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Auraiya News: किसानों की जमीन छीनकर मजदूर बनाने की रणनीति पर काम कर रही सरकार - टिकैत
Tue, 19 Dec 2023 11:47 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Tue, 19 Dec 2023 11:47 PM IST
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औरैया। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश टिकैत ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों की जमीन छीनकर उन्हें मजदूर बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। जिसको लेकर बड़ा आंदोलन शुरू होगा। अभी सरकार धार्मिक उन्माद फैलाकर जनता को गुमराह करने में लगी है।
तहसील क्षेत्र के गांव ताजपुर के स्कूल में राष्ट्रीय अध्यक्ष भाकियू की कार्यशाला में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार की गलत नीतियों का ही परिणाम है कि 18 वर्षो से बिहार में मंडी समितियां बंद पड़ी हैं। व्यापारी गांव-गांव जाकर किसानों का अनाज कौड़ियों के दाम खरीद रहे हैं। नतीजा सबके सामने हैं कि बिहार में दो वर्ग बचे हैं। एक पढ़ लिखकर नौकरी कर रहे हैं तो दूसरा वर्ग मजदूरी करके अपनी गुजर बजर करने को विवश हो रहे हैं। सरकार यही फार्मूला पूरे देश में लाना चाहती है। सरकार की रणनीति किसानों की जमीन छीनकर मजदूर बनाने की है। सरकार की नजर किसानों की उपज पर नहीं है बल्कि उनकी जमीनों पर है। किसानों को समय से खाद, बिजली, पानी भी मुहैया नहीं कराई जा रही है। जिससे किसान परेशान हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की कथनी और करनी में फर्क है। वह किसानों के हितों के लिए बात कुछ करती है, लेकिन उसे किसानों के हितों से कोई लेना देना नहीं है। सरकार की नीतियों के खिलाफ जल्द बड़ा आंदोलन शुरू होगा।
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तहसील क्षेत्र के गांव ताजपुर के स्कूल में राष्ट्रीय अध्यक्ष भाकियू की कार्यशाला में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार की गलत नीतियों का ही परिणाम है कि 18 वर्षो से बिहार में मंडी समितियां बंद पड़ी हैं। व्यापारी गांव-गांव जाकर किसानों का अनाज कौड़ियों के दाम खरीद रहे हैं। नतीजा सबके सामने हैं कि बिहार में दो वर्ग बचे हैं। एक पढ़ लिखकर नौकरी कर रहे हैं तो दूसरा वर्ग मजदूरी करके अपनी गुजर बजर करने को विवश हो रहे हैं। सरकार यही फार्मूला पूरे देश में लाना चाहती है। सरकार की रणनीति किसानों की जमीन छीनकर मजदूर बनाने की है। सरकार की नजर किसानों की उपज पर नहीं है बल्कि उनकी जमीनों पर है। किसानों को समय से खाद, बिजली, पानी भी मुहैया नहीं कराई जा रही है। जिससे किसान परेशान हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की कथनी और करनी में फर्क है। वह किसानों के हितों के लिए बात कुछ करती है, लेकिन उसे किसानों के हितों से कोई लेना देना नहीं है। सरकार की नीतियों के खिलाफ जल्द बड़ा आंदोलन शुरू होगा।
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