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क्योंकि सास भी पहले बहू थी..
अमर उजाला ब्यूरो औरैया
Updated Sat, 30 Jan 2016 11:26 PM IST
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महोत्सव पंडाल में शनिवार को सीएमओ कार्यालय की ओर से में सास-बहू सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें सास बहू के रिश्तों में समरसता लाने पर जोर दिया गया।
उप्र राज्य महिला आयोग की सदस्य गीता गुप्ता ने सम्मेलन की शुरूआत की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि आज की सास कल की बहू थी, इस लिहाज से आज के दौर की सास बहुओं की भावनाओं की कद्र करें। वहीं बहुओं को भी संस्कारित रहते हुए अपनी सास में मां की सूरत देखने की जरूरत है। सास बहू के रिश्ते परिवार में मधुर होंगे तो अन्य सभी रिश्तों में भी मिठास होगी।
सीएमओ एसबी मिश्रा ने कहा कि मां के रूप में, बहन के रूप में, पत्नी के रूप में तथा बेटी के रूप में महिलाओं का त्याग, प्रेम अद्वितीय है। इस कारण भगवान के बाद महिलाएं समाज में सबसे अधिक पूज्यनीय व सम्मानीय हैं। हमारा उद्देश्य महिलाओं की समस्याओं के समाधान पर अधिक होना चाहिए।
एसीएमओ डा. विनोद सागर ने परिवार नियोजन अपनाने की अपील की। कहा कि बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करने का दायित्व हम सब पर है। छोटा परिवार सुखी परिवार का संदेश देते हुए उन्होेंने पहली संतान विवाह के तीन साल बाद तथा दूसरी संतान पहली संतान के दो साल बाद करने को प्रेरित किया।
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उन्होंने कहा कि इससे न केवल संतान और जननी का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा बल्कि एक मां के रूप में वह अपने बच्चे को उत्तम संस्कार भी दे सकेगी। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. अशोक कुमार ने जच्चा-बच्चा व गर्र्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर जानकारी परख सूचनाएं दी।
कहा कि जिले में संचालित मातृत्व सप्ताह के दौरान स्वास्थ्य केंद्रो पर आकर गर्भवती महिला और जच्चा-बच्चा अपने स्वास्थ्य का निशुल्क परीक्षण कराएं। इस मौके पर डीसीएमओ डा. जितेंद्र अग्रवाल, डा. आर.ए कटियार, डा. हरीश द्विवेदी सहित बड़ी संख्या में स्वास्थ्य कार्यकत्रियां मौजूद रहीं।
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उप्र राज्य महिला आयोग की सदस्य गीता गुप्ता ने सम्मेलन की शुरूआत की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि आज की सास कल की बहू थी, इस लिहाज से आज के दौर की सास बहुओं की भावनाओं की कद्र करें। वहीं बहुओं को भी संस्कारित रहते हुए अपनी सास में मां की सूरत देखने की जरूरत है। सास बहू के रिश्ते परिवार में मधुर होंगे तो अन्य सभी रिश्तों में भी मिठास होगी।
सीएमओ एसबी मिश्रा ने कहा कि मां के रूप में, बहन के रूप में, पत्नी के रूप में तथा बेटी के रूप में महिलाओं का त्याग, प्रेम अद्वितीय है। इस कारण भगवान के बाद महिलाएं समाज में सबसे अधिक पूज्यनीय व सम्मानीय हैं। हमारा उद्देश्य महिलाओं की समस्याओं के समाधान पर अधिक होना चाहिए।
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एसीएमओ डा. विनोद सागर ने परिवार नियोजन अपनाने की अपील की। कहा कि बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करने का दायित्व हम सब पर है। छोटा परिवार सुखी परिवार का संदेश देते हुए उन्होेंने पहली संतान विवाह के तीन साल बाद तथा दूसरी संतान पहली संतान के दो साल बाद करने को प्रेरित किया।
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उन्होंने कहा कि इससे न केवल संतान और जननी का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा बल्कि एक मां के रूप में वह अपने बच्चे को उत्तम संस्कार भी दे सकेगी। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. अशोक कुमार ने जच्चा-बच्चा व गर्र्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर जानकारी परख सूचनाएं दी।
कहा कि जिले में संचालित मातृत्व सप्ताह के दौरान स्वास्थ्य केंद्रो पर आकर गर्भवती महिला और जच्चा-बच्चा अपने स्वास्थ्य का निशुल्क परीक्षण कराएं। इस मौके पर डीसीएमओ डा. जितेंद्र अग्रवाल, डा. आर.ए कटियार, डा. हरीश द्विवेदी सहित बड़ी संख्या में स्वास्थ्य कार्यकत्रियां मौजूद रहीं।