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Auraiya News: दिव्यांग व्यवस्था... ईंटों के सहारे बेड, व्हीलचेयर की टांग टूटी
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औरैया। जिस मेडिकल कॉलेज में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा किया जाता है, वहां की व्यवस्थाएं खुद सहारे की मोहताज हैं। चिचौली मेडिकल कॉलेज में बेड को ईंटों के सहारे टिकाकर रखा गया है और व्हीलचेयर का पहिया टूटा हुआ है। संवाद न्यूज एजेंसी की ओर से गुरुवार को की गई पड़ताल में मरीजों की मदद के लिए तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी मौके पर नहीं मिले।
मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं की पड़ताल के दौरान पुराने अस्पताल की तीसरी मंजिल पर बने जनरल वार्ड में कई खामियां सामने आईं। वार्ड में गंदगी फैली थी और कई बेड जर्जर हालत में मिले। बेड नंबर 22 के पैर की तरफ का हिस्सा टूटा हुआ था। वहीं, बेड नंबर 21 के नीचे तीन ईंटें लगाकर उसे सहारा दिया गया था। बेड के पहियों के लॉक खराब होने के कारण उसे अपनी जगह पर रोकने के लिए ईंटों का सहारा लेना पड़ रहा था। इतना ही नहीं, एक ईंट पर मरहम-पट्टी के ऊपर बांधने वाली पट्टी भी लिपटी मिली।
वार्ड के अन्य बेड भी बेहतर स्थिति में नहीं थे। पहियों के लॉक खराब होने से बेड मरीज के वजन या हल्के धक्के से खिसक जाते हैं। ऐसे में मरीजों को असुविधा के साथ हादसे का खतरा भी बना रहता है। बेड के नीचे भी गंदगी का अंबार नजर आया।
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टूटी व्हीलचेयर को उठाकर ले गए तीमारदार
पुराने इमरजेंसी वार्ड में एक्सरे और अल्ट्रासाउंड की सुविधा है। पड़ताल के दौरान दर्द से कराहती एक महिला मरीज को तीमारदार एक्सरे कराने के लिए लेकर पहुंचे। मरीज को ले जाने के लिए कोई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मौजूद नहीं था। मजबूर होकर तीमारदारों ने खुद टूटी व्हीलचेयर संभाली। व्हीलचेयर को धक्का देने पर वह आगे नहीं बढ़ी तो तीमारदारों ने उसे उठाकर मरीज को एक्सरे कक्ष तक पहुंचाया। इस दौरान मरीज का संतुलन भी बिगड़ा, हालांकि वह गिरने से बच गई। यह स्थिति अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए किए गए इंतजामों पर सवाल खड़े करती है।
स्टाफ को भी नहीं पता कहां बना डेंगू वार्ड
मेडिकल कॉलेज में डेंगू मरीजों के लिए अलग वार्ड की व्यवस्था को लेकर भी असमंजस नजर आया। दूसरी मंजिल पर मौजूद स्टाफ से डेंगू वार्ड के बारे में पूछा गया तो उन्होंने तीसरी मंजिल पर वार्ड होने की बात कही। जब तीसरी मंजिल पर पहुंचे तो वहां अलग से डेंगू वार्ड नहीं मिला। वहां मौजूद स्टाफ ने बताया कि डेंगू मरीजों के लिए कोई अलग वार्ड नहीं है। वहीं, जनरल वार्ड के बेड नंबर दो पर फूलपुर निवासी आरती देवी डेंगू से पीड़ित मिलीं। उनका इलाज सामान्य वार्ड में ही चल रहा था।
एक बार नहीं ठीक हुआ पैर, अब दोबारा होगा ऑपरेशन
जनरल वार्ड के बेड नंबर 52 पर सेहुद निवासी संतराम भर्ती मिले। उन्होंने बताया कि 21 अगस्त को सड़क हादसे में उनका पैर टूट गया था। मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन किया गया था, लेकिन पैर ठीक नहीं हुआ। दोबारा डॉक्टर को दिखाने पर प्लेट डालकर फिर से ऑपरेशन करने की बात कही गई। संतराम के मुताबिक पहले ऑपरेशन में कितना खर्च आया, उन्हें याद नहीं है।
वर्जनव्हीलचेयर और बेड को ठीक कराया जाएगा। स्टाफ की कमी के कारण डेंगू मरीजों का इलाज जनरल वार्ड में ही किया जा रहा है। -डॉ. मुकेशवीर सिंह, प्राचार्य
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मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं की पड़ताल के दौरान पुराने अस्पताल की तीसरी मंजिल पर बने जनरल वार्ड में कई खामियां सामने आईं। वार्ड में गंदगी फैली थी और कई बेड जर्जर हालत में मिले। बेड नंबर 22 के पैर की तरफ का हिस्सा टूटा हुआ था। वहीं, बेड नंबर 21 के नीचे तीन ईंटें लगाकर उसे सहारा दिया गया था। बेड के पहियों के लॉक खराब होने के कारण उसे अपनी जगह पर रोकने के लिए ईंटों का सहारा लेना पड़ रहा था। इतना ही नहीं, एक ईंट पर मरहम-पट्टी के ऊपर बांधने वाली पट्टी भी लिपटी मिली।
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वार्ड के अन्य बेड भी बेहतर स्थिति में नहीं थे। पहियों के लॉक खराब होने से बेड मरीज के वजन या हल्के धक्के से खिसक जाते हैं। ऐसे में मरीजों को असुविधा के साथ हादसे का खतरा भी बना रहता है। बेड के नीचे भी गंदगी का अंबार नजर आया।
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टूटी व्हीलचेयर को उठाकर ले गए तीमारदार
पुराने इमरजेंसी वार्ड में एक्सरे और अल्ट्रासाउंड की सुविधा है। पड़ताल के दौरान दर्द से कराहती एक महिला मरीज को तीमारदार एक्सरे कराने के लिए लेकर पहुंचे। मरीज को ले जाने के लिए कोई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मौजूद नहीं था। मजबूर होकर तीमारदारों ने खुद टूटी व्हीलचेयर संभाली। व्हीलचेयर को धक्का देने पर वह आगे नहीं बढ़ी तो तीमारदारों ने उसे उठाकर मरीज को एक्सरे कक्ष तक पहुंचाया। इस दौरान मरीज का संतुलन भी बिगड़ा, हालांकि वह गिरने से बच गई। यह स्थिति अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए किए गए इंतजामों पर सवाल खड़े करती है।
स्टाफ को भी नहीं पता कहां बना डेंगू वार्ड
मेडिकल कॉलेज में डेंगू मरीजों के लिए अलग वार्ड की व्यवस्था को लेकर भी असमंजस नजर आया। दूसरी मंजिल पर मौजूद स्टाफ से डेंगू वार्ड के बारे में पूछा गया तो उन्होंने तीसरी मंजिल पर वार्ड होने की बात कही। जब तीसरी मंजिल पर पहुंचे तो वहां अलग से डेंगू वार्ड नहीं मिला। वहां मौजूद स्टाफ ने बताया कि डेंगू मरीजों के लिए कोई अलग वार्ड नहीं है। वहीं, जनरल वार्ड के बेड नंबर दो पर फूलपुर निवासी आरती देवी डेंगू से पीड़ित मिलीं। उनका इलाज सामान्य वार्ड में ही चल रहा था।
एक बार नहीं ठीक हुआ पैर, अब दोबारा होगा ऑपरेशन
जनरल वार्ड के बेड नंबर 52 पर सेहुद निवासी संतराम भर्ती मिले। उन्होंने बताया कि 21 अगस्त को सड़क हादसे में उनका पैर टूट गया था। मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन किया गया था, लेकिन पैर ठीक नहीं हुआ। दोबारा डॉक्टर को दिखाने पर प्लेट डालकर फिर से ऑपरेशन करने की बात कही गई। संतराम के मुताबिक पहले ऑपरेशन में कितना खर्च आया, उन्हें याद नहीं है।
वर्जनव्हीलचेयर और बेड को ठीक कराया जाएगा। स्टाफ की कमी के कारण डेंगू मरीजों का इलाज जनरल वार्ड में ही किया जा रहा है। -डॉ. मुकेशवीर सिंह, प्राचार्य