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... लड़ा कर हमको आपस में सियासत मार डालेगी
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फोटो 04एयूआरपी10- काव्य गोष्ठी के दौरान मौजूद कवि।
- फोटो : AURAIYA
औरैया। बुंदेलखंडी भाषा के उत्कृष्ट साहित्यकार राधा चरण गुप्त ‘चरण जी’ की प्रथम जयंती पर काव्य गोष्ठी का आयोजन उनके आवास पर हुआ। कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को आनंदित किया।
शुभारंभ कवि गुरु प्रताप वर्मा ने मां सरस्वती की वंदना से की। ओज के युवा कवि गोपाल पांडेय आजाद ने अपनी रचना ‘राजनीति मानचित्र बदलना चाहती थीं, राष्ट्रीय हित पिस्टल की गोली आई काम में’ पढ़ी। स्व.राधा चरण की पौत्री सिद्धी गुप्ता ने अपने बाबा की कविता ‘मेरे मन को नील गगन सा जब विस्तार मिला’ को सुनाकर श्रोताओं की प्रशंसा बटोरी। डॉ. गोविंद द्विवेदी ने ‘पिता खुदकुशी पर तुला, बेटी है मजबूर, कितना महंगा हो गया, चुटकी भर सिंदूरें’ रचना पढ़ी। गीतकार रवि शंकर शुक्ला ने आज देखा ‘उमर की नदी घट गई, तीर पर हम खड़े के खड़े रह गए’, कवि देवी चरण वर्मा ‘दिव्यांशु’ ने ‘जैसे-जैसे जीवन बीता, उलझे माया जाल में, कब तक और रहूं क्या जानू, इस जग के जंजाल में’, गजलकार विवेक ‘बेदर्द’ ने ‘अजब है रिवायत तुम्हारे शहर में, मना है मुहब्बत तुम्हारे शहर में’, गजल सम्राट अयाज अहमद ‘अयाज’ ने ‘यह कुर्सी के पुजारी हैं सुनो हिंदू-मुसलमानों, लड़ा कर हम को आपस में सियासत मार डालेगी’, कवि प्रशांत अवस्थी ने ‘यादों के उपवन को देखो मैंने बहुत सजाया है, कुछ यादों पर गीत लिखे हैं कुछ को हृदय में दबाया है’ पढ़कर श्रोताओं की तालियां बटोरी।
कार्यक्रम के दौरान कवि प्रवीण गुप्ता, सुरेश चंद्र दुबे, रमेश शर्मा, हरिशंकर मिश्रा, अनिरुद्ध त्रिपाठी, आशीष मिश्रा, अवध नारायण गुप्ता आदि कवियों ने काव्यपाठ किया। काव्य पाठ शुभारंभ से पहले वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने साहित्यकार राधा चरण के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डाला। सर्वसम्मति से निर्णय लेते हुए चरण स्मृति ग्रंथ का संपादन वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. धर्मेंद्र प्रताप सिंह, पूर्व प्राचार्य को सौंपा गया। कार्यक्रम के अंत में आयोजक बृजेश बंधु ने सभी का आभार व्यक्त किया।
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शुभारंभ कवि गुरु प्रताप वर्मा ने मां सरस्वती की वंदना से की। ओज के युवा कवि गोपाल पांडेय आजाद ने अपनी रचना ‘राजनीति मानचित्र बदलना चाहती थीं, राष्ट्रीय हित पिस्टल की गोली आई काम में’ पढ़ी। स्व.राधा चरण की पौत्री सिद्धी गुप्ता ने अपने बाबा की कविता ‘मेरे मन को नील गगन सा जब विस्तार मिला’ को सुनाकर श्रोताओं की प्रशंसा बटोरी। डॉ. गोविंद द्विवेदी ने ‘पिता खुदकुशी पर तुला, बेटी है मजबूर, कितना महंगा हो गया, चुटकी भर सिंदूरें’ रचना पढ़ी। गीतकार रवि शंकर शुक्ला ने आज देखा ‘उमर की नदी घट गई, तीर पर हम खड़े के खड़े रह गए’, कवि देवी चरण वर्मा ‘दिव्यांशु’ ने ‘जैसे-जैसे जीवन बीता, उलझे माया जाल में, कब तक और रहूं क्या जानू, इस जग के जंजाल में’, गजलकार विवेक ‘बेदर्द’ ने ‘अजब है रिवायत तुम्हारे शहर में, मना है मुहब्बत तुम्हारे शहर में’, गजल सम्राट अयाज अहमद ‘अयाज’ ने ‘यह कुर्सी के पुजारी हैं सुनो हिंदू-मुसलमानों, लड़ा कर हम को आपस में सियासत मार डालेगी’, कवि प्रशांत अवस्थी ने ‘यादों के उपवन को देखो मैंने बहुत सजाया है, कुछ यादों पर गीत लिखे हैं कुछ को हृदय में दबाया है’ पढ़कर श्रोताओं की तालियां बटोरी।
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कार्यक्रम के दौरान कवि प्रवीण गुप्ता, सुरेश चंद्र दुबे, रमेश शर्मा, हरिशंकर मिश्रा, अनिरुद्ध त्रिपाठी, आशीष मिश्रा, अवध नारायण गुप्ता आदि कवियों ने काव्यपाठ किया। काव्य पाठ शुभारंभ से पहले वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने साहित्यकार राधा चरण के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डाला। सर्वसम्मति से निर्णय लेते हुए चरण स्मृति ग्रंथ का संपादन वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. धर्मेंद्र प्रताप सिंह, पूर्व प्राचार्य को सौंपा गया। कार्यक्रम के अंत में आयोजक बृजेश बंधु ने सभी का आभार व्यक्त किया।
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