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छात्राओं को अधिकारों के प्रति जागरूक किया
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दिबियापुर (औरैया)। अमर उजाला के अभियान अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत बुधवार को वैदिक महाविद्यालय दिबियापुर में जागरूकता गोष्ठी का आयोजन हुआ। इसमें महिलाओं एवं छात्राओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया। छात्रा प्रगति का महिलाओं की वर्तमान स्थिति पर गीत ‘लंबी डगर है पर हिम्मत है संग, पांव पे छाले है सांसें बुलंद, लड़ने चली हूं आजादी की जंग’ खूब सराही गई।
मुख्य अतिथि समाजसेवी एवं प्रोफेसर संध्या अवस्थी ने कहा कि स्त्री कभी भी कमजोर नहीं रही। पुरातन समय से ही नारी हमेशा सशक्त रही। तभी शुंभ निशुंभ जैसे दैत्यों को मारने के लिए मां दुर्गा का रूप प्रकट हुआ था। उन्होंने किसी अराजकतत्व द्वारा परेशान करने पर महिला हेल्प लाइन 1090 का प्रयोग करने की सलाह दी। प्रोफेसर डॉ.ममता चौहान ने कहा कि महिला यदि महिला का साथ दे तो महिला सशक्त हो जाएगी। किसी भी गलत कार्य का विरोध करना भी महिलाओं को आना चाहिए। उन्होंने कहा कि बालिकाओं को सेल्फ डिफेंस के गुर अवश्य सीखने चाहिए।
डॉ.चंद्रप्रभा पाल ने अमर उजाला अपराजिता मुहिम की सराहना की। कहा कि इस मुहिम से महिलाओं को उनके अधिकारों के साथ सरकार द्वारा चलाईं जा रहीं योजनाओं के बारे में जानकारी मिलेगी। कार्यवाहक प्राचार्य डॉ.शैलेश पांडेय ने कहा कि बेटियां अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होगीं तो कभी भी कोई भी उनका शोषण नहीं कर सकता। छात्रा प्रगति एवं दीक्षा ने भी महिला सशक्तीकरण के प्रति अपने विचार रखे। इससे पहले मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि करके कार्यक्रम की शुरूआत हुई। मुख्य अतिथि संध्या अवस्थी ने महिलाओं एवं छात्राओं को नारी गरिमा बनाए रखने की शपथ दिलाई। यहां मौजूद छात्राओं, महिला प्रोफेसरों ने नारी गरिमा बनाए रखने को शपथ पत्र भी भरे। इस दौरान संध्या अवस्थी, डॉ.शैलेश पांडेय, डॉ.पीएन तिवारी, डॉ.ममता चौहान, डॉ.चंद्रप्रभा पाल, रीटा सिंह, पवन दुबे, सरिता आदि मौजूद रहीं।
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उधर, छात्रा प्रगति का कहना है कि नारी में समस्त शक्तियां निहित हैं, केवल उसे पहचानने की आवश्यकता है। आज की नारी को किसी भी परिस्थिति का डटकर मुकाबला करने के लिए तैयार रहना चाहिए। छात्रा प्रियंका का कहना है कि नारी अपराजिता है और हमेशा ही रहेगी। छात्रा पारुल ने कहा कि मां चाहिए, पत्नी चाहिए, बहन चाहिए पर एक सवाल कि बेटी क्यों नहीं चाहिए। घर से ही बेटी को अपराजिता बनाने के लिए हमें हर कदम उठाने चाहिए। घर से ही बेटी को संस्कारवान के साथ ही दृढ़ निश्चयी और अपराजिता बनाना चाहिए। यह लोगों की बेटी न चाहने वाली पुरानी सोच बदलने में कारगर होगी। छात्रा शालिनी ने कहा कि नारी सशक्तीकरण के लिए पुरुषों को अपनी सोच में परिवर्तन लाना होगा। नारी को अपने हकों के प्रति जागरूक होने के साथ ही अपनी गरिमा पर भी ध्यान देना होगा।
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मुख्य अतिथि समाजसेवी एवं प्रोफेसर संध्या अवस्थी ने कहा कि स्त्री कभी भी कमजोर नहीं रही। पुरातन समय से ही नारी हमेशा सशक्त रही। तभी शुंभ निशुंभ जैसे दैत्यों को मारने के लिए मां दुर्गा का रूप प्रकट हुआ था। उन्होंने किसी अराजकतत्व द्वारा परेशान करने पर महिला हेल्प लाइन 1090 का प्रयोग करने की सलाह दी। प्रोफेसर डॉ.ममता चौहान ने कहा कि महिला यदि महिला का साथ दे तो महिला सशक्त हो जाएगी। किसी भी गलत कार्य का विरोध करना भी महिलाओं को आना चाहिए। उन्होंने कहा कि बालिकाओं को सेल्फ डिफेंस के गुर अवश्य सीखने चाहिए।
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डॉ.चंद्रप्रभा पाल ने अमर उजाला अपराजिता मुहिम की सराहना की। कहा कि इस मुहिम से महिलाओं को उनके अधिकारों के साथ सरकार द्वारा चलाईं जा रहीं योजनाओं के बारे में जानकारी मिलेगी। कार्यवाहक प्राचार्य डॉ.शैलेश पांडेय ने कहा कि बेटियां अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होगीं तो कभी भी कोई भी उनका शोषण नहीं कर सकता। छात्रा प्रगति एवं दीक्षा ने भी महिला सशक्तीकरण के प्रति अपने विचार रखे। इससे पहले मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि करके कार्यक्रम की शुरूआत हुई। मुख्य अतिथि संध्या अवस्थी ने महिलाओं एवं छात्राओं को नारी गरिमा बनाए रखने की शपथ दिलाई। यहां मौजूद छात्राओं, महिला प्रोफेसरों ने नारी गरिमा बनाए रखने को शपथ पत्र भी भरे। इस दौरान संध्या अवस्थी, डॉ.शैलेश पांडेय, डॉ.पीएन तिवारी, डॉ.ममता चौहान, डॉ.चंद्रप्रभा पाल, रीटा सिंह, पवन दुबे, सरिता आदि मौजूद रहीं।
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उधर, छात्रा प्रगति का कहना है कि नारी में समस्त शक्तियां निहित हैं, केवल उसे पहचानने की आवश्यकता है। आज की नारी को किसी भी परिस्थिति का डटकर मुकाबला करने के लिए तैयार रहना चाहिए। छात्रा प्रियंका का कहना है कि नारी अपराजिता है और हमेशा ही रहेगी। छात्रा पारुल ने कहा कि मां चाहिए, पत्नी चाहिए, बहन चाहिए पर एक सवाल कि बेटी क्यों नहीं चाहिए। घर से ही बेटी को अपराजिता बनाने के लिए हमें हर कदम उठाने चाहिए। घर से ही बेटी को संस्कारवान के साथ ही दृढ़ निश्चयी और अपराजिता बनाना चाहिए। यह लोगों की बेटी न चाहने वाली पुरानी सोच बदलने में कारगर होगी। छात्रा शालिनी ने कहा कि नारी सशक्तीकरण के लिए पुरुषों को अपनी सोच में परिवर्तन लाना होगा। नारी को अपने हकों के प्रति जागरूक होने के साथ ही अपनी गरिमा पर भी ध्यान देना होगा।