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अनुसूचित जाति अत्याचार मद घोटाले में होगी एफआईआर
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औरैया। समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय में घोटाले का खेल एक के बाद उजागर होता जा रहा है। इससे विभाग के साथ पूरे जिला प्रशासन में हड़कंप मचा है। अनुसूचित जाति अत्याचार मद में 25 लाख का घोटाला किए जाने की चल रही जांच में 17 खाते बदल कर 10 लाख रुपये की हेराफेरी किए जाने का मामला सामने आया है। इसकी रिपोर्ट तैयार कर एफआईआर की कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी को भेजी गई है।
वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए शासन से तीन करोड़ रुपये अनुसूचित जाति अत्याचार मद के लिए आवंटित हुआ था। इस बजट में हेराफेरी किए जाने का आरोप लगा दिबियापुर के एक व्यक्ति ने जिलाधिकारी से शिकायत की थी। आरोप था कि पटल सहायक ने कई पीड़ितों के खाते बदल कर करीब 25 लाख रुपये की हेराफेरी की है। मामले को संज्ञान में लेते हुए जिलाधिकारी ने सीडीओ अनिल कुमार, कोषाधिकारी से अभिलेखों की जांच के निर्देश दिए। पिछले एक सप्ताह से अधिकारी विभाग के रिकार्ड खंगाल रहे थे।
इसमें आवेदन करने वाले लाभार्थियों की सूची, आवंटित बजट, कोषागार को भेजे गए नामों की सूची आदि से मिलान कराया गया। जांच रिपोर्ट में पता चला कि विभागीय कर्मचारियों ने साठगांठ करते हुए 17 लाभार्थियों के खाते बदले और 10 लाख रुपये अपने चहेतों के खातों में भेज दिए। जिला समाज कल्याण अधिकारी आशुतोष कुमार ने एक रिपोर्ट तैयार कर जिलाधिकारी को भेजी है।
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जिसमें बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2021-22 में 377 लाभार्थियों को योजना का लाभ तीन किस्तों में दिया जाना था। इसमें पटल सहायक आकाश गौतम, लेखाकार वासिद, कार्यालय सहायक संदीप कुमार, कंप्यूटर आपरेटर मनोज कुमार ने अभिलेखों से छेड़छाड़ कर 17 लोगों के नाम बदल कर लाभ पहुंचा। उक्त घोटाला का खुलासा होने के बाद विभाग में हड़कंप मचा है।
सीडीओ अनिल कुमार सिंह ने बताया कि समाज कल्याण विभाग में वृद्धावस्था पेंशन के घोटाले के बाद अनुसूचित जाति अत्याचार मद में घोटाला सामने आया है। इसकी रिपोर्ट समाज कल्याण अधिकारी ने दे दी है। पूर्व में कई वर्षों का भी रिकार्ड खंगाला जा रहा है। जिसमें भी गड़बड़ी मिलने की आशंका है। 17 लाभार्थियों के खाते बदल कर 10 लाख हड़पने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
रिश्तेदारों के खाते में भेजी गई धनराशि
जांच में खुलासा हुआ है कि अनुसूचित जाति अत्याचार मद के लाभार्थियों के खाते बदल कर धनराशि जिन व्यक्तियों के खाते में भेजी गई है। उनमें से कई लोग पटल सहायक व कार्यालय में काम करने वाले कर्मचारियों के रिश्तेदार व सगे संबंधी है। विभाग कर्मचारियों के साथ ही 17 लाभार्थियों से रिकवरी कराने के साथ उन पर कार्रवाई की तैयारी कर ली है।
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वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए शासन से तीन करोड़ रुपये अनुसूचित जाति अत्याचार मद के लिए आवंटित हुआ था। इस बजट में हेराफेरी किए जाने का आरोप लगा दिबियापुर के एक व्यक्ति ने जिलाधिकारी से शिकायत की थी। आरोप था कि पटल सहायक ने कई पीड़ितों के खाते बदल कर करीब 25 लाख रुपये की हेराफेरी की है। मामले को संज्ञान में लेते हुए जिलाधिकारी ने सीडीओ अनिल कुमार, कोषाधिकारी से अभिलेखों की जांच के निर्देश दिए। पिछले एक सप्ताह से अधिकारी विभाग के रिकार्ड खंगाल रहे थे।
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इसमें आवेदन करने वाले लाभार्थियों की सूची, आवंटित बजट, कोषागार को भेजे गए नामों की सूची आदि से मिलान कराया गया। जांच रिपोर्ट में पता चला कि विभागीय कर्मचारियों ने साठगांठ करते हुए 17 लाभार्थियों के खाते बदले और 10 लाख रुपये अपने चहेतों के खातों में भेज दिए। जिला समाज कल्याण अधिकारी आशुतोष कुमार ने एक रिपोर्ट तैयार कर जिलाधिकारी को भेजी है।
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जिसमें बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2021-22 में 377 लाभार्थियों को योजना का लाभ तीन किस्तों में दिया जाना था। इसमें पटल सहायक आकाश गौतम, लेखाकार वासिद, कार्यालय सहायक संदीप कुमार, कंप्यूटर आपरेटर मनोज कुमार ने अभिलेखों से छेड़छाड़ कर 17 लोगों के नाम बदल कर लाभ पहुंचा। उक्त घोटाला का खुलासा होने के बाद विभाग में हड़कंप मचा है।
सीडीओ अनिल कुमार सिंह ने बताया कि समाज कल्याण विभाग में वृद्धावस्था पेंशन के घोटाले के बाद अनुसूचित जाति अत्याचार मद में घोटाला सामने आया है। इसकी रिपोर्ट समाज कल्याण अधिकारी ने दे दी है। पूर्व में कई वर्षों का भी रिकार्ड खंगाला जा रहा है। जिसमें भी गड़बड़ी मिलने की आशंका है। 17 लाभार्थियों के खाते बदल कर 10 लाख हड़पने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
रिश्तेदारों के खाते में भेजी गई धनराशि
जांच में खुलासा हुआ है कि अनुसूचित जाति अत्याचार मद के लाभार्थियों के खाते बदल कर धनराशि जिन व्यक्तियों के खाते में भेजी गई है। उनमें से कई लोग पटल सहायक व कार्यालय में काम करने वाले कर्मचारियों के रिश्तेदार व सगे संबंधी है। विभाग कर्मचारियों के साथ ही 17 लाभार्थियों से रिकवरी कराने के साथ उन पर कार्रवाई की तैयारी कर ली है।