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बिजली राहत के नाम पर मिला ठेंगा
अमर उजाला ब्यूरो औरैया
Updated Sun, 27 Dec 2015 10:55 PM IST
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जिले की सबसे बड़ी बिजली समस्या से उपभोक्ताओं को बीत रहे साल में भी राहत नहीं मिल सकी। अलबत्ता निदान को शुरू की गई योजनाओं पर लाल फीताशाही की मनमानी और उपेक्षा का डंक लग जाने से समय से काम पूरा होने मेें अड़चनें जरूर खड़ी की गई। इससे निर्माणाधीन पड़े सब स्टेशनों का काम पूरा न होने से शहर सहित जिले के लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पाया। एक साल तक इंतजार कर चुके लोगों को अब चिंता सता रही है कि क्या बीते साल की तरह ही क्या यह साल भी इसी तरह से गुजर जाएगा।
बसपा सरकार में जिले में कई बिजली योजनाओं को स्वीकृति दी गई थी। जिसमें सदर क्षेत्र सहित ग्रामीणांचलों के लिए एक 132 केवीए बिजली उप संस्थान के अलावा चपटा में 33 केवीए बिजली केंद्र का निर्माण शामिल है। इसके लिए शासन की ओर से बजट जारी कर निर्माण कार्य शुरु करा दिया गया था। लेकिन सत्ता परिवर्तन के साथ ही सभी पर तलवारें लटक गई।
बजट के अभाव ने पूरे निर्माण को ही बाधित कर दिया। इसके चलते जिले त्र्े उपभोक्ताओं को मिलने वाली राहत पर पानी फिरता दिखाई दिया। बाद इसके आम जनता की आह से बचने को जनप्रतिनिधियों ने शासन में गुहारें लगाई। तब जाकर शासन ने कुछ रहम दिली दिखाई। हालांकि इस पूरे मामले के चलते साल 2015 में जिले के लोगों को मिलने वाली बिजली राहत पूरी तरह से खटाई में पड़ गई।
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बता दें कि 15 जनवरी 2011 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने 25 करोड़ बजट की लागत से शहर के लिए देवकली मंदिर के पास 132 केवीए बिजली उप केंद्र के निर्माण को स्वीकृति दी थी। वहीं चपटा में भी 8 लाख की लागत से 33 केवीए बिजली केंद्र को मंजूरी दी गई थी। शुरुआती दरौर में दोनों बिजली योजनाओं में बजट की उपलब्धता के चलते धड़ल्ले से काम शुरु हुआ।
बाद इसके प्रदेश में सरकार बदलते ही इन पर ग्रहण के बादल मंडराने लगे। लंबे समय से निर्माण कार्य ठप रहने से जिले के उ पभोक्ता बुरी तरह से परेशान हो गए थे। सदर क्षेत्र में निर्माणाधीन पड़े सब स्टेशन को लेकर डीएम माला श्रीवास्तव, एक्सईएन रामवीर सिंह के प्रयासों के चलते शासन की आखिर नजरें इनायत हो ही गई। लेकिन देरी के चलते 2015 में उपभोक्ताओं को इसके लाभ से वंचित रहना पड़ा।
वहीं चपटा में 2006 में 8 स्वीकृत 33 केवी का बिजली केंद्र आज तक पूरा नहीं हो सका है। वहीं विभागीय अधिकारी कार्यदाई संस्था ब्राइट लाइट कारपोरेशन को जिम्मेदार बताते हुए 33 हजार केवीए की लाइन न खींचे जाने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं। ऐसे में सरकार की मंशा से जाने वाला साल जिले के उपभोक्ताओं के लिए बिजली का दंश देकर जा रहा है। इस केंद्र के निर्माणाधीन रहने से क्षेत्र के
चपटा बिजली केंद्र निर्माण से जुडने वाले 15 गांव प्रभावित हो रहे हैं। इनमें सलैया, बखरिया, पुर्वा डोरी, सेंगनपुट्टा, तिलकपुर, नैबरपुर, ततारपुर, अलीपुर, जलूपुर, मिश्रीपुर, ऊंचा, सुरजनपुर, हैदरपुर, मिर्जापुर, उद्यमपुर, हीरापुर, चमरपुरा, शहबाजपुर, बेलाझाल, ब्यौरा नवलपुर, सतहाड़ी, हरसाय का पुरवा, किशनपुर, फतेहपुर, तालेपुर शामिल हैं। इसके अलावा भी जिले में कई बिजली की योजनाएं हैं इनमें औरैया डिवीजन में राजीव गांधी योजना के तहत देवरपुर, त्यौवर लालपुर, अटसू, सेंगनपुट्ठा, नदूपुर, कुदरकोट, लहरापुर, भगौतीपुर बिजली केंद्रों का निर्माण कराया जाना है। इनमें से त्यौवरलालपुर में बिजली केंद्र के लिएजमीन मौजूद है। सेंगनपुट्ठा के लिए जमीन खोजी जा रही हैं। नदूपुर के लिए जमीन का प्रस्ताव बिजली अधिकारियों को मिल गया है। वहीं कुदरकोट, लहरापुर व भगौतीपुर में बिजली केंद्रों का निर्माण जारी है।
वर्ष 2015 भी मूक बधिर बच्चों के लिए सपना बनकर रह गया। निर्माण इकाई की लापरवाही के कारण मूक बधिर आवासीय विद्यालय का काम समय से पूरा नहीं हो सका है। मुख्यमंत्री के विशेष निर्देश से कंचौसी व हीरानगर गांव में 25 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनाई जा रही समेकित मूक बधिर विकलांग आवासीय विद्यालय का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका। निर्माण के लिए समाज कल्याण विभाग के आधा दर्जन इंजीनियरों की टीम लगाई गई थी।
लेकिन मौके पर किसी के न रहने से यह निर्माण 2015 के जाते-जाते अधूरा रह गया। समाज कल्याण विभाग के ठेकेदार अरविंद शर्मा ने बताया कि सरकार व इंजीनियरों का पूर्ण सहयोग न मिलने के कारण परेशानी होती है। निर्माण सामग्री की लूटपाट एवं लेबर को डराना, धमकाया जाता है। पुलिस भी सहयोग नहीं करती है। जिससे काम पर असर पड़ता है।
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बसपा सरकार में जिले में कई बिजली योजनाओं को स्वीकृति दी गई थी। जिसमें सदर क्षेत्र सहित ग्रामीणांचलों के लिए एक 132 केवीए बिजली उप संस्थान के अलावा चपटा में 33 केवीए बिजली केंद्र का निर्माण शामिल है। इसके लिए शासन की ओर से बजट जारी कर निर्माण कार्य शुरु करा दिया गया था। लेकिन सत्ता परिवर्तन के साथ ही सभी पर तलवारें लटक गई।
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बजट के अभाव ने पूरे निर्माण को ही बाधित कर दिया। इसके चलते जिले त्र्े उपभोक्ताओं को मिलने वाली राहत पर पानी फिरता दिखाई दिया। बाद इसके आम जनता की आह से बचने को जनप्रतिनिधियों ने शासन में गुहारें लगाई। तब जाकर शासन ने कुछ रहम दिली दिखाई। हालांकि इस पूरे मामले के चलते साल 2015 में जिले के लोगों को मिलने वाली बिजली राहत पूरी तरह से खटाई में पड़ गई।
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बता दें कि 15 जनवरी 2011 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने 25 करोड़ बजट की लागत से शहर के लिए देवकली मंदिर के पास 132 केवीए बिजली उप केंद्र के निर्माण को स्वीकृति दी थी। वहीं चपटा में भी 8 लाख की लागत से 33 केवीए बिजली केंद्र को मंजूरी दी गई थी। शुरुआती दरौर में दोनों बिजली योजनाओं में बजट की उपलब्धता के चलते धड़ल्ले से काम शुरु हुआ।
बाद इसके प्रदेश में सरकार बदलते ही इन पर ग्रहण के बादल मंडराने लगे। लंबे समय से निर्माण कार्य ठप रहने से जिले के उ पभोक्ता बुरी तरह से परेशान हो गए थे। सदर क्षेत्र में निर्माणाधीन पड़े सब स्टेशन को लेकर डीएम माला श्रीवास्तव, एक्सईएन रामवीर सिंह के प्रयासों के चलते शासन की आखिर नजरें इनायत हो ही गई। लेकिन देरी के चलते 2015 में उपभोक्ताओं को इसके लाभ से वंचित रहना पड़ा।
वहीं चपटा में 2006 में 8 स्वीकृत 33 केवी का बिजली केंद्र आज तक पूरा नहीं हो सका है। वहीं विभागीय अधिकारी कार्यदाई संस्था ब्राइट लाइट कारपोरेशन को जिम्मेदार बताते हुए 33 हजार केवीए की लाइन न खींचे जाने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं। ऐसे में सरकार की मंशा से जाने वाला साल जिले के उपभोक्ताओं के लिए बिजली का दंश देकर जा रहा है। इस केंद्र के निर्माणाधीन रहने से क्षेत्र के
चपटा बिजली केंद्र निर्माण से जुडने वाले 15 गांव प्रभावित हो रहे हैं। इनमें सलैया, बखरिया, पुर्वा डोरी, सेंगनपुट्टा, तिलकपुर, नैबरपुर, ततारपुर, अलीपुर, जलूपुर, मिश्रीपुर, ऊंचा, सुरजनपुर, हैदरपुर, मिर्जापुर, उद्यमपुर, हीरापुर, चमरपुरा, शहबाजपुर, बेलाझाल, ब्यौरा नवलपुर, सतहाड़ी, हरसाय का पुरवा, किशनपुर, फतेहपुर, तालेपुर शामिल हैं। इसके अलावा भी जिले में कई बिजली की योजनाएं हैं इनमें औरैया डिवीजन में राजीव गांधी योजना के तहत देवरपुर, त्यौवर लालपुर, अटसू, सेंगनपुट्ठा, नदूपुर, कुदरकोट, लहरापुर, भगौतीपुर बिजली केंद्रों का निर्माण कराया जाना है। इनमें से त्यौवरलालपुर में बिजली केंद्र के लिएजमीन मौजूद है। सेंगनपुट्ठा के लिए जमीन खोजी जा रही हैं। नदूपुर के लिए जमीन का प्रस्ताव बिजली अधिकारियों को मिल गया है। वहीं कुदरकोट, लहरापुर व भगौतीपुर में बिजली केंद्रों का निर्माण जारी है।
वर्ष 2015 भी मूक बधिर बच्चों के लिए सपना बनकर रह गया। निर्माण इकाई की लापरवाही के कारण मूक बधिर आवासीय विद्यालय का काम समय से पूरा नहीं हो सका है। मुख्यमंत्री के विशेष निर्देश से कंचौसी व हीरानगर गांव में 25 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनाई जा रही समेकित मूक बधिर विकलांग आवासीय विद्यालय का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका। निर्माण के लिए समाज कल्याण विभाग के आधा दर्जन इंजीनियरों की टीम लगाई गई थी।
लेकिन मौके पर किसी के न रहने से यह निर्माण 2015 के जाते-जाते अधूरा रह गया। समाज कल्याण विभाग के ठेकेदार अरविंद शर्मा ने बताया कि सरकार व इंजीनियरों का पूर्ण सहयोग न मिलने के कारण परेशानी होती है। निर्माण सामग्री की लूटपाट एवं लेबर को डराना, धमकाया जाता है। पुलिस भी सहयोग नहीं करती है। जिससे काम पर असर पड़ता है।