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Auraiya News: धूल ने छीनी चैन की सांस, बढ़ रहे मरीज
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फोटो-11-मेडिकल कॉलेज में मरीज देखते चिकित्सक। संवाद
औरैया। सड़कों पर उड़ती धूल अब लोगों के फेफड़ों के लिए खतरा बनती जा रही है। वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर का सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज के रेस्पिरेटरी विभाग की ओपीडी में रोजाना ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही है। शुक्रवार को जिले का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) भी खराब श्रेणी में रहा।
सड़कों पर उड़ती धूल फेफड़ों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। शुक्रवार को जिले का एयर क्वालिटी इंडेक्स 176 दर्ज किया गया, जो खराब श्रेणी में माना जाता है। वहीं पीएम-10 (पािर्टकुलेट मैटर) का स्तर 135 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज हुआ, जो मानक से अधिक है। मेडिकल कॉलेज के रेस्पिरेटरी विभाग में रोजाना 10 से 15 मरीज फेफड़ों की समस्या लेकर आ रहे हैं। एलर्जी और संक्रमण के मामलों में इजाफा हो रहा है। खासकर बुजुर्ग, बच्चे और पहले से दमा या एलर्जी से पीड़ित लोग अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज के डॉ. मनोज कुमार मेघवानी ने बताया कि प्रदूषित हवा के कारण एलर्जिक राइनाइटिस, ब्रोंकाइटिस, दमा, सीओपीडी और फेफड़ों में संक्रमण जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं। मरीजों में सांस फूलना, गले में खराश, आंखों में जलन और लंबे समय तक रहने वाली खांसी जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं।
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उन्होंने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि बिना जरूरत घर से बाहर निकलने से बचें, बाहर जाते समय मास्क का प्रयोग करें और धूल भरे इलाकों से दूरी बनाए रखें। सांस संबंधी परेशानी होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। बढ़ता वायु प्रदूषण जिले के लिए चेतावनी है।
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नहीं हो रहा पानी का छिड़काव
सड़कों पर उड़ रही धूल को नियंत्रित करने के लिए नगर पालिका की ओर से पानी का छिड़काव कराया जाता है। जिले का एक्यूआई बढ़ने पर भी इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। चिकित्सक का कहना है कि नियमित पानी का छिड़काव, निर्माण कार्यों पर नियंत्रण और हरियाली बढ़ाने जैसे उपाय नहीं किए गए तो आने वाले दिनों में श्वसन रोगियों की संख्या और बढ़ सकती है।
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सड़कों पर उड़ती धूल फेफड़ों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। शुक्रवार को जिले का एयर क्वालिटी इंडेक्स 176 दर्ज किया गया, जो खराब श्रेणी में माना जाता है। वहीं पीएम-10 (पािर्टकुलेट मैटर) का स्तर 135 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज हुआ, जो मानक से अधिक है। मेडिकल कॉलेज के रेस्पिरेटरी विभाग में रोजाना 10 से 15 मरीज फेफड़ों की समस्या लेकर आ रहे हैं। एलर्जी और संक्रमण के मामलों में इजाफा हो रहा है। खासकर बुजुर्ग, बच्चे और पहले से दमा या एलर्जी से पीड़ित लोग अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
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मेडिकल कॉलेज के डॉ. मनोज कुमार मेघवानी ने बताया कि प्रदूषित हवा के कारण एलर्जिक राइनाइटिस, ब्रोंकाइटिस, दमा, सीओपीडी और फेफड़ों में संक्रमण जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं। मरीजों में सांस फूलना, गले में खराश, आंखों में जलन और लंबे समय तक रहने वाली खांसी जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं।
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उन्होंने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि बिना जरूरत घर से बाहर निकलने से बचें, बाहर जाते समय मास्क का प्रयोग करें और धूल भरे इलाकों से दूरी बनाए रखें। सांस संबंधी परेशानी होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। बढ़ता वायु प्रदूषण जिले के लिए चेतावनी है।
नहीं हो रहा पानी का छिड़काव
सड़कों पर उड़ रही धूल को नियंत्रित करने के लिए नगर पालिका की ओर से पानी का छिड़काव कराया जाता है। जिले का एक्यूआई बढ़ने पर भी इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। चिकित्सक का कहना है कि नियमित पानी का छिड़काव, निर्माण कार्यों पर नियंत्रण और हरियाली बढ़ाने जैसे उपाय नहीं किए गए तो आने वाले दिनों में श्वसन रोगियों की संख्या और बढ़ सकती है।