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किसान जिंदा जला
औरैया
Updated Sat, 17 Dec 2016 12:17 AM IST
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किसान की मौत से रोते बिलखते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
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सदर कोतवाली क्षेत्र के कखावतू गांव में गुरुवार की रात अलाव की चिंगारी से झोपड़ी में आग लग गई। आग की चपेट में आकर वृद्घ कि सान जिंदा जल गया। झोपड़ी में बंधी आठ बकरियां भी जल गईं। गांव के लोगों ने करीब डेढ़ घंटे में आग पर काबू पाया। सूचना पर पहुंचे एसडीएम सदर व लेखपाल ने मामले की जानकारी की।
कखावतू गांव में गुरुवार की रात घर के पास बनी झोपड़ी में किसान रामऔतार (55) पुत्र गोकुल सर्दी से बचने के लिए अलाव जलाकर सो रहे थे। पास ही आठ बकरियां बंधी थीं। रात लगभग एक बजे बकरियाें के पैर छटपटाने से अलाव की चिंगारी झोपड़ी के छप्पर पर पहुंच गई। इससे छप्पर में आग लग गई। झोपड़ी के पास बने घर में रह रहे ग्रामीण हरीबाबू तिवारी ने बताया कि रात लगभग एक बजे बकरियों के जोर-जोर से चिल्लाने की आवाज सुनकर नींद टूट गई। छत की तरफ नजर गई तो आग की लपटें उठ रही थीं। बाहर निकलकर देखा तो झोपड़ी आग से घिरी थी। झोपड़ी के चारों तरफ कर्बी के दो सौ गट्ठर रखे थे। इससे झोपड़ी में आने जाने की जगह बेहद कम थी।
शोरगुल सुनकर मोहल्ले के लोग उठ गए। सबमर्सिबल चलाकर आग पर पानी डाला जाने लगा। लगभग डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग को बुझाया जा सका। इस बीच झोपड़ी में सो रहे रामऔतार का शरीर पूरी तरह से जल चुका था। पास ही आठ बकरियां मरी पड़ी थीं। रामऔतार की मौत से परिवार के लोगों का रो-रो कर बुरा हाल था।
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कखावतू गांव में गुरुवार की रात घर के पास बनी झोपड़ी में किसान रामऔतार (55) पुत्र गोकुल सर्दी से बचने के लिए अलाव जलाकर सो रहे थे। पास ही आठ बकरियां बंधी थीं। रात लगभग एक बजे बकरियाें के पैर छटपटाने से अलाव की चिंगारी झोपड़ी के छप्पर पर पहुंच गई। इससे छप्पर में आग लग गई। झोपड़ी के पास बने घर में रह रहे ग्रामीण हरीबाबू तिवारी ने बताया कि रात लगभग एक बजे बकरियों के जोर-जोर से चिल्लाने की आवाज सुनकर नींद टूट गई। छत की तरफ नजर गई तो आग की लपटें उठ रही थीं। बाहर निकलकर देखा तो झोपड़ी आग से घिरी थी। झोपड़ी के चारों तरफ कर्बी के दो सौ गट्ठर रखे थे। इससे झोपड़ी में आने जाने की जगह बेहद कम थी।
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शोरगुल सुनकर मोहल्ले के लोग उठ गए। सबमर्सिबल चलाकर आग पर पानी डाला जाने लगा। लगभग डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग को बुझाया जा सका। इस बीच झोपड़ी में सो रहे रामऔतार का शरीर पूरी तरह से जल चुका था। पास ही आठ बकरियां मरी पड़ी थीं। रामऔतार की मौत से परिवार के लोगों का रो-रो कर बुरा हाल था।
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