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संक्रमितों में तेजी से बढ़ रही बच्चों की संख्या
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औरैया। अब कोरोना तेजी से बच्चों को अपनी चपेट में ले रहा है। संक्रमित मरीजों के आंकड़ों को देखें तो हर दूसरे दिन दो से तीन संक्रमित बच्चे पाए जा रहे हैं।
रविवार की शाम तक जिले में कुल संक्रमित मरीजों की संख्या 1722 हो गई थी। सितंबर माह में संक्रमितों की संख्या में इजाफा हुआ है। औसतन हर रोज 40 मरीज संक्रमित पाए जा रहे हैं। संक्रमित मरीजों में एक से 10 साल तक की उम्र के 126 बच्चे हैं। संक्रमित बच्चों की संख्या जुलाई माह से बढ़नी शुरू हुई। सितंबर माह में और तेजी आई।
हर रोज दो से तीन बच्चे संक्रमित निकल रहे हैं। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि पहले लोग बच्चों की जांच नहीं कराते थे। इस समय संक्रमित मरीजों के घरों में मौजूद बच्चों का भी परीक्षण कराया जा रहा है। हालांकि होम आइसोलेशन में रहकर संक्रमित बच्चे भी स्वस्थ्य हो रहे हैं। डॉ. विशाल अग्निहोत्री ने बताया कि बच्चों में लक्षण प्रकट नहीं होते हैं। जिस परिवार में लोग संक्रमित हैं वह परिवार बच्चों का भी परीक्षण जरूर कराएं। सीएमओ डॉ.अर्चना श्रीवास्तव ने बताया कि संक्रमित मरीजों में अब बच्चों की संख्या बढ़ रही है। बच्चों के प्रति सभी अभिभावकों को जागरूक होना होगा। बच्चों में लक्षण प्रकट न होने के चलते उन पर ध्यान देने में अक्सर लोग लापरवाही बरत रहे हैं।
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रविवार की शाम तक जिले में कुल संक्रमित मरीजों की संख्या 1722 हो गई थी। सितंबर माह में संक्रमितों की संख्या में इजाफा हुआ है। औसतन हर रोज 40 मरीज संक्रमित पाए जा रहे हैं। संक्रमित मरीजों में एक से 10 साल तक की उम्र के 126 बच्चे हैं। संक्रमित बच्चों की संख्या जुलाई माह से बढ़नी शुरू हुई। सितंबर माह में और तेजी आई।
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हर रोज दो से तीन बच्चे संक्रमित निकल रहे हैं। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि पहले लोग बच्चों की जांच नहीं कराते थे। इस समय संक्रमित मरीजों के घरों में मौजूद बच्चों का भी परीक्षण कराया जा रहा है। हालांकि होम आइसोलेशन में रहकर संक्रमित बच्चे भी स्वस्थ्य हो रहे हैं। डॉ. विशाल अग्निहोत्री ने बताया कि बच्चों में लक्षण प्रकट नहीं होते हैं। जिस परिवार में लोग संक्रमित हैं वह परिवार बच्चों का भी परीक्षण जरूर कराएं। सीएमओ डॉ.अर्चना श्रीवास्तव ने बताया कि संक्रमित मरीजों में अब बच्चों की संख्या बढ़ रही है। बच्चों के प्रति सभी अभिभावकों को जागरूक होना होगा। बच्चों में लक्षण प्रकट न होने के चलते उन पर ध्यान देने में अक्सर लोग लापरवाही बरत रहे हैं।
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