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तालाब में बह गई स्कूल की फर्श
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औरैया। शहर के गोविंद नगर स्थित जर्जर प्राथमिक विद्यालय में नौनिहाल खतरों के बीच पढ़ने को मजबूर हैं। हालात यह हैं कि तालाब के पानी में स्कूल के एक कमरे की फर्श तक बह चुकी है। बरगद के पेड़ से होकर गुजरे बिजली के तार नौनिहाल के लिए खतरा बने हुए हैं। लेकिन विभाग इन सबसे अनजान बना हुआ है।
गोविंद नगर स्थित प्राथमिक विद्यालय तालाब किनारे बना हुआ है। सालों से तालाब में सफाई न होने की वजह से गंदगी से पटा है। साथ ही तालाब के पानी से विद्यालय की दीवारों व फर्श में आई नमी के कारण वह ढह गई हैं। करीब चार सालों से बच्चे जर्जर विद्यालय में पढ़ने को मजबूर हैं।
वर्तमान में कक्षा एक से पांच तक के 40 बच्चे जान जोखिम में डालकर पढ़ रहे हैं। लेकिन शिक्षा विभाग को जानकारी होने के बाद भी वह कोई सुध नहीं ले रहा है। तालाब के पानी की वजह से विद्यालय का आधा हिस्सा बर्बाद हो चुका है।
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सांप व नेवलों का भी खतरा
तालाब के पानी व विद्यालय के आसपास फैली गंदगी की वजह से उसमें कई जहरीले जीव भी पनप गए हैं। विद्यालय में कई बार बच्चे नेवले व सांप को परिसर में देख चुके हैं। शोर मचाने पर प्रधानाध्यापक व रसोइयां लाठी-डंडे की मदद से उनको भगाने का काम करते हैं। वहीं, विद्यालय परिसर के ऊपर से बिजली के तार गुजरे हैं। यह बिजली के तार परिसर में लगे बरगद के पेड़ से छूते हैं। बारिश होने पर बरगद के पेड़ पर करंट आने की भी संभावना बढ़ जाती हैं।
स्कूल में नहीं है कोई सहायक अध्यापक
विद्यालय के प्रधानाचार्य सौरभ वर्मा ने बताया कि वह कई बार अपने विभागीय अधिकारियों को लिखित प्रार्थना पत्र दे चुके हैं। अभी तक किसी भी अधिकारी ने विद्यालय की सुध तक नहीं ली। स्कूल में कोई सहायक अध्यापक भी नहीं है, जिसकी वजह से बच्चों की शिक्षा पर थोड़ा प्रभाव पड़ता है।
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गोविंद नगर स्थित प्राथमिक विद्यालय तालाब किनारे बना हुआ है। सालों से तालाब में सफाई न होने की वजह से गंदगी से पटा है। साथ ही तालाब के पानी से विद्यालय की दीवारों व फर्श में आई नमी के कारण वह ढह गई हैं। करीब चार सालों से बच्चे जर्जर विद्यालय में पढ़ने को मजबूर हैं।
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वर्तमान में कक्षा एक से पांच तक के 40 बच्चे जान जोखिम में डालकर पढ़ रहे हैं। लेकिन शिक्षा विभाग को जानकारी होने के बाद भी वह कोई सुध नहीं ले रहा है। तालाब के पानी की वजह से विद्यालय का आधा हिस्सा बर्बाद हो चुका है।
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सांप व नेवलों का भी खतरा
तालाब के पानी व विद्यालय के आसपास फैली गंदगी की वजह से उसमें कई जहरीले जीव भी पनप गए हैं। विद्यालय में कई बार बच्चे नेवले व सांप को परिसर में देख चुके हैं। शोर मचाने पर प्रधानाध्यापक व रसोइयां लाठी-डंडे की मदद से उनको भगाने का काम करते हैं। वहीं, विद्यालय परिसर के ऊपर से बिजली के तार गुजरे हैं। यह बिजली के तार परिसर में लगे बरगद के पेड़ से छूते हैं। बारिश होने पर बरगद के पेड़ पर करंट आने की भी संभावना बढ़ जाती हैं।
स्कूल में नहीं है कोई सहायक अध्यापक
विद्यालय के प्रधानाचार्य सौरभ वर्मा ने बताया कि वह कई बार अपने विभागीय अधिकारियों को लिखित प्रार्थना पत्र दे चुके हैं। अभी तक किसी भी अधिकारी ने विद्यालय की सुध तक नहीं ली। स्कूल में कोई सहायक अध्यापक भी नहीं है, जिसकी वजह से बच्चों की शिक्षा पर थोड़ा प्रभाव पड़ता है।