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औरैया: मनीष कुमार ने कबाड़ से बना डाला बच्चों के लिए साइंस पार्क, खेल-खेल में सिखा रहे विज्ञान के सिद्धांत 

Sun, 22 Aug 2021 08:45 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरैया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरैया Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Sun, 22 Aug 2021 08:45 AM IST
सार

मनीष इन्वेस्ट योर वेस्ट, थीम पर रिसाइकिल, रिड्यूज व रीयूज के सिद्धांत पर काम कर रहे हैं। स्पार्क अगले चार महीनों में तैयार होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि औरैया रत्न में मिले 75 हजार रुपये भी इसी पार्क पर खर्च करेंगे।
 

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Auraiya's Manish Kumar made science park for children out of junk, teaching principles of science in sports
 लोहे के तारों से बने सौर्य मंडल के विभिन्न ग्रह - फोटो : amar ujala

विस्तार

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित यूपी के दो लोगों में से एक औरैया जिले के मनीष कुमार बच्चों को खेल-खेल में सिखाने के लिए घर में कबाड़ समझी जाने वाली चीजों से कम लागत में स्पार्क (साइंस पार्क) की स्थापना कर रहे हैं।
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इसके लिए मनीष इन्वेस्ट योर वेस्ट, थीम पर रिसाइकिल, रिड्यूज व रीयूज के सिद्धांत पर काम कर रहे हैं। स्पार्क अगले चार महीनों में तैयार होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि औरैया रत्न में मिले 75 हजार रुपये भी इसी पार्क पर खर्च करेंगे।
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मनीष का कहना है कि कानपुर मंडल में ऐसा कोई पार्क नहीं है, जहां बच्चे मस्ती के साथ लर्निंग भी कर सकें। इसलिए उन्होंने स्पार्क के बारे में सोचा। स्पार्क का मतलब चिंगारी होती है। एस और पार्क को अलग-अलग करेंगे तो साइंस पार्क होगा।
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उन्होंने डेढ़ साल पहले प्रशासन के साथ इस बारे में रणनीति बनाई लेकिन न तो जगह मिली और न ही बजट। इस पर सरकारी विभागों व घरों में मौजूद वेस्ट से पार्क बनाने की योजना बनाई। पूर्व माध्यमिक विद्यालय शिवगंज में रात में ही भरपूर बिजली आती है। इसलिए कोरोना की दूसरी लहर के दौरान रात में स्पार्क बनाने पर काम किया।

तारों से बने ग्लोब से सीखेंगे भौगोलिक विज्ञान
इन्वेस्ट योर वेस्ट थीम के तहत बिजली विभाग की मदद से 3 एमएम के अर्थिंग वायर से ढाई फीट का ग्लोब बनाया है। इससे बच्चे पृथ्वी का भौगोलिक अध्ययन कर सकेंगे। बीच मैदान में लगे बरगद को सूरज मानते हुए तार के जाल से बनाए आठ ग्रहों को इसके पास स्थापित किया है। इससे ग्रहों के तुलनात्मक अध्ययन में आसानी रहेगी।

टूटे पालने के फ्रेम को लाकर अलग-अलग लंबाई के पैंडुलम लगाए हैं। इससे बच्चों को आवर्तकाल का अध्ययन करने में आसानी होगी। मैदान में एक बड़े फ्रेम में बच्चों के लिए झूले लगाने हैं। इनकी लंबाई अलग-अलग होगी। द्रव्यमान केंद्र के सिद्धांत को समझाने के लिए हवा में झूलती बटरफ्लाई बनाएंगे। ऐसे भी झूले लगाने हैं जो दूध से क्रीम निकालने के सिद्धांत को समझाएंगे।
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