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आढ़तों पर गेहूं खरीद शुरू, क्रय केंद्रों पर पसरा सन्नाटा(संशोधित)
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फोटो 04 एयूआरपी -14 - मंडी में लगा गेहूं का ढेर। संवाद
- फोटो : AURAIYA
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औरैया। शासन ने किसानों के गेहूं का समर्थन मूल्य 2015 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया है। जबकि खुले बाजार में किसानों को आढ़ती 2050 रुपये दे रहे हैं। ऐसे में आढ़तों पर गेहूं की खरीद शुरू हो गई है। जबकि खरीद केंद्रों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। हालात ये हैं कि तीन दिन बीतने के बाद भी क्रय केंद्रों पर खरीद शून्य है।
शासन ने इस बार गेहूं का समर्थन मूल्य पिछले वर्ष की तुलना में 40 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाया है। इस वर्ष 2015 रुपये समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद हो रही है। खरीद के लिए जिले में अब तक 45 केंद्र खोले गए हैं।
इन सभी केंद्रों पर पर्याप्त व्यवस्थाएं की गई हैं। मगर बाजार में अधिक दाम मिलने के कारण तीन दिन बीतने के बाद भी खरीद केंद्रों का खाता नहीं खुला है। शहर की गल्ला मंडी में 2050 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से गेहूं खरीद हो रही है।
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ऐसे में किसानों ने क्रय केंद्रों से किनारा कर मंडी की तरफ रुख किया है। किसानों का कहना है बिना किसी सरकारी लिखा पढ़ी और झंझट से बचते हुए बाजार में अधिक दाम मिल रहे हैं तो क्रय केंद्रों पर सस्ते दामों पर गेहूं नहीं बेचेंगे। यही कारण है कि क्रय केंद्र सूने पड़े हुए हैं। हालांकि अधिकारी 15 अप्रैल के बाद खरीद में तेजी आने की बात कह रहे हैं।
क्रय केंद्रों पर गेहूं बेंचने की प्रक्रिया जटिल है। खुले बाजार की अपेक्षा एमएसपी भी कम है। ऐसे में क्रय केंद्रों पर गेहूं बेंचने क्यों जाएं। - राजू सिंह, किसान
क्षेत्र में गेहूं की फसल इस बार अपेक्षाकृत कम है। लागत भी बढ़ी है। बाजार में 2050 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहे हैं। सरकार को 200 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देना चाहिए। - राज कुमार, किसान
आने वाले दिनों में और बढ़ेंगे गेहूं के दाम
व्यापारी रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते गेहूं के दाम बढ़ने की संभावना जता रहे हैं। क्योंकि युद्ध के चलते वहां गेहूं की फसल बर्बाद हो गई है। ऐसे में भारत से गेहूं निर्यात की तैयारी चल रही है।
इसलिए आने वाले दिनों में गेहूं की कीमतों में इजाफा होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। वहीं सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं खरीद होगी की नहीं इस पर भी सवालिया निशान खड़ा हो गया है।
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शासन ने इस बार गेहूं का समर्थन मूल्य पिछले वर्ष की तुलना में 40 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाया है। इस वर्ष 2015 रुपये समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद हो रही है। खरीद के लिए जिले में अब तक 45 केंद्र खोले गए हैं।
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इन सभी केंद्रों पर पर्याप्त व्यवस्थाएं की गई हैं। मगर बाजार में अधिक दाम मिलने के कारण तीन दिन बीतने के बाद भी खरीद केंद्रों का खाता नहीं खुला है। शहर की गल्ला मंडी में 2050 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से गेहूं खरीद हो रही है।
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ऐसे में किसानों ने क्रय केंद्रों से किनारा कर मंडी की तरफ रुख किया है। किसानों का कहना है बिना किसी सरकारी लिखा पढ़ी और झंझट से बचते हुए बाजार में अधिक दाम मिल रहे हैं तो क्रय केंद्रों पर सस्ते दामों पर गेहूं नहीं बेचेंगे। यही कारण है कि क्रय केंद्र सूने पड़े हुए हैं। हालांकि अधिकारी 15 अप्रैल के बाद खरीद में तेजी आने की बात कह रहे हैं।
क्रय केंद्रों पर गेहूं बेंचने की प्रक्रिया जटिल है। खुले बाजार की अपेक्षा एमएसपी भी कम है। ऐसे में क्रय केंद्रों पर गेहूं बेंचने क्यों जाएं। - राजू सिंह, किसान
क्षेत्र में गेहूं की फसल इस बार अपेक्षाकृत कम है। लागत भी बढ़ी है। बाजार में 2050 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहे हैं। सरकार को 200 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देना चाहिए। - राज कुमार, किसान
आने वाले दिनों में और बढ़ेंगे गेहूं के दाम
व्यापारी रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते गेहूं के दाम बढ़ने की संभावना जता रहे हैं। क्योंकि युद्ध के चलते वहां गेहूं की फसल बर्बाद हो गई है। ऐसे में भारत से गेहूं निर्यात की तैयारी चल रही है।
इसलिए आने वाले दिनों में गेहूं की कीमतों में इजाफा होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। वहीं सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं खरीद होगी की नहीं इस पर भी सवालिया निशान खड़ा हो गया है।

फोटो 04 एयूआरपी -15 - राजू सिंह- फोटो : AURAIYA

फोटो 04 एयूआरपी -16 - राजकुमार- फोटो : AURAIYA