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औरैया। मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता सप्ताह की शुरुआत सात अक्टूबर से होगी। यह अभियान 13 अक्टूबर तक चलेगा। सप्ताह भर गोष्ठी व बैठक आयोजित की जाएंगीं। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस वर्ष 2019 की थीम आत्महत्या रोकने के लिए मिलकर काम करने पर केंद्रित है।
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस विश्व में मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और मानसिक स्वास्थ्य के सहयोगात्मक प्रयासों को संगठित करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष दस अक्टूबर को मनाया जाता है। विश्व मानसिक स्वास्थ्य संघ(वर्ल्ड फेडरेशन फॉर मेंटल हेल्थ) ने विश्व के लोगों के मानसिक स्वास्थ्य देखभाल को यथार्थवादी बनाने के लिए वर्ष 1992 में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस की शुरूआत हुई।
सीएमओ डॉ. एके राय का कहना है कि मानसिक बीमारी प्रतिदिन के तनाव से उपजती है। मानसिक तनाव हर किसी के जीवन में स्थाई रूप से अपने पैर पसार चुका है। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. शिशिर पुरी ने बताया कि किशोरावस्था और वयस्कता के शुरुआती वर्ष जीवन का वह समय होता है, जब कई बदलाव होते हैं, उदाहरण के लिए स्कूल बदलना, घर छोडना तथा कॉलेज, विश्व्विद्यालय या नई नौकरी शुरू करना। यह तनाव मानसिक रोग उत्पन्न कर सकता है। ऐसे रोगी को मानसिक चिकित्सालय में ले जाकर मानसिक रोग विशेषज्ञ से यथाशीघ्र इलाज कराएं।
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उन्होने बताया कि दस अक्तूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर 100 शैय्या जिला संयुक्त चिकित्सालय में मानसिक रोगियों के लिये मानसिक स्वस्थ शिविर लगा कर मानसिक रोगों और तनाव से बचने के उपाय बताये जायेंगे और इसका इलाज किया जाएगा। स्कूलों में मेंटल हेल्थ कैंप के जरिये मनोचिकित्सकों द्वारा स्कूली बच्चों को बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के गुण बताए जाएंगे।
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विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस विश्व में मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और मानसिक स्वास्थ्य के सहयोगात्मक प्रयासों को संगठित करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष दस अक्टूबर को मनाया जाता है। विश्व मानसिक स्वास्थ्य संघ(वर्ल्ड फेडरेशन फॉर मेंटल हेल्थ) ने विश्व के लोगों के मानसिक स्वास्थ्य देखभाल को यथार्थवादी बनाने के लिए वर्ष 1992 में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस की शुरूआत हुई।
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सीएमओ डॉ. एके राय का कहना है कि मानसिक बीमारी प्रतिदिन के तनाव से उपजती है। मानसिक तनाव हर किसी के जीवन में स्थाई रूप से अपने पैर पसार चुका है। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. शिशिर पुरी ने बताया कि किशोरावस्था और वयस्कता के शुरुआती वर्ष जीवन का वह समय होता है, जब कई बदलाव होते हैं, उदाहरण के लिए स्कूल बदलना, घर छोडना तथा कॉलेज, विश्व्विद्यालय या नई नौकरी शुरू करना। यह तनाव मानसिक रोग उत्पन्न कर सकता है। ऐसे रोगी को मानसिक चिकित्सालय में ले जाकर मानसिक रोग विशेषज्ञ से यथाशीघ्र इलाज कराएं।
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उन्होने बताया कि दस अक्तूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर 100 शैय्या जिला संयुक्त चिकित्सालय में मानसिक रोगियों के लिये मानसिक स्वस्थ शिविर लगा कर मानसिक रोगों और तनाव से बचने के उपाय बताये जायेंगे और इसका इलाज किया जाएगा। स्कूलों में मेंटल हेल्थ कैंप के जरिये मनोचिकित्सकों द्वारा स्कूली बच्चों को बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के गुण बताए जाएंगे।