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Auraiya News: 35 फीसदी से कम नुकसान के आंकड़े में उलझा फसल का मुआवजा
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पांडु नदी का जलस्तर घटने के बाद भी खेतों में जलभराव का नजारा। संवाद
औरैया। हाल ही में बारिश के दिनों में तलहटी वाली जगहों पर सेंगुर व पांडु नदी उफान पर आई थी। खेतों में पानी भरने से फसलों में भारी नुकसान हुआ। मुआवजे का मरहम लगाने के चलते तहसील स्तर से जलनिकासी करते हुए नुकसान का आकलन शुरू कराया।
सैटेलाइट से हो रहे सर्वे में अभी तक कुछ गांवों में 35 प्रतिशत से कम नुकसान है। ऐसे में उन गांवों के किसानों को मुआवजा न मिलने की चिंता सता रही है। हालांकि तहसील प्रशासन का दावा है कि ज्यादा से ज्यादा किसानों को राहत दी जाएगी।
करीब एक पखवाड़ा पहले सेंगुर व पांडु नदी में तलहटी वाले गांवों के खेतों में नदियों का पानी घुस गया था। धान से लेकर मक्का व बाजरे की फसलें डूब गई थी। कुछ स्थानों पर यह पानी तुरंत निकल गया। वहीं, कुछ स्थानों पर फसलें पूरी तरह से चौपट हो गई, लेकिन फसलों को काफी हद तक नुकसान पहुंचा है।
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पानी हटने के बाद एसडीएम कमल सिंह के निर्देश पर राजस्व लेखपाल व स्थानीय कृषि अधिकारियों के साथ फसल नुकसान का सर्वे शुरू कराया गया। पांडु नदी की जद में 11 गांवों में फसल नुकसान की बात सामने आई। जबकि सेंगुर नदी के चलते सात गांव रहे, लेकिन चुनिंदा गांवों में ही फसलों में नुकसान का प्रतिशत 35 के पार पहुंचा है।
जबकि शासन का नियम है कि 35 प्रतिशत के पार नुकसान पाया, तभी मुआवजा दिया जाता है। इस कड़ी में कैथावा में फसलें 50 प्रतिशत तक क्षतिग्रस्त हुई हैं। जबकि अन्य गांवों में नुकसान का प्रतिशत कम रहा है। अभी तक के सर्वे में पांडु नदी के चलते 11 गांव की करीब 228 हेक्टेयर खेत प्रभावित पाए गए हैं। जबकि सेंगुर नदी के चलते 11 हेक्टेयर फसल नुकसान की बात सामने आई है, लेकिन नुकसान का प्रतिशत कुछ गांवों में 35 प्रतिशत से कम है।
सर्वे के आंकड़े:
पांडु नदी के चलते प्रभावित गांव
बर्रुकुलासार, भदौरा, बरकसी, रायपुर कैथावा, धरमंगदपुर, सिरयावा, गैली, पूर्वा धने, जरावन, कैथावा, नूरपुर खरगपुर। (अनुमानित रकबा-228 हेक्टेयर)
सेंगुर नदी से प्रभावित गांव
बघुआ, दिवरिया, नदूपुर, धमसिया, धमसरी, चिमकुनी, सुर्खीपुर। (अनुमानित रकबा-11 हेक्टेयर)
लेखपाल ने नुकसान की स्थिति नहीं की साफ
गैली गांव में पांडु नदी के चलते सात बीघा धान की फसल डूबकर नष्ट हो गई है। 35 प्रतिशत से कम नुकसान होने पर मुआवजा न मिलने का प्रावधान है। लेखपाल ने नुकसान की स्थिति ही साफ नहीं की है।-सरमन लाल, गांव गैली
मुआवजे को लेकर बनी हुई है चिंता
करीब साढ़े सात बीघा धान की फसल पांडु नदी में आए उफान के चलते डूब गई थी। काफी हद तक नुकसान हुआ है। क्षेत्रीय लेखपाल ने मुआवजे को लेकर अभी तक नुकसान की सीमा ही तय नहीं की है। ऐसे में मुआवजे को लेकर चिंता बनी हुई है। -श्यामसुंदर, गांव पूर्वा भवन
जिला कृषि अधिकारी दुर्गेश सिंह ने कहा कि
सेंगुर व पांडु नदी में आए उफान के चलते कई गांवों में नुकसान हुआ है। 35 प्रतिशत से ज्यादा नुकसान पर मुआवजा देने का प्रावधान है। अगर किसी ने फसल बीमा कराया है तो उसे पांच प्रतिशत नुकसान पर भी भुगतान दिया जाएगा। सर्वे के बाद ही मुआवजे की तस्वीर स्पष्ट होगी। -
एसडीएम, बिधूना कमल सिंह ने कहा कि पूर्व की तरह इस बार मुआवजे के लिए किसानों को परेशान नहीं होना पड़ेगा। सैटेलाइट के जरिये सर्वे कराया जा रहा है। 102 किसानों की फीडिंग नुकसान के मुआवजे को लेकर हो चुकी है। फसल नुकसान के मुआवजे का लाभ ज्यादा से ज्यादा किसानों को मिले, इसके लिए पूरा प्रयास किया जा रहा है।
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सैटेलाइट से हो रहे सर्वे में अभी तक कुछ गांवों में 35 प्रतिशत से कम नुकसान है। ऐसे में उन गांवों के किसानों को मुआवजा न मिलने की चिंता सता रही है। हालांकि तहसील प्रशासन का दावा है कि ज्यादा से ज्यादा किसानों को राहत दी जाएगी।
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करीब एक पखवाड़ा पहले सेंगुर व पांडु नदी में तलहटी वाले गांवों के खेतों में नदियों का पानी घुस गया था। धान से लेकर मक्का व बाजरे की फसलें डूब गई थी। कुछ स्थानों पर यह पानी तुरंत निकल गया। वहीं, कुछ स्थानों पर फसलें पूरी तरह से चौपट हो गई, लेकिन फसलों को काफी हद तक नुकसान पहुंचा है।
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पानी हटने के बाद एसडीएम कमल सिंह के निर्देश पर राजस्व लेखपाल व स्थानीय कृषि अधिकारियों के साथ फसल नुकसान का सर्वे शुरू कराया गया। पांडु नदी की जद में 11 गांवों में फसल नुकसान की बात सामने आई। जबकि सेंगुर नदी के चलते सात गांव रहे, लेकिन चुनिंदा गांवों में ही फसलों में नुकसान का प्रतिशत 35 के पार पहुंचा है।
जबकि शासन का नियम है कि 35 प्रतिशत के पार नुकसान पाया, तभी मुआवजा दिया जाता है। इस कड़ी में कैथावा में फसलें 50 प्रतिशत तक क्षतिग्रस्त हुई हैं। जबकि अन्य गांवों में नुकसान का प्रतिशत कम रहा है। अभी तक के सर्वे में पांडु नदी के चलते 11 गांव की करीब 228 हेक्टेयर खेत प्रभावित पाए गए हैं। जबकि सेंगुर नदी के चलते 11 हेक्टेयर फसल नुकसान की बात सामने आई है, लेकिन नुकसान का प्रतिशत कुछ गांवों में 35 प्रतिशत से कम है।
सर्वे के आंकड़े:
पांडु नदी के चलते प्रभावित गांव
बर्रुकुलासार, भदौरा, बरकसी, रायपुर कैथावा, धरमंगदपुर, सिरयावा, गैली, पूर्वा धने, जरावन, कैथावा, नूरपुर खरगपुर। (अनुमानित रकबा-228 हेक्टेयर)
सेंगुर नदी से प्रभावित गांव
बघुआ, दिवरिया, नदूपुर, धमसिया, धमसरी, चिमकुनी, सुर्खीपुर। (अनुमानित रकबा-11 हेक्टेयर)
लेखपाल ने नुकसान की स्थिति नहीं की साफ
गैली गांव में पांडु नदी के चलते सात बीघा धान की फसल डूबकर नष्ट हो गई है। 35 प्रतिशत से कम नुकसान होने पर मुआवजा न मिलने का प्रावधान है। लेखपाल ने नुकसान की स्थिति ही साफ नहीं की है।-सरमन लाल, गांव गैली
मुआवजे को लेकर बनी हुई है चिंता
करीब साढ़े सात बीघा धान की फसल पांडु नदी में आए उफान के चलते डूब गई थी। काफी हद तक नुकसान हुआ है। क्षेत्रीय लेखपाल ने मुआवजे को लेकर अभी तक नुकसान की सीमा ही तय नहीं की है। ऐसे में मुआवजे को लेकर चिंता बनी हुई है। -श्यामसुंदर, गांव पूर्वा भवन
जिला कृषि अधिकारी दुर्गेश सिंह ने कहा कि
सेंगुर व पांडु नदी में आए उफान के चलते कई गांवों में नुकसान हुआ है। 35 प्रतिशत से ज्यादा नुकसान पर मुआवजा देने का प्रावधान है। अगर किसी ने फसल बीमा कराया है तो उसे पांच प्रतिशत नुकसान पर भी भुगतान दिया जाएगा। सर्वे के बाद ही मुआवजे की तस्वीर स्पष्ट होगी। -
एसडीएम, बिधूना कमल सिंह ने कहा कि पूर्व की तरह इस बार मुआवजे के लिए किसानों को परेशान नहीं होना पड़ेगा। सैटेलाइट के जरिये सर्वे कराया जा रहा है। 102 किसानों की फीडिंग नुकसान के मुआवजे को लेकर हो चुकी है। फसल नुकसान के मुआवजे का लाभ ज्यादा से ज्यादा किसानों को मिले, इसके लिए पूरा प्रयास किया जा रहा है।

पांडु नदी का जलस्तर घटने के बाद भी खेतों में जलभराव का नजारा। संवाद

पांडु नदी का जलस्तर घटने के बाद भी खेतों में जलभराव का नजारा। संवाद