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बेटियों को रास नहीं आ रहा पारिवारिक व्यापार

Mon, 25 Jul 2016 12:05 AM IST
Auraiya, Uttar pradesh, India
Auraiya, Uttar pradesh, India Updated Mon, 25 Jul 2016 12:05 AM IST
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Daughters family business has not gone
हसनपुर क्षेत्र के गांव रामपुर भूड़ में कच्ची जहरीली शराब पीने से पिता पुत्र की मौत के बाद विलाप करते हुए।
शहर की पछैंया बस्ती में कई पीढ़ियों से चल रहा अवैध कच्ची शराब के कारोबार को नई पीढ़ी नही करना चाहती। वह इस जलालत भरी जिंदगी से निकलना चाहते हैं। इस धंधे से निकलने के लिए बस्ती की लड़कियां आगे आ रही हैं। उनके अंदर पढ़ने की ललक है मगर आर्थिक संकट और बदनामी उन्हें कुछ करने नही दे रही है। पीढ़ियों से चले आ रहे अवैध शराब के कारोबार को पूरी तरह से खत्म करने को लेकर पछैंया मोहल्ले के लोग अब एकजुट होेने लगे हैं। इस कवायद के पीछे परिवार की बेटियाें ने आगे बढ़कर शराब के कारोबार को बंद किए जाने का दबाव बनाया है। उनका कहना है कि वह उच्च शिक्षा ग्रहण कर कुछ बनने की ललक रखती हैं, लेकिन उनकी जाति पर लगा कच्ची शराब के कारोबार का ठप्पा उनकी प्रगति के मार्ग में आड़े आ रहा है। वहीं पैसों की कमी उनके सपनों को साकार करने में बाधक बनी है। ऐसे में यदि सरकार उनकी मदद करे तो वह भी सामान्य और सम्मान भरी जिंदगी गुजारकर कुछ बनना चाहती हैं। उन्होंने अमर उजाला के साथ बेबाक होकर बात की और फोटो और नाम न छपने से भी ऐतराज नही किया।
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बीएससी करने के बाद शहर के एक प्राइवेट नर्सिंग होम में नर्स का प्रशिक्षण ले रही पूजा बताती है कि वह पढ़ना चाहती है। लेकिन उनकी बिरादरी पर लगा कच्ची शराब व चोरी डकैती करने का ठप्पा उनके मार्ग में आड़े आ रहा है। इस कारोबार से हम सभी का भविष्य चौपट हो रहा है। ऐसे में हर हालत में शराब का यह कारोबार बंद होना चाहिए। वह पढ़ लिखकर देश की सेवा करने का जज्बा रखती है। लेकिन पैसा न होने के कारण उसके सभी अरमान ठंडे होते जा रहे हैं।
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इंटर तक पढ़ाई करने के बाद वर्षा आगे की पढ़ाई नहीं कर पा रही है। उसने बताया कि पिता शराब की लत के कारण मर चुके हैं। मां कैंसर की बीमारी से ग्रसित है। ऐसे में पैसे की कमी ने पढ़ने की दिशा में बढ़ते कदमों में बेड़िया डाल दीं। अब जब सकून भरी जिंदगी जीना चाहते हैं तो शराब का अवैध कारोबार आड़े आ रहा है। फिलहाल हम सभी इस कारोबार से मुक्त होकर एक सादगी भरी जिंदगी जीना चाह रहे हैं। इसके लिए जिला प्रशासन का सहयोग जरूरी है।
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किरन देवी बीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद अब आगे की पढ़ाई करना चाहती है। लेकिन पैसा न होने के कारण पढ़ाई रोकनी पड़ी। उसने बताया कि बस्ती में हो रहे शराब का अवैध कारोबार के चलते आम लोगों की नजरों में हमारी कोई इज्जत नहीं है। पछैंया समाज के लोगों के पास कोई रोजगार न होने के कारण पीढ़ियों से घरों में चल रहे कारोबार में हम मजबूरी में संलिप्त हैं। प्रशासन हम लोगों को रोजगार दे तो निश्चित सभी इस कारोबार से तौबा करने को एकजुट हैं।


पछैयां बस्ती में रहने वाले धर्मेश ने बताया कि कच्ची शराब के इस कारोबार से खुद को दूर हूं। फिर भी कहावत है कि काजल की कोठरी में रहोगे तो कालिख तो लगती ही है। बस यही स्थिति मेरी भी है। मनोरमा महाविद्यालय से बीएससी कर रहा हूं। कालेज में सभी जानते हैं कि मैं पछैंया बस्ती का हूं। ऐसे में मुझसे दोस्ती करने में भी लोग हिचकिचाते हैं। मेरी सोच है कि पढ़ लिखकर बड़ा अधिकारी बनूं। जिससे हमसे दोस्ती न करने वाले भी कल हमें देखकर गर्व करें।
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