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आत्महत्या के लिए मजबूर करने पर सात साल कैद

Fri, 17 Jun 2016 11:54 PM IST
Auraiya, Uttar pradesh, India
Auraiya, Uttar pradesh, India Updated Fri, 17 Jun 2016 11:54 PM IST
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Forced to commit suicide seven years imprisonment
चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय - फोटो : file photo
इंजीनियर मनोज गुप्ता हत्याकांड में पूर्व विधायक शेखर तिवारी के साथ उम्रकैद की सजा काट रहे विनय त्रिपाठी को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश अंगद प्रसाद ने सात साल की सजा सुनाई है। साथ ही 25 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है।
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मामले में वादिनी पंकज गुप्ता उर्फ पूनम गुप्ता पत्नी स्व.दीपक गुप्ता ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार उसके पति दीपक ने विनय त्रिपाठी के मकान पर दुकान लेकर जीवन बीमा कार्यालय खोला था। उसके पति ने रिश्तेदारों से कर्ज लेकर व्यवसाय शुरू किया था। कुछ दिनों बाद विनय त्रिपाठी भी उसी व्यवसाय में शामिल हो गया। उसके बाद विनय त्रिपाठी ने उसके पति को बरगला कर उसका सारा जेवर गिरवी रखवा दिया। विनय ने उसके पति को कर्जदार बना दिया। बाद में धमकी देने लगा कि वह दिबियापुर छोड़कर चला जाए वरना मार देंगे। 26 मई 2008 को विनय ने घर आकर हाथापाई भी की। रोज-रोज की बदनामी से तंग आकर उसके पति दीपक गुप्ता ने 26 मई 2008 को जहर खा लिया। उपचार के दौरान कानपुर में उनकी मौत हो गई।
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मृतक के जेब से एक सुसाइड नोट मिला जिसमें दीपक ने विनय त्रिपाठी द्वारा उत्पन्न की गई स्थितियों में आत्महत्या करने की बात लिखी थी। इस मामले में विवेचक ने पहले एफआर प्रस्तुत की। कोर्ट के आदेश पर अग्रिम विवेचना में 9 मई 2009 को आरोप पत्र कोर्ट में प्रस्तुत हुआ। यह मुकदमा सत्र न्यायाधीश अंगद प्रसाद की कोर्ट में चला। अभियोजन की ओर से एसपीओ दिनेश कुमार मिश्रा व एडीजीसी संजय श्रीवास्तव व बचाव पक्ष को सुनने के बाद न्यायालय ने विनय त्रिपाठी को धारा 306 के लिए दोषी माना। न्यायालय ने विनय त्रिपाठी को सात साल की कैद व 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न जमा करने पर छह माह अतिरिक्त जेल में रहना पड़ेगा। एडीजे अंगद प्रसाद ने वसूले गए अर्थदंड की 80 फीसद धनराशि मृतक दीपक गुप्ता की पत्नी को अदा करने का आदेश दिया। आजीवन कारावास की सजा काट रहे विनय त्रिपाठी को निर्णय के समय जिला कारागार से औरैया न्यायालय लाया गया था।
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