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Auraiya News: संसाधन के अभाव में दम तोड़ रही है आयुर्वेद की चिकित्सा सुविधाएं
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औरैया। एलोपैथी का विकल्प बनने के लिए आयुष को बढ़ावा देने का दावा हकीकत में नहीं बदल रहा है। कम से कम औरैया जिले में आयुष विभाग की सच्चाई तो यही बयान कर रही है। न तो अस्पताल के इमारत उपलब्ध है, न ही इलाज के लिए मानक के मुताबिक चिकित्सक ही तैनात हैं। सहयोगी स्टाफ भी कम है। मरीजों को मिलने वाली सुविधा का अंदाजा ही लगाना मुश्किल नहीं है।
करीब 15 लाख की आबादी वाले औरैया जिले में आयुष चिकित्सा की सुविधा सिर्फ कहने भर को ही है। विभाग के दस्तावेजों में यहां आयुर्वेद के 21 और यूनानी चिकित्सा से जुड़े अस्पताल हैं। इन 23 अस्पतालों में सिर्फ 13 चिकित्सक तैनात हैं। आयुर्वेदिक और यूनानी पद्धति से इलाज करवाने की चाहत रखने वालों को तब मायूसी मिलती है, जब उन्हें इन अस्पतालों में जरूरी सुविधा नहीं मिल पाती है। कई अस्पताल बिना चिकित्सक के ही संचालित हैं। वहां आसपास के दूसरे अस्पताल के किसी चिकित्सक को अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। वह सप्ताह में एक या दो दिन उन अस्पताल में अपनी सेवा दे पाते हैं।
इनसेट-- --
किसी भी आयुष अस्पताल में पूरा नहीं है स्टाफ
आयुष चिकित्सा पद्धति के इन अस्पतालों की हकीकत का अंदाजा इसी से लग सकता है कि जिले के किसी भी अस्पताल में मानक के मुताबिक स्टाफ की तैनाती नहीं है। आयुष विभाग के मुताबिक ही एक राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में एक चिकित्सक, एक फार्मासिस्ट, एक वार्ड ब्वाय और एक सफाईकर्मी या चौकीदार की तैनाती होनी चाहिए। हकीकत यह है कि जिले के किसी भी राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में यह मानक पूरा नहीं है।
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इनसेट-- --
डॉक्टर ही मरीज देखें और वही बांटें दवा
अब एक और हकीकत को इस तरह समझें। राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में चिकित्सक के साथ ही फार्मासिस्ट की भी तैनाती होनी चाहिए। चिकित्सक का काम है मरीजों की जांच कर उन्हें दवाएं लिखना और फार्मासिस्ट का काम है चिकित्सक की लिखी दवाएं मरीजों को देना। अब विडंबना यह है कि जिले के 23 राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में सिर्फ दो ही फार्मासिस्ट की तैनाती है। 21 अस्पताल ऐसे हैं जहां फार्मासिस्ट न होने से वहां के चिकित्सक को ही मरीजों की जांच करने के बाद उनको लिखी दवा देना होता है।
इनसेट-- -
किराये के दो कमरों में चल रहा शहर का अस्पताल
ग्रामीण अंचलों में स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय की हकीकत का अंदाजा यहां शहर के अस्पताल को देखकर आसानी से लगाया जा सकता है। यहां कानपुर रोड के करीब मोहल्ला ब्रह्म नगर में संचालित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय सिर्फ दो कमरों में चल रहा है। एक कमरे में यहां चिकित्साधिकारी डॉ. शालिनी राजपूत मरीजों को देखती हैं। पास के ही कमरे में औषधि वितरण कक्ष बना है। वहां किसी की तैनाती नहीं है। इस अस्पताल में एक डॉक्टर और एक वार्ड ब्वाय की ही तैनाती है। पिछले सप्ताह संविदा के तहत एक चतुर्थ श्रेणी की तैनाती की गई है। यहां तैनात डॉ. शालिनी राजपूत बताती हैं कि जो सुविधा और संसाधन उपलब्ध हैं, उसी के तहत मरीजों की जांच कर दवाएं दी जाती हैं। किसी को वापस नहीं किया जाता है।
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इनसेट-- -
एक नजर में समझिए-- --
-21 आयुर्वेदिक चिकित्सालय
-02 यूनानी चिकित्सालय
-13 डॉक्टर ही हैं 23 अस्पताल में
-02 ही फार्मासिस्ट हैं 23 अस्पताल में
-05 वार्ड ब्वाय हैं 23 अस्पताल में
-05 सुपरवाइजर-चौकीदार हैं 23 अस्पताल में
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वर्जन--
जिले में अभी आयुर्वेद के पीएचसी स्तर के 23 अस्पताल संचालित हैं। कुछ जगहों पर स्टाफ की कमी है। पहले की तुलना में स्टाफ बढ़ा है। और बढ़ने की उम्मीद है। किराया के भवन में संचालित अस्पतालों के लिए अपने भवन की दिशा में कदम बढ़ा है। इसका सार्थक नतीजा दिखेगा।
- डॉ. आलोक सिंह, नोडल अफसर, आयुष विभाग
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करीब 15 लाख की आबादी वाले औरैया जिले में आयुष चिकित्सा की सुविधा सिर्फ कहने भर को ही है। विभाग के दस्तावेजों में यहां आयुर्वेद के 21 और यूनानी चिकित्सा से जुड़े अस्पताल हैं। इन 23 अस्पतालों में सिर्फ 13 चिकित्सक तैनात हैं। आयुर्वेदिक और यूनानी पद्धति से इलाज करवाने की चाहत रखने वालों को तब मायूसी मिलती है, जब उन्हें इन अस्पतालों में जरूरी सुविधा नहीं मिल पाती है। कई अस्पताल बिना चिकित्सक के ही संचालित हैं। वहां आसपास के दूसरे अस्पताल के किसी चिकित्सक को अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। वह सप्ताह में एक या दो दिन उन अस्पताल में अपनी सेवा दे पाते हैं।
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इनसेट
किसी भी आयुष अस्पताल में पूरा नहीं है स्टाफ
आयुष चिकित्सा पद्धति के इन अस्पतालों की हकीकत का अंदाजा इसी से लग सकता है कि जिले के किसी भी अस्पताल में मानक के मुताबिक स्टाफ की तैनाती नहीं है। आयुष विभाग के मुताबिक ही एक राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में एक चिकित्सक, एक फार्मासिस्ट, एक वार्ड ब्वाय और एक सफाईकर्मी या चौकीदार की तैनाती होनी चाहिए। हकीकत यह है कि जिले के किसी भी राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में यह मानक पूरा नहीं है।
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डॉक्टर ही मरीज देखें और वही बांटें दवा
अब एक और हकीकत को इस तरह समझें। राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में चिकित्सक के साथ ही फार्मासिस्ट की भी तैनाती होनी चाहिए। चिकित्सक का काम है मरीजों की जांच कर उन्हें दवाएं लिखना और फार्मासिस्ट का काम है चिकित्सक की लिखी दवाएं मरीजों को देना। अब विडंबना यह है कि जिले के 23 राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में सिर्फ दो ही फार्मासिस्ट की तैनाती है। 21 अस्पताल ऐसे हैं जहां फार्मासिस्ट न होने से वहां के चिकित्सक को ही मरीजों की जांच करने के बाद उनको लिखी दवा देना होता है।
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किराये के दो कमरों में चल रहा शहर का अस्पताल
ग्रामीण अंचलों में स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय की हकीकत का अंदाजा यहां शहर के अस्पताल को देखकर आसानी से लगाया जा सकता है। यहां कानपुर रोड के करीब मोहल्ला ब्रह्म नगर में संचालित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय सिर्फ दो कमरों में चल रहा है। एक कमरे में यहां चिकित्साधिकारी डॉ. शालिनी राजपूत मरीजों को देखती हैं। पास के ही कमरे में औषधि वितरण कक्ष बना है। वहां किसी की तैनाती नहीं है। इस अस्पताल में एक डॉक्टर और एक वार्ड ब्वाय की ही तैनाती है। पिछले सप्ताह संविदा के तहत एक चतुर्थ श्रेणी की तैनाती की गई है। यहां तैनात डॉ. शालिनी राजपूत बताती हैं कि जो सुविधा और संसाधन उपलब्ध हैं, उसी के तहत मरीजों की जांच कर दवाएं दी जाती हैं। किसी को वापस नहीं किया जाता है।
इनसेट
एक नजर में समझिए
-21 आयुर्वेदिक चिकित्सालय
-02 यूनानी चिकित्सालय
-13 डॉक्टर ही हैं 23 अस्पताल में
-02 ही फार्मासिस्ट हैं 23 अस्पताल में
-05 वार्ड ब्वाय हैं 23 अस्पताल में
-05 सुपरवाइजर-चौकीदार हैं 23 अस्पताल में
वर्जन
जिले में अभी आयुर्वेद के पीएचसी स्तर के 23 अस्पताल संचालित हैं। कुछ जगहों पर स्टाफ की कमी है। पहले की तुलना में स्टाफ बढ़ा है। और बढ़ने की उम्मीद है। किराया के भवन में संचालित अस्पतालों के लिए अपने भवन की दिशा में कदम बढ़ा है। इसका सार्थक नतीजा दिखेगा।
- डॉ. आलोक सिंह, नोडल अफसर, आयुष विभाग