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दो मंत्रियों का वादे भी झूठे, बदहाल 60 लाख का बस स्टैंड
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बिधूना (औरैया)। परिवहन विभाग ने लाखों रुपये खर्च कर बिधूना में बस स्टैंड बनवाया। लेकिन इसके संचालन पर ग्रहण लगता जा रहा है। बसों के न ठहरने और स्टाफ की तैनाती न होने से क्षेत्रीय लोगों का सफर कठिनाइयों भरा हो गया है। स्थानीय लोगों में बस स्टैंड पर सभी रूटों पर बसों का संचालन करने और स्टाफ की तैनाती किए जाने की मांग की है।
2005 में 60 लाख रुपये की लागत से रोडवेज बस स्टैंड बनवाया गया। बसपा सरकार में इसका शुभारंभ तत्कालीन परिवहन मंत्री रामअचल राजभर ने किया। लोगों को उम्मीद जगी थी अब कस्बे से अन्य जगहों के लिए सफर आसान होगा। लेकिन बसों का संचालन आज तक नहीं हो सका। लोग लगातार मांग करते चले आए। 2018 में तत्कालीन परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने 25 जुलाई को एक बार फिर से इस बस स्टैंड का संचालन करा कुछ बसें कानपुर, आगरा के लिए चलवाई।
मंत्री ने भरोसा दिया था कि आगरा, मथुरा, झांसी, कानपुर, लखनऊ समेत कई शहरों के लिए बसों की संख्या बढ़ाई जाएगी। शुरूआत में कुछ रूटों पर बसें चलनी शुरू भी हुईं, लेकिन सवारियां कम मिलने और स्टाफ न होने से बंद हो गईं। आज स्थिति यह है कि इस रूट पर कानपुर के लिए एक और आगरा के लिए एक ही बस है। बस स्टैंड की स्थिति बदहाल होती जा रही है।
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स्टाफ की कमी से नहीं आती बसें
बस स्टैंड पर स्टाफ की कमी है। एक ही कर्मचारी तैनात है। वह भी नियमित नहीं आते हैं। इससे आगरा और कानपुर की बसें स्टैंड पर न आकर बाहर साइड से ही वापस चली जाती है। इससे यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
बस स्टेशन पर कर्मचारी की ड्यूटी लगाई गई है। लेकिन समय से ड्यूटी पर न पहुंचने की जांच की जाएगी। ड्यूटी को लेकर कर्मचारी को दो दिन पहले पत्र दिया जा चुका है। जल्द ही अन्य रूटों पर बसों की संख्या बढ़ाई जाएगी। - रामशंकर चौधरी, एआरएम।
नगर के संजय शुक्ला का कहना कि कानपुर, इटावा औरैया, आगरा, दिल्ली मार्ग पर बसें समय से चलने लगें तो व्यापारियों को काफी राहत मिलेगी। अभी आगरा और कानपुर जाने वाले व्यापारियों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।
कपड़ा व्यापारी अनूप गुप्ता ने बताया कि इस रूट पर कम बसें होने से क्षेत्र के व्यापारी निजी बसों का सहारा ले रहे है। जिससे यात्रा मंहगी पड़ रही है। साथ ही परेशानियां भी उठानी पड़ रही है। सरकार जल्द ही इस रूट पर बसे बढ़ाए।
अंकुर पोरवाल ने बताया कि दो-दो मंत्रियों ने इसका संचालन किया। बसे बढ़ाने के वादे किए, लेकिन समस्या जस की तस है। बिधूना से आगरा, दिल्ली और कानपुर के साथ झांसी के लिए अधिक सवारियां निकलती है। इससे बसें शुरू करना भी जरूरी है।
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2005 में 60 लाख रुपये की लागत से रोडवेज बस स्टैंड बनवाया गया। बसपा सरकार में इसका शुभारंभ तत्कालीन परिवहन मंत्री रामअचल राजभर ने किया। लोगों को उम्मीद जगी थी अब कस्बे से अन्य जगहों के लिए सफर आसान होगा। लेकिन बसों का संचालन आज तक नहीं हो सका। लोग लगातार मांग करते चले आए। 2018 में तत्कालीन परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने 25 जुलाई को एक बार फिर से इस बस स्टैंड का संचालन करा कुछ बसें कानपुर, आगरा के लिए चलवाई।
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मंत्री ने भरोसा दिया था कि आगरा, मथुरा, झांसी, कानपुर, लखनऊ समेत कई शहरों के लिए बसों की संख्या बढ़ाई जाएगी। शुरूआत में कुछ रूटों पर बसें चलनी शुरू भी हुईं, लेकिन सवारियां कम मिलने और स्टाफ न होने से बंद हो गईं। आज स्थिति यह है कि इस रूट पर कानपुर के लिए एक और आगरा के लिए एक ही बस है। बस स्टैंड की स्थिति बदहाल होती जा रही है।
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स्टाफ की कमी से नहीं आती बसें
बस स्टैंड पर स्टाफ की कमी है। एक ही कर्मचारी तैनात है। वह भी नियमित नहीं आते हैं। इससे आगरा और कानपुर की बसें स्टैंड पर न आकर बाहर साइड से ही वापस चली जाती है। इससे यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
बस स्टेशन पर कर्मचारी की ड्यूटी लगाई गई है। लेकिन समय से ड्यूटी पर न पहुंचने की जांच की जाएगी। ड्यूटी को लेकर कर्मचारी को दो दिन पहले पत्र दिया जा चुका है। जल्द ही अन्य रूटों पर बसों की संख्या बढ़ाई जाएगी। - रामशंकर चौधरी, एआरएम।
नगर के संजय शुक्ला का कहना कि कानपुर, इटावा औरैया, आगरा, दिल्ली मार्ग पर बसें समय से चलने लगें तो व्यापारियों को काफी राहत मिलेगी। अभी आगरा और कानपुर जाने वाले व्यापारियों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।
कपड़ा व्यापारी अनूप गुप्ता ने बताया कि इस रूट पर कम बसें होने से क्षेत्र के व्यापारी निजी बसों का सहारा ले रहे है। जिससे यात्रा मंहगी पड़ रही है। साथ ही परेशानियां भी उठानी पड़ रही है। सरकार जल्द ही इस रूट पर बसे बढ़ाए।
अंकुर पोरवाल ने बताया कि दो-दो मंत्रियों ने इसका संचालन किया। बसे बढ़ाने के वादे किए, लेकिन समस्या जस की तस है। बिधूना से आगरा, दिल्ली और कानपुर के साथ झांसी के लिए अधिक सवारियां निकलती है। इससे बसें शुरू करना भी जरूरी है।