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पहली बार हरचंदपुर में प्रधानी होगी पिछड़े वर्ग की

Wed, 03 Mar 2021 11:44 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 03 Mar 2021 11:44 PM IST
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backward seat in harchandpur
दिबियापुर (औरैया)। जिले की बड़ी पंचायतों में शुमार हरचंदपुर में पहली बार प्रधानी की सीट पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित हुई है। अछल्दा ब्लॉक की हरचंदपुर ग्राम सभा में प्रधान पद के लिए पिछड़ी जाति के लगभग तीन दर्जन से अधिक दावेदार सक्रिय हैं।
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स्थानीय लोगों के अनुसार 18 मजरों वाली जिले की बड़ी ग्राम पंचायतों में शुमार हरचंदपुर की आबादी वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 11677 है। यहां कई बार सामान्य और सामान्य महिला के लिए प्रधान की सीट रही। 1995 में एक बार अनुसूचित जाति के लिए सीट आरक्षित हुई। यहां पर पूर्व प्रधान हरिनारायण सिंह व उनकी पत्नी शैलेश कुमारी सात बार प्रधान रहे। पिछली बार यहां सामान्य महिला सीट आरक्षित होने के कारण साधना दुबे प्रधान थीं। इस बार ओबीसी के लिए सीट आरक्षित होने के कारण इस वर्ग के दावेदारों में उत्साह है।
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पांचवीं बार प्रधानी का सपना रह गया अधूरा
दिबियापुर। प्रतिष्ठापूर्ण बैसुंधरा ग्राम पंचायत की सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने के कारण रनवीर सिंह का लगातार पांचवीं बार प्रधानी जीतने का सपना अधूरा रह गया। रनवीर सिंह के अनुसार वर्ष 2000 से दो बार वह व इसके बाद दो बार उनकी पत्नी सुषमा देवी गांव की प्रधान रहीं। वर्तमान में सीट एससी के लिए आरक्षित हो गई। गेल की आवासीय कालोनी गेल गांव भी इसी ग्राम पंचायत का हिस्सा होने के कारण ये ग्राम पंचायत काफी प्रतिष्ठापूर्ण मानी जाती है।
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सेहुद पहली बार एससी महिला के लिए आरक्षित
दिबियापुर (औरैया)। ब्लॉक भाग्यनगर की ग्राम पंचायत सेहुद में प्रधानी का सपना पाले सामान्य व पिछड़ी जाती के दावेदारों को जोर का झटका लगा है। यहां की प्रधानी की सीट अनुसूचित जाति महिला की घोषित हुई है। पूर्व प्रधान सुदेश राजपूत ने बताया कि ऐसा पहली बार हुआ है कि यहां की सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुई है। यहां पिछड़ी जाति वर्ग के 60 फीसदी से अधिक वोट हैं। यहां पर अधिकतर समय के लिए राजपूत जाति के लोग ही प्रधान रहे। तीन से चार बार हरिनारायण राजपूत, दो बार राजेंद्र राजपूत व एक बार राजेंद्र राजपूत की पत्नी प्रधान रहीं। गेल विहार की आवासीय कालोनी, बरमूपुर में प्रस्तावित राजकीय मेडिकल कॉलेज, सीएनजी पंप आदि इसी ग्राम सभा का हिस्सा होने के कारण सीट प्रतिष्ठापूर्ण मानी जा रही है।
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