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सालों से आवास की आस, हो रहे निराश
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बिधूना (औरैया)। प्रदेश सरकार गरीब परिवारों के लिए तमाम योजनाएं चला रही है, लेकिन आज भी कई गांव व मजरे ऐसे हैं। जिन्हें योजनाओं का लाभ नहीं मिला है। बिधूना ब्लाक के ग्राम पंचायत रुरुखुर्द के मजरा लक्षमनपुर में नाथ समुदाय (जोगी) के लोगों के 35-40 घर हैं। इनमें अधिकांश परिवारों को आवास योजना का लाभ वर्षों गुजर जाने के बाद भी नहीं मिल सका है।
जबकि गांव के लोगों के पास आधार कार्ड, राशन कार्ड व अन्य जरूरी कागजात हैं। गांव के लोगों ने आवेदन भी किए, लेकिन अफसरों ने इनकी पीड़ा नहीं देखी। हालात यह है कि गरीब परिवार गुजर बसर करने के लिए कच्ची दीवारें खड़ी कर उन पर झोपड़ी व पन्नी डालकर रहने को मजबूर है।
लक्षमनपुर के महराज नाथ ने बताया कि आवास की आस में वर्षों गुजर गए हैं। मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए कई बार आवेदन किया। लेकिन आज तक किसी ने ध्यान नहीं दिया। राशन कार्ड भी नहीं है। समस्या जानने की किसी अधिकारी ने कोशिश नहीं की। बारिश और ठंड के दिनों में परिवार को परेशानी उठानी पड़ती है।
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राजेशनाथ ने बताया कि गांव में रहते हुए 40 वर्ष बीत गए। झोपड़ी डालकर गुजर बसर कर रहे हैं। परिवार का आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र बना है। पंचायत चुनाव से लेकर विधानसभा व लोकसभा चुनाव में जनप्रतिनिधि भी चुनते हैं, लेकिन सुविधाएं नहीं मिल रही है। आवास का लाभ न मिलने से खुले आसमान में झोपड़ी डालकर रह रहे हैं।
गांव के उमाशंकर ने बताया कि आवास के लिए कई बार प्रधान से लेकर ब्लाक अधिकारियों से गुहार लगाई है। लेकिन किसी से योजना का लाभ मिलने की उम्मीद नहीं जगी। मजबूरी में इस वर्ष उसने कच्ची दीवारों की मरम्मत कर नई पॉलिथीन डाल कर अपने कच्चे घर को नया कर दिया है। फिर भी पॉलिथीन से न ठंड जाती है और न ही सूरज की तपिश।
गांव की उर्मिला देवी और राखी देवी ने बताया कि आवास के कई बार आवेदन किए। जनप्रतिनिधियाें से लेकर अधिकारियों तक गुहार लगाई। मगर हर बार उन्हें जांच कराकर जल्द आवास देने का झूठा आश्वासन मिलता रहा है। वर्षों से इसी तरह आश्वासन पर जी रहे हैं। लेकिन आज तक आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका। कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
वर्जन
लक्षमनपुर गांव में इस वर्ष सात लोगों को आवास योजना का लाभ दिया गया है। कुछ लोगों के आवेदन प्राप्त हुए हैं, उन्हें भी प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत जल्द लाभ दिलाया जाएगा। - अनिल कुमार सिंह, सीडीओ
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जबकि गांव के लोगों के पास आधार कार्ड, राशन कार्ड व अन्य जरूरी कागजात हैं। गांव के लोगों ने आवेदन भी किए, लेकिन अफसरों ने इनकी पीड़ा नहीं देखी। हालात यह है कि गरीब परिवार गुजर बसर करने के लिए कच्ची दीवारें खड़ी कर उन पर झोपड़ी व पन्नी डालकर रहने को मजबूर है।
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लक्षमनपुर के महराज नाथ ने बताया कि आवास की आस में वर्षों गुजर गए हैं। मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए कई बार आवेदन किया। लेकिन आज तक किसी ने ध्यान नहीं दिया। राशन कार्ड भी नहीं है। समस्या जानने की किसी अधिकारी ने कोशिश नहीं की। बारिश और ठंड के दिनों में परिवार को परेशानी उठानी पड़ती है।
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राजेशनाथ ने बताया कि गांव में रहते हुए 40 वर्ष बीत गए। झोपड़ी डालकर गुजर बसर कर रहे हैं। परिवार का आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र बना है। पंचायत चुनाव से लेकर विधानसभा व लोकसभा चुनाव में जनप्रतिनिधि भी चुनते हैं, लेकिन सुविधाएं नहीं मिल रही है। आवास का लाभ न मिलने से खुले आसमान में झोपड़ी डालकर रह रहे हैं।
गांव के उमाशंकर ने बताया कि आवास के लिए कई बार प्रधान से लेकर ब्लाक अधिकारियों से गुहार लगाई है। लेकिन किसी से योजना का लाभ मिलने की उम्मीद नहीं जगी। मजबूरी में इस वर्ष उसने कच्ची दीवारों की मरम्मत कर नई पॉलिथीन डाल कर अपने कच्चे घर को नया कर दिया है। फिर भी पॉलिथीन से न ठंड जाती है और न ही सूरज की तपिश।
गांव की उर्मिला देवी और राखी देवी ने बताया कि आवास के कई बार आवेदन किए। जनप्रतिनिधियाें से लेकर अधिकारियों तक गुहार लगाई। मगर हर बार उन्हें जांच कराकर जल्द आवास देने का झूठा आश्वासन मिलता रहा है। वर्षों से इसी तरह आश्वासन पर जी रहे हैं। लेकिन आज तक आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका। कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
वर्जन
लक्षमनपुर गांव में इस वर्ष सात लोगों को आवास योजना का लाभ दिया गया है। कुछ लोगों के आवेदन प्राप्त हुए हैं, उन्हें भी प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत जल्द लाभ दिलाया जाएगा। - अनिल कुमार सिंह, सीडीओ