{"_id":"07b26f203c21ecf60bd1f4bc1bd0a69d","slug":"desh-ko-ek-sootr-mein-piro-sakatee-hai-hindee-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":" देश को एक सूत्र में पिरो सकती है हिन्दी ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
देश को एक सूत्र में पिरो सकती है हिन्दी
अमर उजाला ब्यूरो औरैया
Updated Sun, 28 Feb 2016 10:58 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिंदी भाषा ही देश में भावनात्मक एकता स्थापित कर सकती है। इसके माध्यम से देश के लोगों को एक सूत्र में पिरोया जा सकता है। उत्तर पूर्व के राज्यों में हिंदी की लोकप्रियता का केंद्र बिंदु हिंदी साहित्य के साथ हिंदी फिल्में भी हैं। यह विचार विवेकानंद ग्रामोद्योग महाविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र में त्रिपुरा विवि के कुलपति वाईडी पांडेय ने व्यक्त किए।
तकनीकी सत्र में लखनऊ विवि के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. कालीचरण स्नेही ने भाषा को सामान्य ज्ञान से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। कहा कि कोई भी भाषा जब मनुष्यों से कट जाती है तो वह भाषा मर जाती है। भाषा, साहित्य और समाज के संबंधों पर उन्होंने कहा कि समाज में अच्छे वातावरण के निर्माण के लिए अच्छे साहित्य की जरूरत है।
इलाहाबाद विवि के प्रोफेसर रामकिशोर शर्मा ने हिंदी भाषा के उदभव पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्कृत के साथ साथ विभिन्न भारतीय भाषाओं के अतिरिक्त फारसी व अंग्रेजी के शब्दों ने भी योगदान दिया है। लखनऊ विवि के प्रोफेसर श्रीकृष्ण श्रीवास्तव ने हिंदी को पूरे देश की सांस्कृतिक अस्मिता बताते हुए इसके निर्माण में भक्ति आंदोलन के महत्व पर प्रकाश डाला।
विज्ञापन
भक्ति आंदोलन दक्षिण के अलवार भक्तों, महाराष्ट्र के नामदेव एवं आसाम के शंकर देव ने हिंदी भाषा एवं देश की संास्कृतिक विरासत को तैयार किया है। तिलक महाविद्यालय के डा.सियाराम, चौधरी चरण सिंह पीजी कालेज हैंवरा के रामरक्षपाल सिंह, प्रवीणा देवी, ममता अग्रवाल, सरिता गुप्ता, डा.नरेश बाबू, आदि ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। रामशंकर गुप्ता, डा. डीपी सिंह, डा.इकरार अहमद, डा.केके गुप्ता, डा.पीसी तायल, डा.विवेक दुबे, डा.योगेश, डा.सुवेंद्र सिंह, डा.इफ्तिखार हसन, डा.संदीप ओमर, प्रोफेसर हर्षवर्द्धन अग्रवाल, केके सिंह चौहान, डा.विनीत त्रिपाठी, डा.गजेंद्र यादव आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
तकनीकी सत्र में लखनऊ विवि के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. कालीचरण स्नेही ने भाषा को सामान्य ज्ञान से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। कहा कि कोई भी भाषा जब मनुष्यों से कट जाती है तो वह भाषा मर जाती है। भाषा, साहित्य और समाज के संबंधों पर उन्होंने कहा कि समाज में अच्छे वातावरण के निर्माण के लिए अच्छे साहित्य की जरूरत है।
विज्ञापन
इलाहाबाद विवि के प्रोफेसर रामकिशोर शर्मा ने हिंदी भाषा के उदभव पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्कृत के साथ साथ विभिन्न भारतीय भाषाओं के अतिरिक्त फारसी व अंग्रेजी के शब्दों ने भी योगदान दिया है। लखनऊ विवि के प्रोफेसर श्रीकृष्ण श्रीवास्तव ने हिंदी को पूरे देश की सांस्कृतिक अस्मिता बताते हुए इसके निर्माण में भक्ति आंदोलन के महत्व पर प्रकाश डाला।
विज्ञापन
भक्ति आंदोलन दक्षिण के अलवार भक्तों, महाराष्ट्र के नामदेव एवं आसाम के शंकर देव ने हिंदी भाषा एवं देश की संास्कृतिक विरासत को तैयार किया है। तिलक महाविद्यालय के डा.सियाराम, चौधरी चरण सिंह पीजी कालेज हैंवरा के रामरक्षपाल सिंह, प्रवीणा देवी, ममता अग्रवाल, सरिता गुप्ता, डा.नरेश बाबू, आदि ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। रामशंकर गुप्ता, डा. डीपी सिंह, डा.इकरार अहमद, डा.केके गुप्ता, डा.पीसी तायल, डा.विवेक दुबे, डा.योगेश, डा.सुवेंद्र सिंह, डा.इफ्तिखार हसन, डा.संदीप ओमर, प्रोफेसर हर्षवर्द्धन अग्रवाल, केके सिंह चौहान, डा.विनीत त्रिपाठी, डा.गजेंद्र यादव आदि मौजूद रहे।