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गिरे घर और दरकीं दीवारें बारिश में बनेंगी मुसीबत

Sun, 26 Jun 2022 12:24 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 26 Jun 2022 12:24 AM IST
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Fallen houses and cracked walls will become trouble in the rain
क्षतिग्रस्त पड़ा मकान। संवाद - फोटो : AURAIYA
अयाना (औरैया)। यमुना नदी में आई बाढ़ से 24 गांवों के सैकड़ों मकान क्षतिग्रस्त हुए थे। कुछ की छतें गिर गईं तो कुछ की दीवारें दरक गईं। प्रशासन से मुआवजा मिला पर पेट खाली होने से कई ग्रामीण मरम्मत भी नहीं करा सके। अब बारिश से पहले लोगों को आने वाले दिनों में की सोचकर चिंता सताने लगी है। वहीं खेतों पड़ी बालू आज तक न हटने से किसान परेशान हैं। ग्रामीणों को बाढ़ से बचाने के लिए ऊंचे स्थान पर बसाने का प्रशासन का वादा भी खोखला साबित हो रहा है।
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अजीतमल तहसील क्षेत्र में यमुना नदी में आई बाढ़ से बीझलपुर, फरिहा, सिहौली, सड़नापुर, मिश्रपुर, बड़ी गूंज, छोटी गूंज, ततारपुर, जुहीखा, असेवा, असेवटा व औरैया तहसील के अस्ता, मई, नौरी, क्योंटरा, मढ़ापुर समेत 24 गांवों में भयंकर तबाही मचाई थी। जिससे सैकड़ों मकान क्षतिग्रस्त हो गए थे। अह एक बार फिर मानसून आने से पहले लोगों को चिंता सताने लगी है कि वे जर्जर मकान में खुद को कैसे सुरक्षित रखेंगे।
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ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ आने के दौरान कई विधायक-मंत्री दौरा करने आए और ग्रामीणों को बाढ़ से बचाने के लिए गांव के बाहर ऊंचे स्थानों पर बसाने की बात कही थी। लेकिन बाढ़ चली जाने के साथ उनका वादा भी हवा हो गया। वहीं बाढ़ चली जाने के बाद खेतों में छूटी बालू भी किसानों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है।
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बीझलपुर निवासी रजनी देवी ने बताया कि वह कच्चे मकान में रहती थीं। बाढ़ में उनका मकान जमींदोज हो गया था। तबसे अपने दो बच्चों के साथ झोपड़ी में रहकर गुजर-बसर कर रहीं है। बारिश शुरू होने पर वन्य जीवों से बच्चों को सुरक्षित रखने की चिंता सता रही है।
बीझलपुर की लौंगश्री ने बताया कि बाढ़ से उनका मकान गिर गया। घर की बची एक दीवार पर छप्पर रखकर पति के साथ रह रहीं है। तत्कालीन कृषि मंत्री व अन्य नेताओं ने मानसून आने से पहले ऊंचे स्थान पर बसाने के लिए कहा था पर अभी तक न तो कोई पट्टा मिला और न ही आवास।

बाढ़ प्रभावित गांव के लोगों को वन विभाग से मिलेगी जमीन
बाढ़ प्रभावित गांव के लोगों को ऊंचे पर बसाने के लिए वन विभाग की जमीन स्थानांतरण करने का प्रस्ताव शासन भेजा जा चुका है। स्वीकृति मिलते ही गांव के लोगों को ऊंचे पर बसाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके साथ ही इस वर्ष बाढ़ से निपटने के लिए तैयारियां की गई हैं। इसमें भूसे का भंडारण, जरूरत के अनुसार राजस्व, सुरक्षित स्थान, टीकाकरण, बाढ़ चौकियां, दवाइयों आदि का इंतजाम किया जा रहा है। - रेखा एस चौहान, एडीएम प्रशासन

 झोपड़ी में अपने बच्चों के साथ खड़ीं रजनी देवी। संवाद

झोपड़ी में अपने बच्चों के साथ खड़ीं रजनी देवी। संवाद- फोटो : AURAIYA

बाढ़ के दौरान गिरी मकान की छत। संवाद

बाढ़ के दौरान गिरी मकान की छत। संवाद- फोटो : AURAIYA

छप्पर के नीचे खड़ीं लौंगश्री। संवाद

छप्पर के नीचे खड़ीं लौंगश्री। संवाद- फोटो : AURAIYA

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