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हवा व बारिश से धान व बाजरा की फसल को भारी नुकसान
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बेला(औरैया)। बारिश से खेतों में खड़ी धान की सैकड़ों बीघा फसल खराब हो गई। जिससे किसान परेशान हैं। दरअसल अगेती धान की फसल लगभग पूरी तरह से तैयार हो चुकी है। ऐसी फसल की कटाई का कार्य शीघ्र ही प्रारंभ होने वाला था। किसानों का कहना है कि यदि इसी प्रकार से आगे भी मौसम रहा, तो तगड़ी आर्थिक चपत लग सकती है।
बेला, फकीरेपूर्वा, याकूबपुर, मल्हौसी, महू, बांधमऊ, कैथावा, हरदू, नीमहार, सहार, मढ़ोकमीत, नुनारी, बरकसी, सिरयाव समेत जिले के अन्य क्षेत्रों में खेत में खड़ी धान की फसल धराशाई हो गई। यहीं हाल बीहड़ पट्टी क्षेत्र अयाना, अजीतमल का भी रहा। यहां पर भी किसानों की धान व बाजरा की फसलें खेतों में गिर गई। वहीं सब्जी की फसलें जलमग्न हो गई हैं। बिधूना, फफूंद, कंचौसी, सहार, सहायल क्षेत्र में सैकड़ों बीघा फसल खेत पर गिरी नजर आई।
औरैया। दो दिन से तेज हवाओं के साथ हो रही बारिश धान के लिए संजीवनी बनेगी। इस बार रवि की फसल अच्छी होगी तो सरसों व कच्चे आलू की फसल लगाने की तैयारी कर रहे किसानों को और इंतजार करना पड़ेगा। कृषि विज्ञान केंद्र परवाहा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अनंत कुमार ने बताया कि बाजरा यदि जल्दी बो दिया जाता तो अब तक काफी तैयार हो चुका होता और तेज हवाओं से उसकी बाली टूट जाती।
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जिन स्थानों पर बाजरा व धान में बाली आ गई है, उसे कुछ नुकसान है। जबकि देर से बोई गई फसलों को फायदा पहुंचेगा। उन्होंने बताया कि बारिश से नमी बढ़ेगी और धान की फसल पर बहुत अच्छा प्रभाव पड़ेगा और रवि की फसल का उत्पादन बढ़ेगा। वहीं सरसों की फसल लगाने को तैयार किसानों को और रुकना पड़ेगा आलू की कच्ची फसल भी इस समय नहीं लग पाएगी जिसके लिए इंतजार करना पड़ेगा।
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बेला, फकीरेपूर्वा, याकूबपुर, मल्हौसी, महू, बांधमऊ, कैथावा, हरदू, नीमहार, सहार, मढ़ोकमीत, नुनारी, बरकसी, सिरयाव समेत जिले के अन्य क्षेत्रों में खेत में खड़ी धान की फसल धराशाई हो गई। यहीं हाल बीहड़ पट्टी क्षेत्र अयाना, अजीतमल का भी रहा। यहां पर भी किसानों की धान व बाजरा की फसलें खेतों में गिर गई। वहीं सब्जी की फसलें जलमग्न हो गई हैं। बिधूना, फफूंद, कंचौसी, सहार, सहायल क्षेत्र में सैकड़ों बीघा फसल खेत पर गिरी नजर आई।
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औरैया। दो दिन से तेज हवाओं के साथ हो रही बारिश धान के लिए संजीवनी बनेगी। इस बार रवि की फसल अच्छी होगी तो सरसों व कच्चे आलू की फसल लगाने की तैयारी कर रहे किसानों को और इंतजार करना पड़ेगा। कृषि विज्ञान केंद्र परवाहा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अनंत कुमार ने बताया कि बाजरा यदि जल्दी बो दिया जाता तो अब तक काफी तैयार हो चुका होता और तेज हवाओं से उसकी बाली टूट जाती।
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जिन स्थानों पर बाजरा व धान में बाली आ गई है, उसे कुछ नुकसान है। जबकि देर से बोई गई फसलों को फायदा पहुंचेगा। उन्होंने बताया कि बारिश से नमी बढ़ेगी और धान की फसल पर बहुत अच्छा प्रभाव पड़ेगा और रवि की फसल का उत्पादन बढ़ेगा। वहीं सरसों की फसल लगाने को तैयार किसानों को और रुकना पड़ेगा आलू की कच्ची फसल भी इस समय नहीं लग पाएगी जिसके लिए इंतजार करना पड़ेगा।