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घटने लगा युमना का जल स्तर, बढने लगी दुश्वारियां
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बड़ेरा में बाढ़ के पानी के बीच एक परिवार के लोग। संवाद
- फोटो : AURAIYA
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औरैया। यमुना के जलस्तर में शनिवार को गिरावट हुई लेकिन बाढ़ पीड़ितों की दुश्वारियां बढ़ गईं हैं। अजीतमल और सदर तहसील के 24 गांवों में बाढ़ ने तबाही मचा दी है। बेघर हुए लोग खेत और खलिहान में डेरा जमाए हैं। फौरी मदद उनके लिए नाकाफी साबित हो रही है। बाढ़ पीड़ित लोग प्रदेश सरकार से मुआवजे की मांग कर रहे हैं। शनिवार दोपहर तक यमुना का जलस्तर 117.86 मीटर पर रहा। ये चेतावनी बिंदु 114 मीटर से अधिक है।
बाढ़ से यमुना किनारे बसे, सिकरोढ़ी, जुहीखा, असेवा, अस्ता और नौरी समेत 24 गांवों में बुरा हाल है। बाढ़ के पानी में बहे और बर्बाद हुए सामान के बाद बचा खुचा सामान सुरक्षित लेकर लोग शरण तलाश रहे हैं।
मजदूरी और खेती किसानी कर पेट पालने वाले सैकड़ों परिवारों के सामने संकट खड़ा हो गया है। शनिवार दोपहर बाद डीएम ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ सिकरोड़ी गांव पहुंचकर राहत शिविर का निरीक्षण किया और लोगों को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। प्रशासन बाढ़ प्रभावित लोगों को खाने, पीने और ठहरने की मदद का दम भर रहा है।
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किसी ने ट्रैक्टर पर तो किसी ने पेड़ के नीचे गुजारी रात
अयाना। राहत शिविर में पर्याप्त व्यवस्था न होने पर सबसे बुरा हाल बीजलपुर व उसके मजरे के गांव मिश्रपुरा का है। यहां पर प्रधान ने खाने, पीने और लाइट का इंतजाम नहीं किया। जिससे लोग पेड़ के नीचे और ट्रैक्टरों पर रात गुजारने पर मजबूर हैं। (संवाद)
जुहीखा में खुद नाव से बाहर पहुंचे लोग
शनिवार को जुहीखा में प्रशासन की टीम देर से मदद के लिए पहुंची। ग्रामीणों ने खुद ही नाव की तलाश की और अपने जरूरत का सामान लेकर बाढ़ के पानी से होकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचे। मांग के बाद भी नाव आदि की व्यवस्था न होने से लोगों रोष है।
युवा दिखा रहे हिम्मत
बाढ़ प्रभावित गांव असेवा में कई घरों में तेजी से पानी घुस गया। बाढ़ के पानी से घरों का सामान बचाने के लिए गांव के कुछ युवा आगे आए। उन्होंने कई घरों का सामान निकालकर गांव के बाहर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। वहीं स्कूल में रखा बच्चों की पढ़ाई का सामान और जरूरी सामान एक बक्से में भर कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।
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बाढ़ से यमुना किनारे बसे, सिकरोढ़ी, जुहीखा, असेवा, अस्ता और नौरी समेत 24 गांवों में बुरा हाल है। बाढ़ के पानी में बहे और बर्बाद हुए सामान के बाद बचा खुचा सामान सुरक्षित लेकर लोग शरण तलाश रहे हैं।
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मजदूरी और खेती किसानी कर पेट पालने वाले सैकड़ों परिवारों के सामने संकट खड़ा हो गया है। शनिवार दोपहर बाद डीएम ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ सिकरोड़ी गांव पहुंचकर राहत शिविर का निरीक्षण किया और लोगों को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। प्रशासन बाढ़ प्रभावित लोगों को खाने, पीने और ठहरने की मदद का दम भर रहा है।
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किसी ने ट्रैक्टर पर तो किसी ने पेड़ के नीचे गुजारी रात
अयाना। राहत शिविर में पर्याप्त व्यवस्था न होने पर सबसे बुरा हाल बीजलपुर व उसके मजरे के गांव मिश्रपुरा का है। यहां पर प्रधान ने खाने, पीने और लाइट का इंतजाम नहीं किया। जिससे लोग पेड़ के नीचे और ट्रैक्टरों पर रात गुजारने पर मजबूर हैं। (संवाद)
जुहीखा में खुद नाव से बाहर पहुंचे लोग
शनिवार को जुहीखा में प्रशासन की टीम देर से मदद के लिए पहुंची। ग्रामीणों ने खुद ही नाव की तलाश की और अपने जरूरत का सामान लेकर बाढ़ के पानी से होकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचे। मांग के बाद भी नाव आदि की व्यवस्था न होने से लोगों रोष है।
युवा दिखा रहे हिम्मत
बाढ़ प्रभावित गांव असेवा में कई घरों में तेजी से पानी घुस गया। बाढ़ के पानी से घरों का सामान बचाने के लिए गांव के कुछ युवा आगे आए। उन्होंने कई घरों का सामान निकालकर गांव के बाहर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। वहीं स्कूल में रखा बच्चों की पढ़ाई का सामान और जरूरी सामान एक बक्से में भर कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।