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Auraiya News: बीहड़ सफारी के साथ चंबल साहित्य महोत्सव का समापन

Mon, 19 Feb 2024 12:23 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया Updated Mon, 19 Feb 2024 12:23 AM IST
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Chambal Literature Festival concludes with rugged safari
औरैया। पचनद चंबल लिटरेरी फेस्टिवल (चंबल साहित्य महोत्सव) का रविवार को समापन हो गया। 16 फरवरी से शुरू हुआ चंबल साहित्य महोत्सव तीन दिन चला। कई राज्यों से आए कवियों, साहित्यकारों, लेखकों, फिल्मकारों, अभिनेताओं और पत्रकारों, सामाजिक चिंतकों ने चंबल की तासीर को समझने की कोशिश की। आखिरी दिन हेरिटेज वाक (बीहड़ सफारी) कर ऊबड़ खाबड़ घाटी में कई किलोमीटर पैदल सफर कर चंबल की नब्ज़ को टटोला।
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चंबल साहित्य महोत्सव का आयोजन चंबल संग्रहालय और द ऐंट्स का संयुक्त तत्वावधान में हुआ। महोत्सव में ''''चंबल के आज और कल पर चर्चा हुई। किताबों के स्टॉल लगाये गए. साहित्य में बीहड़ और बीहड़ में साहित्य को लेकर चर्चा हुई। कई महत्तवपूर्ण फिल्मों की स्क्रीनिंग और सांस्कृतिक संध्या के दौरान संगीत कार्यक्रम हुए। स्थानीय लोगों को चंबल से जुड़े दुर्लभ दस्तावेज और डॉक्यूमेंट्री फिल्में दिखाई गईं। हेरिटेज वाक भी हुई। मेहमानों ने चंबल को पीले सोने का देश बताया। बीहड़ सफारी का अद्भुत नजारा आखिरी दिन चंबल संग्रहालय पंचनद से चंबल आश्रम बिलौड तक बीहड़ सफारी का अद्भुत नजारा मेहमानों ने देखा। बीहड़ सफारी के रास्ते सिरहन पैदा करने वाले थे। बीहड़ सफारी के रास्ते में चंबल अंचल की प्राकृतिक संपदा से अवगत कराया गया।
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पर्यावरण के अनुकूल महोत्सव का मंच
चंबल साहित्य महोत्सव के संस्थापक दस्तावेजी लेखक डॉ. शाह आलम राणा ने बताया कि महोत्सव का मंच पर्यावरण के अनुकूल बनाया गया था। तीन दिवसीय चंबल साहित्य उत्सव को सफ ल बनाने में सौरभ अवस्थी, खालिद नाईक, अमित शर्मा, सूरज सिंह कुशवाहा, रुद्र प्रताप सिंह राठौर, अजय कुमार आदि का प्रमुख योगदान रहा।
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इस मौके पर लेखक, फिल्मकार विद्या भूषण रावत, वरिष्ठ लेखक डॉ. रणधीर सिंह रूहल, कवि-संस्कृतिकर्मी राम जनम सिंह, साहित्यकर्मी डॉ. भगवान सिंह निरंजन, वरिष्ठ पत्रकार-फोटोग्राफर अनिल सिंदूर, सरोकारी वकील सूरज रेखा त्रिपाठी, वरिष्ठ पत्रकार केपी सिंह, वरिष्ठ कवि विजय सिंह पाल, क्रांतिकारी वंशज अजय पांडेय आदि मौजूद रहे।
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ये अतिथि रहे मौजूद
चंबल साहित्य महोत्सव में लोग मौजूद रहे।
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