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नौ साल से नहीं मिला ब्लड बैंक का लाभ

Tue, 14 Jun 2022 12:21 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 14 Jun 2022 12:21 AM IST
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Benefit of blood bank not received for nine years
ब्लड बैंक में लगा ताला। संवाद - फोटो : AURAIYA
औरैया। इटावा से हटकर औरैया को जिला बने हुए करीब 25 साल हो चुके हैं। इन सालों में यहां पर दो संयुक्त जिला अस्पताल बने, पर 16 लाख से अधिक आबादी वाले इस जिले को अभी तक ब्लड बैंक की सुविधा नहीं मिल सकी है। जबकि नौ साल पहले 50 शैया संयुक्त चिकित्सालय में ब्लड बैंक स्थापित की गई थी।
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शहर के 50 शैया चिकित्सालय में ब्लड बैंक की स्थापना 2013 में हुई थी। तब से लेकर आज तक इसे चालू नहीं किया गया है। 2013 में लैब टेक्नीशियन डॉ. सुधीर थे, उनका स्थानांतरण होने के बाद से यहां पर ताला लगा है और ब्लड बैंक संचालन के लिए लगी मशीन धूल फांक रही है। सीएमओ डॉ. अर्चना श्रीवास्तव व 50 शैया अस्पताल के सीएमएस डॉ. राजेश मोहन गुप्ता ने ब्लड बैंक चालू कराने के लिए उच्चाधिकारियों से कई बार पत्राचार भी किया, इसके बावजूद अभी तक संचालन नहीं हो सका है।
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ऐसे में जरूरतमंदों को ब्लड की जरूरत पड़ने पर इटावा, कन्नौज, कानपुर देहात, कानपुर नगर, आगरा व मैनपुरी समेत अन्य जिलों की ओर दौड़ लगानी पड़ती है। इससे कई बार गंभीर मरीजों की समय पर रक्त नहीं मिलने से जान भी चली जाती है। अधिकारियों के पत्राचार के बाद यहां पर फरवरी माह में ब्लड बैंक के संचालन के लिए पैथोलॉजिस्ट डॉ. श्वेता डंडेलिया की तैनाती जरूर कर दी गई। मगर संचालन को लेकर किए गए प्रयास असफल रहे। अब जून माह के अंत में संचालन होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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सीएमओ डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने कहा कि ब्लड बैंक के संचालन के लिए लगातार प्रयास जारी हैं। पैथोलॉजिस्ट की तैनाती हो गई है। स्थायी लैब टेक्नीशियन न मिल पाने के कारण लाइसेंस की प्रक्रिया रुकी पड़ी है। महानिदेशक ने फिलहाल संविदा पर एलटी रखने के निर्देश दिए हैं। जून के अंत तक संविदा पर तैनाती कर ब्लड बैंक संचालित किया जाएगा।

एक यूनिट ब्लड से बचती तीन मरीजों की जान
स्वास्थ्य अधिकारियों की मानें तो ब्लड बैंक यूनिट तब पूर्ण होती है, जब वहां पर ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट (रक्त पृथक्करण इकाई) पूरी तरह से संचालित हो। एक यूनिट खून से तीन मरीज की जान बचाई जा सकती है। खून से लाल रक्त कर्णिका, प्लाज्मा व प्लेटलेट्स को अलग किया जाता है। कुछ मरीजों को सिर्फ खून की जरूरत होती है उन्हें लाल रक्त कर्णिका का खून चढ़ाया जाता है। कुछ को सिर्फ प्लेटलेट्स की ही जरूरत होती है। बर्न आदि के मरीजों को प्लाज्मा की जरूरत होती है। इस तरह से एक यूनिट ब्लड से अलग-अलग तीन मरीजों की आवश्यकता पूरी होती है।
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