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सात साल बाद मिल ही गया इंसाफ

Tue, 05 Jun 2018 12:12 AM IST
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auraiya Updated Tue, 05 Jun 2018 12:12 AM IST
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Seven years later, justice came
कोर्ट के फैसले के बाद वार्ता करती मृतक व्यापारी की पत्नी ममता व बड़े भाई सतेन्द्र तिवारी - फोटो : amarujala
औरैया। शहर के ख्यातिलब्ध डॉक्टर सुभाष त्रिपाठी के पुत्र डॉक्टर अभिनंदन त्रिपाठी को सात साल बाद दोस्त की हत्या के मामले में कोर्ट ने उम्रकैद की सजा कोर्ट ने सुनाई है। इस फैसले के बाद पीड़ित के परिजनों ने कहा कि आज उन्हें इंसाफ  मिल गया। उधर, कोर्ट का फैसला आने के बाद से ही डॉक्टर के आवास पर सन्नटा पसर गया। इस मुकदमे में कई पेंच सामने आए। कभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रिवाल्वर की गोली से मरें नरेंद्र के शव में गोली न मिलना रहा। वहीं कभी आरोपी की जमानत खारिज कराने के लिए पीड़ित पक्ष द्वारा सुप्रीम कोर्ट तक गुहार लगाने की कोशिश। यही नहीं इस मामले में फैसला एक माह पूर्व ही आ जाता लेकिन उसी दौरान आरोपी के पिता व भाई की मौत की वजह से फैसला आने में देरी हुई।
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मालूम हो कि 23 अक्टूबर 2011 की शाम दिबियापुर के राणा नगर में मोबाइल शॉप के मालिक नरेंद्र उर्फ रामू तिवारी दोस्त डॉ. अभिनंदन त्रिपाठी की रिवाल्वर से चली गोली से गंभीर रूप से घायल हो गया था। गंभीर हालत में जख्मी नरेंद्र को आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया लेकिन उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया था। शव का उस दौरान इटावा में पोस्टमार्टम हुआ था। पोस्टमार्टम के दौरान नरेंद्र के शव से गोली न मिलने पर हैरानी जताई गई थी। हालांकि बाद में मृतक के बडे़ भाई सतेंद्र कुमार ने इस मामले में आरोपी अभिनंदन त्रिपाठी के खिलाफ  धारा 304 ए के तहत मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने विवेचना कर धारा 304 में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था। वर्ष 2012 में पीड़ित पक्ष ने सत्र न्यायाधीश के यहां गुहार लगाई कि गैर इरादतन मुकदमे को हत्या में दर्ज किया जाए। जिसके बाद मामला हत्या में दर्ज हो गया था। हालांकि इस दौरान आरोपी की जमानत दी जा चुकी थी। इस पर नरेंद्र के परिजनों ने  इलाहाबाद उच्च न्यायलय में आरोपी अभिनंदन की जमानत खारिज करने की गुहार लगाई थी। जमानत खारिज न होने पर पीड़ित ने सुप्रीम कोर्ट में रिट भी दाखिल कर दी थी। पीड़ितों की याचिका खारिज करते हुए उस समय सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को जमानत दिए जाने के सत्र न्यायालय के निर्णण को उचित ठहराया था। जिसके बाद जिला जज के यहां मामले की सुनवाई फिर शुरू हो गई। इस दौरान भी इस मुकदमे में तमाम पेंच आते रहे। मृतक नरेंद्र की पत्नी ममता व उसके पड़ोसी राहुल ने न्यायालय में अपने बयान दर्ज करा आरोपी को सजा दिलाने में सहयोग किया। इस मामले में तीन माह पूर्व ही न्यायालय से फैसला आना था, लेकिन इसी दौरान आरोपी के पिता डॉक्टर सुभाष त्रिपाठी की मौत हो गई थी। जिससे फैसले की तारीखआगे बढ़ गई । एक माह बाद ही आरोपी के छोटे भाई दीपक की भी बीमारी से मौत हो गई। जिससे फैसले की तारीख बढ़ती रही। आखिरकार चार जून सोमवार को न्यायालय का फैसला पीड़ित के पक्ष में आ गया।
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इन्सेट-
फैसले से खुश दिखे मृतक की पत्नी और भाई
औरैया। मृतक की पत्नी मामता व उसके बड़े भाई सतेंद्र कुमार ने मीडिया को बताया कि वह फैसले से खुश हैं। उन्हें न्याय मिल गया है। उन्होने बताया कि चंद रुपयों के खातिर उसके भाई की लाईसेन्सी रिवाल्वर से विश्वास में लेकर साजिश कर उसकी हत्या की थी।
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