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भरत जैसा भाई मिलना दुर्लभ
अमर उजाला ब्यूरो औरैया
Updated Wed, 25 Nov 2015 11:14 PM IST
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शहर के ब्रह्मनगर मोहल्ले में श्रीराम कथा ज्ञान यज्ञ के अंतिम दिन कथा मंडप में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा हुई। इस मौके पर आचार्य कालिकानंद जी ने भगवान राम के वनवास की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि भरत जैसा भाई मिलना आज के समाज में दुर्लभ है। इस मौके पर संगीतमयी कथा में वाद्ययंत्रों पर बजाए गए भक्ति गीतों पर श्रद्धालु जमकर थिरके।
आचार्य कालिकानंद जी ने बताया कि आज के जमाने की बड़ी विडंबना है। आज जब व्यक्ति कोई अच्छा काम करता है तो स्वयं की बड़ाई करता है और जब कुछ बुरा हो जाता है तो भगवान को कोसता है।
कहता है कि सब उसी ने बिगाड़ दिया। इस दौरान आचार्य जी ने भगवान राम के वनवास से लेकर रावण वध तक की पूरी कथा सुनाई। कहा कि रामायाण में भरत जैसा पात्र दूसरा कोई नहीं है। क्योंकि राम की अनुपस्थिति में उन्होंने उनकी चरण पादुका को ही अपना सब कुछ मानते हुए राज्य का भार संभाला। कथा के अंतिम दिन कथा मंडप में संगीतमयी प्रवचन सुनने को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा रही।
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आचार्य कालिकानंद जी ने बताया कि आज के जमाने की बड़ी विडंबना है। आज जब व्यक्ति कोई अच्छा काम करता है तो स्वयं की बड़ाई करता है और जब कुछ बुरा हो जाता है तो भगवान को कोसता है।
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कहता है कि सब उसी ने बिगाड़ दिया। इस दौरान आचार्य जी ने भगवान राम के वनवास से लेकर रावण वध तक की पूरी कथा सुनाई। कहा कि रामायाण में भरत जैसा पात्र दूसरा कोई नहीं है। क्योंकि राम की अनुपस्थिति में उन्होंने उनकी चरण पादुका को ही अपना सब कुछ मानते हुए राज्य का भार संभाला। कथा के अंतिम दिन कथा मंडप में संगीतमयी प्रवचन सुनने को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा रही।
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