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वेरीफिकेशन होने पर रिहाई के लिए रिमांड मजिस्ट्रेट को अधिकार दिए गए
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औरैया। लॉकडाउन के चलते जिले के सभी न्यायालय अनिश्चित काल के लिए बंद चल रहे हैं। लेकिन न्यायिक प्रक्रिया बाधित न हो, इसके लिए प्रभारी जिला जज राजेश चौधरी द्वारा आवश्यक आदेश पारित किया गया है। इसके चलते विभिन्न न्यायालयों में लॉकडाउन के दौरान पड़ने वाली तिथियों को 16 अप्रैल के बाद की तिथियां तय कर दी गईं हैं।
विभिन्न न्यायालयों में लंबित जमानत प्रार्थना पत्रों को न्यायालय खुलने की तिथि को संबंधित पीठासीन अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। जिला एवं सत्र न्यायालय, अपर जिला जज व परिवार न्यायालयों की 30 मार्च से लॉक डाउन तक की तिथियों में सामान्य तिथि 16 अप्रैल व बाद की निश्चित की गई है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट व सभी मजिस्ट्रेट व अन्य न्यायालयों की सामान्य तिथि 15 मई के बाद की तय की गई है।
कचहरी बंद रहने के बावजूद गिरफ्तार होकर आने वाले रिमांड मजिस्ट्रेट उपलब्ध रहता है। प्रभारी जिला जज ने बताया कि अगर किसी व्यक्ति की जमानत कोर्ट द्वारा स्वीकृत की जा चुकी है, लेकिन जमानतदारों के वेरीफिकेशन के कारण विचाराधीन बंदी जेल में निरुद्ध हैं तो वेरीफिकेशन कोर्ट में आने के बाद संबंधित कोर्ट का लिपिक रिमांड मजिस्ट्रेट के सामने सत्यापन कागजात प्रस्तुत कर रिहाई का आदेश जारी किया जा सकता है। अधिवक्ता शिवम शर्मा ने बताया कि जिन मामलों में उच्च न्यायालय व उच्चतम न्यायालय की समय सीमा समाप्त हो रही है, वह न्यायालय खुलने तक अपने आप बढ़ी हुई समझी जाएगी।
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विभिन्न न्यायालयों में लंबित जमानत प्रार्थना पत्रों को न्यायालय खुलने की तिथि को संबंधित पीठासीन अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। जिला एवं सत्र न्यायालय, अपर जिला जज व परिवार न्यायालयों की 30 मार्च से लॉक डाउन तक की तिथियों में सामान्य तिथि 16 अप्रैल व बाद की निश्चित की गई है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट व सभी मजिस्ट्रेट व अन्य न्यायालयों की सामान्य तिथि 15 मई के बाद की तय की गई है।
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कचहरी बंद रहने के बावजूद गिरफ्तार होकर आने वाले रिमांड मजिस्ट्रेट उपलब्ध रहता है। प्रभारी जिला जज ने बताया कि अगर किसी व्यक्ति की जमानत कोर्ट द्वारा स्वीकृत की जा चुकी है, लेकिन जमानतदारों के वेरीफिकेशन के कारण विचाराधीन बंदी जेल में निरुद्ध हैं तो वेरीफिकेशन कोर्ट में आने के बाद संबंधित कोर्ट का लिपिक रिमांड मजिस्ट्रेट के सामने सत्यापन कागजात प्रस्तुत कर रिहाई का आदेश जारी किया जा सकता है। अधिवक्ता शिवम शर्मा ने बताया कि जिन मामलों में उच्च न्यायालय व उच्चतम न्यायालय की समय सीमा समाप्त हो रही है, वह न्यायालय खुलने तक अपने आप बढ़ी हुई समझी जाएगी।
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