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निर्मल मन जन सोई मोहि पावा
Auraiya, Uttar pradesh, India
Updated Sun, 03 Apr 2016 11:13 PM IST
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भक्तों को कथा का रसपान कराते आचार्य अवधेश
- फोटो : amar ujala beuro
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कस्बे के ग्राम आलमगीरपुर में शुरू हुई भागवत कथा में आचार्य अवधेश दीक्षित ने श्रद्धालुओं को प्रभू से मिलन के उपाय बताए। कहा कि निर्मल मन जन सोहि मोहि पावा...। कथा मंडप में भागवत कथा सुनने को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुट रही है।
प्रभू और भक्त मिलन के संदर्भ में कथा सुनाते हुए आचार्य अवधेश दीक्षित ने कहा कि प्रभू को वही मनुष्य प्राप्त कर सकता है जो निर्मल मन और सच्चे प्रेम से याद करे। उसी को ही भगवान की कृपा मिल सकती है। कहा कि इसके लिए महत्वकांक्षाओं पर नियंत्रण रखना होगा। साथ ही भावपूर्ण धरातल पर बिना किसी आडंबर के पूजा पाठ करना मानसिक शांति प्रदान करता है। आचार्य अवधेश दीक्षित ने श्रद्धालुओं को बताया कि मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु ईष्या व दूसरों की आलोचना करना है। इससे बचना जरूरी है।
आचार्य ने कहा कि आध्यात्मिक अनुष्ठान से मन के विकारों को दूर करने में मदद मिलती है। इस दौरान आचार्य अवधेश दीक्षित ने श्रद्धालुओं को जड़ भरत की कथा का रसपान कराया। इस अवसर पर संगीतमयी कथा सुनने को कथा मंडप में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा रही। इससे पूर्व चेयरमेैन प्रतिनिधि अजब सिंह राजपूत, आलोक कुमार के अलावा एसडीएम सदर जितेंद्र श्रीवास्तव ने व्यास पीठ की आरती उतारकर पूजा अर्चना की।
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प्रभू और भक्त मिलन के संदर्भ में कथा सुनाते हुए आचार्य अवधेश दीक्षित ने कहा कि प्रभू को वही मनुष्य प्राप्त कर सकता है जो निर्मल मन और सच्चे प्रेम से याद करे। उसी को ही भगवान की कृपा मिल सकती है। कहा कि इसके लिए महत्वकांक्षाओं पर नियंत्रण रखना होगा। साथ ही भावपूर्ण धरातल पर बिना किसी आडंबर के पूजा पाठ करना मानसिक शांति प्रदान करता है। आचार्य अवधेश दीक्षित ने श्रद्धालुओं को बताया कि मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु ईष्या व दूसरों की आलोचना करना है। इससे बचना जरूरी है।
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आचार्य ने कहा कि आध्यात्मिक अनुष्ठान से मन के विकारों को दूर करने में मदद मिलती है। इस दौरान आचार्य अवधेश दीक्षित ने श्रद्धालुओं को जड़ भरत की कथा का रसपान कराया। इस अवसर पर संगीतमयी कथा सुनने को कथा मंडप में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा रही। इससे पूर्व चेयरमेैन प्रतिनिधि अजब सिंह राजपूत, आलोक कुमार के अलावा एसडीएम सदर जितेंद्र श्रीवास्तव ने व्यास पीठ की आरती उतारकर पूजा अर्चना की।
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