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पेड़ से दबकर अधेड़ की मौत
ब्यूरो/ अमर उजाला, औरैया
Updated Mon, 16 Mar 2015 12:09 AM IST
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कोतवाली क्षेत्र के ग्राम पढ़ीन में अधेड़ के ऊपर
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पेड़ गिर जाने से गंभीर रूप से घायल हो गया। आसपास के लोगों ने आनन-फानन
में उसको जिला अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
ग्राम पढ़ीन निवासी डालचंद्र उर्फ राजू पुत्र गयाप्रसाद रविवार की दोपहर गांव में खड़ा था। पढ़ीन मंदिर के महंत रूपदास पुत्र परशुराम ने डालचंद्र से कहा कि 21 मार्च से भागवत शुरू हो रही है। इसके लिए पेड़ काटने चलना है। इस पर डालचंद्र पेड़ काटने चला गया। डालचंद्र आरी से पेड़ काट रहा था।
तभी अचानक पूरा पेड़ डालचंद्र के ऊपर आ गिरा। डालचंद्र को पेड़ के नीचे दबा देख आसपास के लोगों ने आनन-फानन में पेड़ को हटवाया और डालचंद्र को जिला अस्पताल लाए।
यहां पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों को डालचंद्र की मौत की जानकारी हुई तो जिला अस्पताल पहुंचे। डालचंद्र का शव देखकर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए इटावा भेज दिया।
पिता की मौत की खबर जब 16 वर्षीय आरती को लगी तो वह जिला अस्पताल पहुंची। उसका रो-रोकर बुरा हाल था। वह बार-बार एक ही रट लगाए थी कि पापा ने खाना भी नहीं खाया था। शायद वे खाना खाने लगते तो उनकी मौत न होती।
मृतक डालचंद्र की केवल एक पुत्री ही है। डालचंद्र अपने घर में इकलौता कमाने वाला था। डालचंद्र के दो भाई भी हैं, जो अलग रहते हैं।
ग्राम पढ़ीन निवासी डालचंद्र उर्फ राजू पुत्र गयाप्रसाद रविवार की दोपहर गांव में खड़ा था। पढ़ीन मंदिर के महंत रूपदास पुत्र परशुराम ने डालचंद्र से कहा कि 21 मार्च से भागवत शुरू हो रही है। इसके लिए पेड़ काटने चलना है। इस पर डालचंद्र पेड़ काटने चला गया। डालचंद्र आरी से पेड़ काट रहा था।
तभी अचानक पूरा पेड़ डालचंद्र के ऊपर आ गिरा। डालचंद्र को पेड़ के नीचे दबा देख आसपास के लोगों ने आनन-फानन में पेड़ को हटवाया और डालचंद्र को जिला अस्पताल लाए।
यहां पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों को डालचंद्र की मौत की जानकारी हुई तो जिला अस्पताल पहुंचे। डालचंद्र का शव देखकर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए इटावा भेज दिया।
पिता की मौत की खबर जब 16 वर्षीय आरती को लगी तो वह जिला अस्पताल पहुंची। उसका रो-रोकर बुरा हाल था। वह बार-बार एक ही रट लगाए थी कि पापा ने खाना भी नहीं खाया था। शायद वे खाना खाने लगते तो उनकी मौत न होती।
मृतक डालचंद्र की केवल एक पुत्री ही है। डालचंद्र अपने घर में इकलौता कमाने वाला था। डालचंद्र के दो भाई भी हैं, जो अलग रहते हैं।