फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Auraiya News ›   Dengue's havoc, responsible oblivious

औरैयाः डेंगू का कहर, जिम्मेदार बेखबर

Tue, 08 Nov 2022 12:48 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 08 Nov 2022 12:48 AM IST
विज्ञापन
Dengue's havoc, responsible oblivious
फोटो-07एयूआरपी-04- अस्पताल में शासन से भेजी गई ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन। संवाद - फोटो : AURAIYA
औरैया। संक्रामक रोग उफान पर होने के बाद भी सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं घुटनों पर हैं। नौ साल से बंद चल रहे ब्लड बैंक को दोबारा शुरू करने की कवायद ठंडे बस्ते में है। जुलाई में ब्लड बैंक शुरू कराने के लिए 70 लाख रुपये से खरीदी गई ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर शोपीस बनी हुई है। डेंगू व अन्य रोगों से पीड़ित मरीज ब्लड, प्लाजमा, प्लेटलेट्स के लिए भटकते नजर आ रहे हैं।
विज्ञापन

पिछले एक साल से ब्लड बैंक संचालन की कवायद चल रही है। सीएमओ और सीएमएस एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल कर पल्ला झाड़ रहे हैं। रिक्त चल रहे पैथोलॉजिस्ट के पद पर डॉ. श्वेता ददेरिया व लैब टेक्नीशियन की तैनाती की जा चुकी है। इसी बीच जुलाई माह में ब्लड बैंक शुरू कराने के लिए शासन स्तर से ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन भेजी गई।
विज्ञापन

मशीन आने से उम्मीद जगी थी कि अब जरूरतमंद मरीजों के तीमारदारों को प्लाज्मा, आरबीसी, प्लेटलेट्स के लिए भटकना नहीं पड़ेगा लेकिन, उम्मीद मूर्त रूप नहीं ले सकी। जिले में संक्रामक रोगों के साथ मलेरिया व डेंगू ने पैर पसार लिए हैं। हालत यह है कि प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में मलेरिया व डेंगू लक्षण के मरीज अस्पतालों में पहुंच रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

डेंगू पीड़ित मरीजों में तेजी से प्लेटलेट्स घट रही है। मरीज की स्थिति गंभीर होने पर डॉक्टर प्लेटलेट्स चढ़ाने की सलाह दे रहे हैं। जिला अस्पताल में ब्लड की उपलब्धता न होने पर मरीज प्राइवेट पैथोलॉजी को मोटी रकम चुका कर प्लेटलेट्स खरीद रहे हैं। यहां ने मिलने पर सैफई, कन्नौज, कानपुर के मेडिकल कालेजों के लिए मरीज रेफर करा रहे हैं। सीएमएस डॉ. राजेश मोहन गुप्ता का कहना है कि उनके स्तर से आवेदन कर दिया गया है। प्रक्रिया पूरी होने पर ब्लड बैंक चालू होगा।
सीएमओ डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने कहा कि ब्लड बैंक संचालन को लेकर प्रशासनिक तैयारी लगभग पूरी हो गई है। उनके स्तर से ब्लड बैंक में एयरकंडीशन भी लगवा दिए गए है। अब लाइसेंस आवेदन के साथ अन्य प्रक्रिया सीएमएस को करनी है। कारपोरेशन से ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन मिल चुकी है। ब्लड बैंक संचालन के साथ उसे भी चालू कराया जाएगा।
संचालन से यह होता फायदा
ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन से ब्लड में पाए जाने वाले प्लाज्मा, आरबीसी, प्लेटलेट्स को पृथक किया जाता है। यानी कि एक यूनिट ब्लड तीन लोगों की जान बचाई जा सकती है। इसका बड़ा फायदा थेलेसीमिया, स्वाईन फ्लू, डेंगू, मलेरिया आदि बीमारी के मरीजों को होता। क्योंकि इन मरीजों को होल ब्लड की जरूरत न होकर कंपोनेंट चाहिए होते हैं। होल ब्लड मुख्य रूप से उन मरीजों के लिए आवश्यक होता है जिनके शरीर से दुर्घटना या फिर अन्य कारणों से ब्लड शरीर से निकल जाता है।

सरकारी आंकड़ों में संक्रामक रोग
बीमारी - जांच मरीज
डेंगू- 695 13
मलेरिया 9045 46
टाइफाइड 4908 16
निजी अस्पतालों के आंकड़े
कानपुर रोड स्थित एक अस्पताल के डॉक्टर के मुताबिक वायरल बुखार के साथ ही मलेरिया डेंगू के मरीज मिल रहे हैं। रैपिड टेस्ट में ज्यादातर लोगों की रिपोर्ट पॉजीटिव आ रही है। कई दिनों तक बुखार आने की शिकायत पर प्लेटलेट्स भी तेजी से कम होना पाया जा रहा है। जो डेंगू के लक्षण दर्शाते हैं। निजी अस्पताल व पैथोलॉजी सेंटरों में प्रतिदिन 10- 12 मरीज मलेरिया व डेंगू पॉजिटिव पाए जा रहे हैं।

फोटो-07एयूआरपी-05- जिला अस्पताल में बंद ब्लड बैंक। संवाद

फोटो-07एयूआरपी-05- जिला अस्पताल में बंद ब्लड बैंक। संवाद- फोटो : AURAIYA

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed