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10 घंटे कड़ी से कड़ी मिलाती रही पुलिस, क्रिएट किया सीन
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फोटो25एयूआरपी 28- घटना स्थल पर जांच करते आईजी जोन प्रशांत कुमार, एएसपी शिष्य पाल। संवाद
- फोटो : AURAIYA
औरैया। श्रीप्रकाश चंद्र महाविद्यालय के प्रबंधक, उनकी पत्नी और बेटे की गोली लगने से हुई मौत के मामले में पुलिस को काफी कवायद करनी पड़ रही है। सुबह सात से लेकर शाम चार बजे तक कई पहलुओं पर बारीकी से छानबीन की गई। घटना स्थल से कई साक्ष्य भी जुटाएं गए हैं। पुलिस जांच में परिवार में गृह कलह की बात उजागर हुई है पर घर में पांच फायर होने के बाद जानकारी न होने की बात गले से नीचे नहीं उतर रही है। इसको लेकर पुलिस ने परिवार के सभी सदस्यों के साथ मृतकों के मोबाइल कब्जे में लिए हैं।
पुलिस को मौके से मिले रिवाल्वर की छह गोलियों में से एक खोखा कमरे के बाहर पड़ा मिला, जबकि चार खोखे व एक जिंदा कारतूस रिवाल्वर में फंसे मिले। तीनों को जिस तरह से गोलियां लगी हैं, उसमें पुलिस उलझी है। हालांकि मौके पर पहुंचे सीओ सुरेंद्र नाथ यादव, एएसपी शिष्यपाल व आईजी, एडीजी ने घर पर मौजूद छोटे बेटे व भतीजे पूजन से गहनता से पूछताछ की है। पुलिस का मानना है कि देर शाम विवाद हुआ था। इसके बाद घटना को अंजाम दिया गया। पुलिस प्रथम दृष्टया आत्महत्या मान रही है।
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पांच गोलियां चलने पर नहीं हुई जानकारी
प्रबंधक के घर में पांच गोलियां चलने की आवाज किसी परिजन को न लगना पुलिस के लिए पहेली बनी हुई है। पुलिस ने परिवार के कई सदस्यों से अलग-अलग बयान लिए हैं। पुलिस को घटना से जुड़े कुछ ऐसे तथ्य मिले हैं जो गुत्थी को उलझा भी रहे हैं। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने घटना के कारणों को स्पष्ट नहीं किया है।
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खून, बाल व रिवाल्वर से जुटाए साक्ष्य
कानपुर से पहुंची फारेंसिक टीम ने घटना स्थल पर पड़े खून के साथ ही बेड से मिले कुछ बाल से नमूने लिए हैं। इसके साथ ही रिवाल्वर से अंगुलियों के निशान लिए हैं।
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सीन क्रिएट कर गुत्थी सुलझाने में लगी पुलिस
पांच गोलियां चलना, पड़ोस व परिजनों को किसी तरह की आहट न मिलने पर पुलिस ने देर शाम घटना स्थल पर सीन क्रिएट किया गया। इसमें पुलिस ने घटना स्थल वाले कमरो में मौरंग की बोरियां रखीं। इसके बाद उसमें एक के बाद पांच फायर कराए। वहीं चीखने और चिल्लाने की आवाज भी की गई। इस दौरान कुछ पुलिस कर्मी नीचे व पड़ोस में मौजूद रहे। पुलिस यह जानना चाहती थी कि फायरिंग व चीखने की आवाज कहा तक पहुंचती है। पुलिस के सीन क्रिएट में फायरिंग की हल्की आवाज सुनाई भी दी। जानकार पुलिस अधिकारियों का मानना है कि रात में यह आवाज और स्पष्ट सुनाई देती।
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नौ बजे तक चला था छठी कार्यक्रम
भतीजे पूजन ने बताया कि बुधवार को भगवान श्रीकृष्ण की छठी में परिवार के अलावा रिश्तेदार भी पहुंचते थे। पूरा परिवार ने हंसी खुशी छठी कार्यक्रम मनाया। इसके बाद खाना हुआ। रात नौ बजे तक सभी कार्यक्रम समाप्त होने के बाद हमलोग अपने-अपने कमरे में सोने चले गए। रात में किस समय यह घटना घटित हुई पता ही नहीं चला। घटना के बाद भतीजे पूजन ने कोतवाली पुलिस को तहरीर दी, जिसमें बताया कि चाचा संदीप परिवार समेत तीसरी मंजिल पर रहते हैं। 24/25 की रात चचेरा भाई नीचे पढ़ाई कर रहा था। मकान के मुख्य दरवाजे पर ताला लगा था। सुबह छह बजे जब चचेरा भाई कमरे में गया तो बड़े भाई शिवम पोरवाल पहले कमरे में बेड पर मृत अवस्था में मिला तथा दूसरे कमरे में चाचा संदीप व चाची मीरा मिले। चचेरे भाई ने बताया कि रात में पापा और भाई के बीच कहासुनी हो रही थी। पुलिस ने इस तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
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बड़े भाइयों ने नए मकान में किया था प्रवेश
संदीप भाइयों में सबसे छोटा था। सतीश चंद्र पोरवाल घर में सबसे बड़े हैं, जो भट्ठा का काम देखते हैं। उनके बाद प्रकाश चंद्र थे, जिनकी लगभग 20 साल पहले मौत हो चुकी है। उनका पुत्र पूजन संदीप के साथ पुराने घर में नीचे के हिस्से में परिवार समेत रहता है। जो सीएनजी पेट्रोल पंप का काम देखता है। उनके बाद तीसरे नंबर पर प्रदीप पोरवाल हैं जो मिठाई की दुकान देखते हैं। पूरा परिवार छह माह पहले इसी घर में रहता था। लगभग छह माह पहले ही सतीश चंद्र पोरवाल व प्रदीप पोरवाल तिलक नगर मोहल्ले में नये मकान में रहने चले गए।
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शिवम ने दो साल पहले की थी एनडीए की तैयारी
प्रबंधक का पुत्र शिवम फौज में नौकरी करना चाहता था। शिवम के छह साल पहले बेंगलुरु में किसी सेवानिवृत्त मेजर के दिशा-निर्देशन में दो साल तक एनडीए की तैयारी करने की भी चर्चा रही। हालांकि वह सफल नहीं हो सका था। यही नहीं पढ़ने में रुचि होने के चलते शिवम ने एमए, एमफिल, एमएड, पीएचडी किया हुआ था। वर्तमान में वह किसी विषय से तिलक महाविद्यालय से एमए की पढ़ाई कर रहा था।
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कुछ इस तरह चला घटनाक्रम
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6:00 बजे छोटा पुत्र ऊपर के कमरे में पहुंचा।
6:02 मिनट पर भतीजा पूजन भी ऊपर पहुंचा।
7:00 बजे सूचना पर कोतवाली पुलिस पहुंची।
7:20 बजे- सीओ सिटी सुरेंद्र नाथ पहुंचे।
7:45 बजे- एएसपी शिष्यपाल पहुंचे।
9:58 बजे- तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
11:00 बजे- आईजी प्रशांत कुमार पहुंचे।
11:50 बजे- एडीजी भानू भास्कर टीम के साथ पहुंचे।
12.30 बजे- कानपुर की फारेंसिक टीम पहुंची।
4:00 बजे- घटना स्थल पर सीएन क्रिएट हुआ।
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पुलिस को मौके से मिले रिवाल्वर की छह गोलियों में से एक खोखा कमरे के बाहर पड़ा मिला, जबकि चार खोखे व एक जिंदा कारतूस रिवाल्वर में फंसे मिले। तीनों को जिस तरह से गोलियां लगी हैं, उसमें पुलिस उलझी है। हालांकि मौके पर पहुंचे सीओ सुरेंद्र नाथ यादव, एएसपी शिष्यपाल व आईजी, एडीजी ने घर पर मौजूद छोटे बेटे व भतीजे पूजन से गहनता से पूछताछ की है। पुलिस का मानना है कि देर शाम विवाद हुआ था। इसके बाद घटना को अंजाम दिया गया। पुलिस प्रथम दृष्टया आत्महत्या मान रही है।
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पांच गोलियां चलने पर नहीं हुई जानकारी
प्रबंधक के घर में पांच गोलियां चलने की आवाज किसी परिजन को न लगना पुलिस के लिए पहेली बनी हुई है। पुलिस ने परिवार के कई सदस्यों से अलग-अलग बयान लिए हैं। पुलिस को घटना से जुड़े कुछ ऐसे तथ्य मिले हैं जो गुत्थी को उलझा भी रहे हैं। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने घटना के कारणों को स्पष्ट नहीं किया है।
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खून, बाल व रिवाल्वर से जुटाए साक्ष्य
कानपुर से पहुंची फारेंसिक टीम ने घटना स्थल पर पड़े खून के साथ ही बेड से मिले कुछ बाल से नमूने लिए हैं। इसके साथ ही रिवाल्वर से अंगुलियों के निशान लिए हैं।
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सीन क्रिएट कर गुत्थी सुलझाने में लगी पुलिस
पांच गोलियां चलना, पड़ोस व परिजनों को किसी तरह की आहट न मिलने पर पुलिस ने देर शाम घटना स्थल पर सीन क्रिएट किया गया। इसमें पुलिस ने घटना स्थल वाले कमरो में मौरंग की बोरियां रखीं। इसके बाद उसमें एक के बाद पांच फायर कराए। वहीं चीखने और चिल्लाने की आवाज भी की गई। इस दौरान कुछ पुलिस कर्मी नीचे व पड़ोस में मौजूद रहे। पुलिस यह जानना चाहती थी कि फायरिंग व चीखने की आवाज कहा तक पहुंचती है। पुलिस के सीन क्रिएट में फायरिंग की हल्की आवाज सुनाई भी दी। जानकार पुलिस अधिकारियों का मानना है कि रात में यह आवाज और स्पष्ट सुनाई देती।
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नौ बजे तक चला था छठी कार्यक्रम
भतीजे पूजन ने बताया कि बुधवार को भगवान श्रीकृष्ण की छठी में परिवार के अलावा रिश्तेदार भी पहुंचते थे। पूरा परिवार ने हंसी खुशी छठी कार्यक्रम मनाया। इसके बाद खाना हुआ। रात नौ बजे तक सभी कार्यक्रम समाप्त होने के बाद हमलोग अपने-अपने कमरे में सोने चले गए। रात में किस समय यह घटना घटित हुई पता ही नहीं चला। घटना के बाद भतीजे पूजन ने कोतवाली पुलिस को तहरीर दी, जिसमें बताया कि चाचा संदीप परिवार समेत तीसरी मंजिल पर रहते हैं। 24/25 की रात चचेरा भाई नीचे पढ़ाई कर रहा था। मकान के मुख्य दरवाजे पर ताला लगा था। सुबह छह बजे जब चचेरा भाई कमरे में गया तो बड़े भाई शिवम पोरवाल पहले कमरे में बेड पर मृत अवस्था में मिला तथा दूसरे कमरे में चाचा संदीप व चाची मीरा मिले। चचेरे भाई ने बताया कि रात में पापा और भाई के बीच कहासुनी हो रही थी। पुलिस ने इस तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
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बड़े भाइयों ने नए मकान में किया था प्रवेश
संदीप भाइयों में सबसे छोटा था। सतीश चंद्र पोरवाल घर में सबसे बड़े हैं, जो भट्ठा का काम देखते हैं। उनके बाद प्रकाश चंद्र थे, जिनकी लगभग 20 साल पहले मौत हो चुकी है। उनका पुत्र पूजन संदीप के साथ पुराने घर में नीचे के हिस्से में परिवार समेत रहता है। जो सीएनजी पेट्रोल पंप का काम देखता है। उनके बाद तीसरे नंबर पर प्रदीप पोरवाल हैं जो मिठाई की दुकान देखते हैं। पूरा परिवार छह माह पहले इसी घर में रहता था। लगभग छह माह पहले ही सतीश चंद्र पोरवाल व प्रदीप पोरवाल तिलक नगर मोहल्ले में नये मकान में रहने चले गए।
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शिवम ने दो साल पहले की थी एनडीए की तैयारी
प्रबंधक का पुत्र शिवम फौज में नौकरी करना चाहता था। शिवम के छह साल पहले बेंगलुरु में किसी सेवानिवृत्त मेजर के दिशा-निर्देशन में दो साल तक एनडीए की तैयारी करने की भी चर्चा रही। हालांकि वह सफल नहीं हो सका था। यही नहीं पढ़ने में रुचि होने के चलते शिवम ने एमए, एमफिल, एमएड, पीएचडी किया हुआ था। वर्तमान में वह किसी विषय से तिलक महाविद्यालय से एमए की पढ़ाई कर रहा था।
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कुछ इस तरह चला घटनाक्रम
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6:00 बजे छोटा पुत्र ऊपर के कमरे में पहुंचा।
6:02 मिनट पर भतीजा पूजन भी ऊपर पहुंचा।
7:00 बजे सूचना पर कोतवाली पुलिस पहुंची।
7:20 बजे- सीओ सिटी सुरेंद्र नाथ पहुंचे।
7:45 बजे- एएसपी शिष्यपाल पहुंचे।
9:58 बजे- तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
11:00 बजे- आईजी प्रशांत कुमार पहुंचे।
11:50 बजे- एडीजी भानू भास्कर टीम के साथ पहुंचे।
12.30 बजे- कानपुर की फारेंसिक टीम पहुंची।
4:00 बजे- घटना स्थल पर सीएन क्रिएट हुआ।