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अन्ना जानवरों से फसल नुकसान को भी माना जाए दैवी आपदा
Updated Sun, 09 Dec 2018 11:53 PM IST
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जालौन। अन्ना पशुओं से फसल के नुकसान पर दैवी आपदा की भांति मुआवजा देने, फसल के नुकसान पर सदमा से या आत्महत्या करने वाले किसानों के परिजनों को 25 लाख का मुआवजा देने की मांग को लेकर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीराम पाल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा।
पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीराम पाल ने प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र भेजा कि विगत दो दशकों से किसान दैवी आपदा के चलते नुकसान सह रहे हैं। जिससे वह भुखमरी अथवा आत्महत्या को मजबूर हैं। इसके बाद जब प्रकृति का संतुलन ठीक होने के चलते जब भी किसानों को फसल से लाभ मिलने की उम्मीद जगी तो अन्ना पशु समस्या विकराल रूप धारण कर उनके सामने आ खड़ी हुई है।
पूर्व की सरकारों में जो पशु खेती करने लायक अथवा दूध देने लायक नहीं होते थे। ऐसे निष्प्रयोज्य पशुओं का निस्तारण पूर्ववत चल रहा था। लेकिन वर्तमान सरकार में निस्तारण पर रोक लगाए जाने के चलते निष्प्रयोज्य पशुओं की संख्या में बढ़ोतरी हो गई है।
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अन्ना प्रथा की समस्या ने दैवी आपदा जैसी स्थिति उत्पन्न कर दी है। इस समस्या से निपटने के लिए या तो सरकार गोवंश संरक्षण नीति में बदलाव करे या फिर फसलों को अन्ना पशुओं से हो रहे नुकसान को दैवी आपदा की भांति मुआवजा दिलाया जाए। मांग की कि फसल नष्ट होने से सदमे या आत्महत्या से मरने वाले किसानों के परिवारों को 25 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।
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पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीराम पाल ने प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र भेजा कि विगत दो दशकों से किसान दैवी आपदा के चलते नुकसान सह रहे हैं। जिससे वह भुखमरी अथवा आत्महत्या को मजबूर हैं। इसके बाद जब प्रकृति का संतुलन ठीक होने के चलते जब भी किसानों को फसल से लाभ मिलने की उम्मीद जगी तो अन्ना पशु समस्या विकराल रूप धारण कर उनके सामने आ खड़ी हुई है।
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पूर्व की सरकारों में जो पशु खेती करने लायक अथवा दूध देने लायक नहीं होते थे। ऐसे निष्प्रयोज्य पशुओं का निस्तारण पूर्ववत चल रहा था। लेकिन वर्तमान सरकार में निस्तारण पर रोक लगाए जाने के चलते निष्प्रयोज्य पशुओं की संख्या में बढ़ोतरी हो गई है।
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अन्ना प्रथा की समस्या ने दैवी आपदा जैसी स्थिति उत्पन्न कर दी है। इस समस्या से निपटने के लिए या तो सरकार गोवंश संरक्षण नीति में बदलाव करे या फिर फसलों को अन्ना पशुओं से हो रहे नुकसान को दैवी आपदा की भांति मुआवजा दिलाया जाए। मांग की कि फसल नष्ट होने से सदमे या आत्महत्या से मरने वाले किसानों के परिवारों को 25 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।