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भक्तों के कल्याण के लिए भगवान लेते अवतार
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कथा सुनाते आचार्य अरूण अवस्थी। संवाद
- फोटो : AURAIYA
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औरैया। शहर के मोहल्ला होमंगज में उमेश वाटिका में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन आचार्य अरुण अवस्थी ने श्रद्धालुओं को वामन अवतार की कथा की कथा सुनाते हुए कहा कि भक्तों के कल्याण के लिए भगवान अवतार लेते है।
आचार्य ने कहा कि जब देवताओं पर अपार संकट आ गया और दैत्यों ने अपना अधिकार जमा लिया। उस समय दैत्यों के राजा बलि ने एक यज्ञ किया। प्रतिज्ञा ली कि उनके द्वार पर आने वाला याचक जो मांगेगा वह उसे बिना किसी संकोच दे देंगे। इस पर भगवान विष्णु वामन अवतार के रूप में याचक बनकर राजा बलि के पास पहुंचे। जहां उन्होंने राजा बलि से तीन पग के बराबर भूमि दान में मांगी।
जिस पर राजा बलि ने बिना सोचे ही याचक बनकर आए वामन को तीन पग जमीन दे दी। जिसमें दो पग में भगवान ने धरती, आकाश, पाताल सब कुछ नाप लिया। जब तीसरे पग की जमीन न मिली तो बलि ने अपना सिर झुकाकर भगवान के चरणों में समर्पित कर तीसरा पग सिर पर रख कर अपनी प्रतिज्ञा पूरी की। जिस पर भगवान ने बलि को दानवीर बलि की उपाधि से विभूषित किया।
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फिर उन्होंने समुद्र मंथन की कथा सुनाते हुए बताया कि सबसे पहले मंथन से विष निकला था। इसी तरह जीवन का क्रम है। जीवन के मंथन में भी सबसे पहले विष ही मिलता है। जिसने विष का पान कर लिया उसे अमृत की प्राप्ति भी होती है। इसके बाद भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव भी मनाया गया।
कृष्ण जन्म होते ही कथा मंडप में बधाई बजने लगी। इस दौरान पवन दुबे, शिवम दुबे, विमल दुबे ने लोगों से संगीतमयी कथा का रसपान करने की अपील की है। कार्यक्रम में पूर्व पालिकाध्यक्ष धर्मेश दुबे एडवोकेट, श्रीधर दुबे, अनिल दुबे, दिनेश दुबे आदि लोगों के अलावा भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ जमा रही।
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आचार्य ने कहा कि जब देवताओं पर अपार संकट आ गया और दैत्यों ने अपना अधिकार जमा लिया। उस समय दैत्यों के राजा बलि ने एक यज्ञ किया। प्रतिज्ञा ली कि उनके द्वार पर आने वाला याचक जो मांगेगा वह उसे बिना किसी संकोच दे देंगे। इस पर भगवान विष्णु वामन अवतार के रूप में याचक बनकर राजा बलि के पास पहुंचे। जहां उन्होंने राजा बलि से तीन पग के बराबर भूमि दान में मांगी।
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जिस पर राजा बलि ने बिना सोचे ही याचक बनकर आए वामन को तीन पग जमीन दे दी। जिसमें दो पग में भगवान ने धरती, आकाश, पाताल सब कुछ नाप लिया। जब तीसरे पग की जमीन न मिली तो बलि ने अपना सिर झुकाकर भगवान के चरणों में समर्पित कर तीसरा पग सिर पर रख कर अपनी प्रतिज्ञा पूरी की। जिस पर भगवान ने बलि को दानवीर बलि की उपाधि से विभूषित किया।
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फिर उन्होंने समुद्र मंथन की कथा सुनाते हुए बताया कि सबसे पहले मंथन से विष निकला था। इसी तरह जीवन का क्रम है। जीवन के मंथन में भी सबसे पहले विष ही मिलता है। जिसने विष का पान कर लिया उसे अमृत की प्राप्ति भी होती है। इसके बाद भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव भी मनाया गया।
कृष्ण जन्म होते ही कथा मंडप में बधाई बजने लगी। इस दौरान पवन दुबे, शिवम दुबे, विमल दुबे ने लोगों से संगीतमयी कथा का रसपान करने की अपील की है। कार्यक्रम में पूर्व पालिकाध्यक्ष धर्मेश दुबे एडवोकेट, श्रीधर दुबे, अनिल दुबे, दिनेश दुबे आदि लोगों के अलावा भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ जमा रही।

कथा मंडप में उपस्थित श्रद्धालुओं की भीड़। संवाद- फोटो : AURAIYA