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गेहूं कटाई के बाद फसल के अवशेष न जलाएं: कृषि वैज्ञानिक

Thu, 30 Apr 2020 10:54 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 30 Apr 2020 10:54 PM IST
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Do not burn crop residue after harvesting wheat: agricultural scientist
दिबियापुर (औरैया)। फसलों के अवशेष खेतों में जलाने पर असंख्य जीवाणु एवं मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं। जीवाणुओं के नष्ट हो जाने से फसलों की पैदावार भी प्रभावित होते हैं। साथ ही पर्यावरण को भी भारी क्षति होती है। यह जानकारी कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक संदीप सिंह ने दी।
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उन्होंने बताया कि रबी के मौसम में मुख्य रूप से सरसों, मसूर, गेहूं, मटर, चना, अरहर की बुवाई की जाती है। कोरोना जैसी महामारी को देखते हुए किसान सावधानीपूर्वक समय से फसलों की कटाई कर लें। गेहूं की अधिकतर कटाई कंबाइन मशीन से की जाती है। इससे फसलों के अवशेष खेतों में रह जाते हैं। उन्होंने सलाह दी कि खेतों में फसलों के अवशेषों को नहीं जलाना चाहिए। इससे पर्यावरण प्रदूषण के साथ-साथ मृदा स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। फसल अवशेष जलाने से वातावरण में कार्बन डाई आक्साइड, मीथेन आदि गैसों का प्रतिशत बढ़ जाता है। खेत सतह का तापमान अचानक 50 डिग्री सेंटीग्रेड से 55 डिग्री सेंटीग्रेड तक बढ़ जाने से उसमें पाए जाने वाले असंख्य जीवाणु तथा मित्र कीट भी नष्ट हो जाते हैं।
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इन्हीं जीवाणुओं के कारण फसलों में प्रयोग की जाने वाली खाद या उर्वरक तत्व के रूप में घुलनशील होकर पौधों को प्राप्त होते हैं। इससे फसलें भोजन बनाकर अपना जीवन चक्र पूरा करती हैं परंतु इन जीवाणुओं के नष्ट हो जाने से उत्पादन भी प्रभावित होता है। ऐसे में गेहूं कटाई के बाद बचे हुए अवशेष को रोटावेटर यंत्र के माध्यम से जुताई कर खेत में मिला दें। या फिर कटाई के तुरंत बाद भूसा बनाने वाली मशीन स्ट्रारीपर चलाकर भूसा बना लें। इसके बाद खेत की ग्रीष्मकालीन जुताई कर दें।
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गेहूं कटाई के बाद अवशेष को जुताई कर मिट्टी में मिला देने से बरसात की पहली सिंचाई के बाद ये सब सड़कर मिट्टी में मिल जाते हैं और जीवाणुओं के माध्यम से ह्यूूमस में बदलकर खेत में पोषक तत्व तथा कार्बन तत्व की मात्रा बढ़ा देते हैं। हमारे खेतों में ये ह्यूमस तथा कार्बन ठीक उसी प्रकार काम करते है जैसे हमारे खून में रक्त कणिकाएं। इसलिए किसान फसल अवशेष प्रबंधन को अपनाये और पर्यावरण को भी सुरक्षित बनाने में सहयोग करें।
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