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Auraiya News: बचपन से तोड़फोड़ की आदत ने बनाया ताइक्वांडो खिलाड़ी

Tue, 17 Jan 2023 07:00 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 17 Jan 2023 07:00 AM IST
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Habit of vandalism since childhood made Taekwondo player
औरैया। शहर निवासी अंशिका की बचपन से ही तोड़फोड़ करते रहने की आदत थी। वर्ष 2017 में स्कूल में ताइक्वांडो के कोच गोविंद कुमार ने उसकी शरारत को देखते हुए उसे अभ्यास करवाना शुरू किया। इसमें उसे भी बहुत आनंद आता था।
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एक साल की मेहनत के बाद उसने लखनऊ में आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता। इसके बाद एक साल तक कई प्रतियोगिताओं में उसे नाकामयाबी का मुंह देखना पड़ा। इसके चलते वह बहुत मायूस हो गई। पिता अरविंद भारती व मां संजना भारती ने उसे प्रेरित किया। इस पर उसने दोबारा तैयारी शुरू की।
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वर्ष 2019 में बिधूना में आयोजित जिला स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता। इस समय वह पोरवाल रेजीडेंसियल स्कूल में कक्षा छह की छात्रा हैं। स्कूल में ताइक्वांडो फेडरेशन की ओर से कोच शैलेंद्र कुमार से प्रशिक्षण ले रही हैं। 26 दिसंबर 2022 को आगरा में आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में सब जूनियर वर्ग में रजत पदक अपने नाम किया।
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अंशिका का कहना है कि उनका सपना देश के लिए खेलने का है। इसके लिए वह अभी से तैयारी कर रही हैं। बताती हैं कि खिलाड़ियों को सरकार संसाधन मुहैया करा आगे बढ़ाने का काम करे तो छिपी प्रतिभाएं निखर कर सामने आएंगी।
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औरैया। बिधूना कस्बा निवासी आंचल पोरवाल के पिता की सशक्त सोच ने उन्हें ताइक्वांडों खिलाड़ी बना दिया। पिता की भावनाओं को समझते हुए उन्होंने भी ताइक्वांडो खिलाड़ी के रूप में उनका सपना साकार कर दिया।
वर्ष 2016 में शहर के गजेंद्र सिंह डिग्री कॉलेज में जिला ताइक्वांडो फेडरेशन की ओर से कक्षाएं संचालित होने लगीं। उनके पिता ने उनका दाखिला भी करवा दिया। अभ्यास से कतराने के कारण शुरुआत में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा। कोच शैलेंद्र कुमार के समझाने और लगातार खेलते रहने से उसकी रुचि बढ़ गई।
कई जिला स्तरीय प्रतियोगिताएं जीतने के बाद दिसंबर 2018 में लखनऊ में आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लिया। यहां उनको सफलता हाथ नहीं लगी। इसपर वह हताश हो गई और खेल छोड़ने का मन बना लिया। पिता ने फिर से उन्हें समझाया और उत्साह जगाया। इसके बाद वह राजस्थान के वनस्थली में पढ़ने चली गईं। स्कूल में ताइक्वांडो का कोच न होने पर उसने कुछ समय कराटे की तैयारी की।
लॉकडाउन के दौरान वह वापस बिधूना आईं और दोबारा अपने खेल की तैयारी शुरू कर दी। वर्ष 2021 में वनस्थली में आयोजित प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद उसका चयन लखनऊ में आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए हो गया।

दिसंबर 2022 में आयोजित प्रतियोगिता में उसने रजत पदक जीता। आंचल बताती हैं कि वह अपने रजत पदक से संतुष्ट नहीं हैं। उन्हें स्वर्ण पदक के साथ आगे बढ़कर देश के लिए खेलना है और पिता की सोच को सफल बनाना है। वह अब स्वर्ण पदक के लिए पुरजोर मेहनत कर रही हैं। उनके खेल में भी परिवर्तन आया है।
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